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TMC के बैंक खाते फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, ईडी की कार्रवाई को दी गई है चुनौती

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TMC के बैंक खाते फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, ईडी की कार्रवाई को दी गई है चुनौती

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय TMC के तीन HDFC बैंक खातों को ईडी द्वारा फ्रीज किए जाने के खिलाफ पार्टी और राज्यसभा सांसद डोला सेन की याचिका पर सुनवाई करेगा। कलकत्ता उच्च न्यायालय पहले ही अंतरिम राहत देने से इनकार कर चुका है। ₹164 करोड़ से जुड़े इस मामले में PMLA के तहत राजनीतिक दलों के खातों पर ईडी की शक्तियों की सीमा तय हो सकती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्यसभा सांसद डोला सेन की SLP पर सुनवाई करेगा।
सुंदेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी.
वराले की पीठ मामले की सुनवाई करेगी।
ED ने PMLA की धारा 17(1-ए) के तहत TMC के तीन HDFC बैंक खाते फ्रीज किए थे; पार्टी के 36 अन्य खाते सक्रिय हैं जिनमें ₹164 करोड़ से अधिक जमा हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 20 जुलाई 2025 को अंतरिम राहत देने से इनकार किया था।
यह कार्रवाई 23 जून 2025 को बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज FIR पर आधारित है।
TMC ने इसे राजनीतिक दबाव अभियान का हिस्सा बताया है।

सर्वोच्च न्यायालय सोमवार, 4 अगस्त 2025 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पार्टी की राज्यसभा सांसद डोला सेन की उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करेगा, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पार्टी के तीन HDFC बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक कॉज-लिस्ट के अनुसार, यह मामला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 23 जून 2025 को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्रेडिकेट एफआईआर से उपजा है। उस एफआईआर के आधार पर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17(1-ए) के तहत एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर TMC के तीन HDFC बैंक खातों में डेबिट पर रोक लगा दी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन खातों के माध्यम से अवैध गतिविधियों — जिनमें प्रभाव का दुरुपयोग, बेईमानी से किए गए वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध तरीके से धन संग्रह शामिल हैं — से प्राप्त रकम का लेन-देन हुआ। साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने PMLA के अंतर्गत ECIR दर्ज की।

कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला

TMC ने पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल-पीठ ने 20 जुलाई 2025 को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

अपने आदेश में न्यायमूर्ति राव ने कहा, 'इस कोर्ट को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कोई प्रथम दृष्टया मामला या सुविधा-असुविधा का संतुलन नहीं मिला। इसे देखते हुए, याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगे गए अंतरिम आदेश को देने से इनकार किया जाता है।'

उच्च न्यायालय ने पाया कि ED ने पार्टी के खातों का विश्लेषण किया था और केयरवेल ग्रुप सहित विभिन्न संस्थाओं को भारी मात्रा में फंड ट्रांसफर का पता चला था। पीठ ने कहा कि अंतरिम चरण में उन लेन-देन की वैधता की जांच संभव नहीं है।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने यह भी नोट किया कि ED ने केवल छह बैंक खाते फ्रीज किए थे, जबकि TMC के 36 अन्य खाते सक्रिय थे, जिनमें ₹164 करोड़ से अधिक जमा थे। साथ ही, पीठ ने मामले की सुनवाई योग्यता पर ED की प्रारंभिक आपत्ति खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद ECIR कार्यवाही में मनमानी के आरोपों की जांच से उच्च न्यायालय को नहीं रोका जा सकता।

TMC का पक्ष और राजनीतिक आरोप

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई 'बिना सोचे-समझे और मनमाने ढंग' से की गई, और इसमें अपराध से प्राप्त किसी विशेष राशि की पहचान या उसे अलग नहीं किया गया। पार्टी का आरोप है कि यह कदम पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद उसके खिलाफ शुरू किए गए दबाव अभियान की एक कड़ी है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और पश्चिम बंगाल के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है, और विपक्षी दल लंबे समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं।

आगे की राह

अब सर्वोच्च न्यायालय की पीठ तय करेगी कि क्या कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता है। यह मामला न केवल TMC के वित्तीय संचालन बल्कि PMLA के तहत राजनीतिक दलों के खातों को फ्रीज करने की ED की शक्तियों की सीमाओं पर भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन TMC का यह तर्क कि किसी विशेष अपराध-राशि की पहचान किए बिना खाते फ्रीज किए गए, कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय यदि हस्तक्षेप करता है, तो यह विपक्षी दलों के खिलाफ PMLA के उपयोग पर एक बड़ा न्यायिक संदेश होगा — और यदि नहीं करता, तो ED की शक्तियों को और व्यापक मान्यता मिलेगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट में TMC की याचिका किस बारे में है?
तृणमूल कांग्रेस और राज्यसभा सांसद डोला सेन ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर कर ईडी द्वारा पार्टी के तीन HDFC बैंक खातों को फ्रीज किए जाने को चुनौती दी है। यह कार्रवाई PMLA की धारा 17(1-ए) के तहत की गई थी।
ईडी ने TMC के बैंक खाते क्यों फ्रीज किए?
ईडी ने 23 जून 2025 को बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज FIR के आधार पर ECIR दर्ज कर खाते फ्रीज किए। एजेंसी का कहना है कि खातों के विश्लेषण में केयरवेल ग्रुप सहित विभिन्न संस्थाओं को ₹164 करोड़ से अधिक के संदिग्ध फंड ट्रांसफर का पता चला।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC को राहत क्यों नहीं दी?
कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 20 जुलाई 2025 को कहा कि उन्हें याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं मिला। पीठ ने माना कि लेन-देन की वैधता की जांच अंतरिम चरण में नहीं की जा सकती।
TMC के कितने बैंक खाते फ्रीज हैं और कितने सक्रिय हैं?
ईडी ने कुल छह बैंक खाते फ्रीज किए हैं, जबकि पार्टी के 36 अन्य खाते सक्रिय हैं जिनमें ₹164 करोड़ से अधिक जमा हैं। यह तथ्य कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नोट किया था।
इस मामले का राजनीतिक महत्व क्या है?
TMC का आरोप है कि यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद पार्टी के खिलाफ दबाव अभियान की कड़ी है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला PMLA के तहत राजनीतिक दलों के खातों पर ईडी की शक्तियों की सीमा तय करने में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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