टीएमसी के ₹440 करोड़ के फ्रीज खातों पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार, ईडी की कार्रवाई बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन एचडीएफसी बैंक खातों को फ्रीज करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निर्णय में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट इंकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने पार्टी के दैनिक कामकाज के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा स्थापित अंतरिम व्यवस्था को यथावत जारी रखने की अनुमति दी, जिसकी निगरानी न्यायालय-नियुक्त विशेष अधिकारी करेंगे। इन तीन खातों में कथित तौर पर लगभग ₹440 करोड़ जमा हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल पुलिस को शिकायत मिली कि इन खातों में भ्रष्टाचार और उगाही से जुड़ी रकम जमा हो सकती है। बैंक ने पुलिस के निर्देश पर पहले इन खातों पर निकासी पाबंदी लगाई। इसके बाद ईडी ने 23 जून को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17(1-ए) के तहत खातों से निकासी पर रोक लगा दी। ईडी का आरोप है कि लगभग ₹164 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने ईडी की कार्रवाई के विरुद्ध अंतरिम राहत देने से इंकार किया था। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश संतुलित है क्योंकि इससे पार्टी के दैनिक कामकाज पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता और खातों के संचालन पर न्यायिक निगरानी भी बनी रहती है।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे। दोनों मामलों का निपटारा करते हैं और इसे हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के विवेक पर छोड़ते हैं। जो भी कहना हो, मुख्य याचिका में कहिए।'
पक्षों के तर्क
TMC की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि फ्रीज खातों में ₹400 करोड़ से अधिक जमा हैं और पार्टी कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रही। उन्होंने तर्क दिया, 'अपराध से जुड़ी राशि से कहीं अधिक पैसे क्यों फ्रीज किए गए हैं? प्राप्तकर्ता खातों को भी फ्रीज किया जा रहा है — यह उचित नहीं है।'
वहीं, ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने बताया कि दैनिक खर्चों के लिए पार्टी को पहले से राहत मिली हुई है और लगभग ₹120 करोड़ उपलब्ध हैं। एक बागी TMC विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने दलील दी कि पार्टी के किसी एक गुट को खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
बागी नेता की याचिका का निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने TMC के बागी नेता बिस्वनाथ दास की अलग याचिका का भी निपटारा कर दिया। दास ने दावा किया था कि वही 'वास्तविक पार्टी' का प्रतिनिधित्व करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पार्टी के आंतरिक गुटबाजी के विवाद में पड़ने की स्थिति में नहीं है और सुनवाई केवल फ्रीज खातों के संचालन के सीमित प्रश्न तक सीमित है।
मौजूदा अंतरिम व्यवस्था
9 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने पार्टी को इन खातों से दैनिक और कानूनी खर्चों के लिए राशि निकालने की सशर्त अनुमति दी थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। इस व्यवस्था के तहत TMC के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता चेक पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, परंतु विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। मुख्य मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में जारी रहेगी।