TMC के बैंक खाते फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, ईडी की कार्रवाई को दी गई है चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय सोमवार, 4 अगस्त 2025 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पार्टी की राज्यसभा सांसद डोला सेन की उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करेगा, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पार्टी के तीन HDFC बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक कॉज-लिस्ट के अनुसार, यह मामला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 23 जून 2025 को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्रेडिकेट एफआईआर से उपजा है। उस एफआईआर के आधार पर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17(1-ए) के तहत एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर TMC के तीन HDFC बैंक खातों में डेबिट पर रोक लगा दी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन खातों के माध्यम से अवैध गतिविधियों — जिनमें प्रभाव का दुरुपयोग, बेईमानी से किए गए वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध तरीके से धन संग्रह शामिल हैं — से प्राप्त रकम का लेन-देन हुआ। साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने PMLA के अंतर्गत ECIR दर्ज की।
कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला
TMC ने पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल-पीठ ने 20 जुलाई 2025 को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
अपने आदेश में न्यायमूर्ति राव ने कहा, 'इस कोर्ट को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कोई प्रथम दृष्टया मामला या सुविधा-असुविधा का संतुलन नहीं मिला। इसे देखते हुए, याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगे गए अंतरिम आदेश को देने से इनकार किया जाता है।'
उच्च न्यायालय ने पाया कि ED ने पार्टी के खातों का विश्लेषण किया था और केयरवेल ग्रुप सहित विभिन्न संस्थाओं को भारी मात्रा में फंड ट्रांसफर का पता चला था। पीठ ने कहा कि अंतरिम चरण में उन लेन-देन की वैधता की जांच संभव नहीं है।
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने यह भी नोट किया कि ED ने केवल छह बैंक खाते फ्रीज किए थे, जबकि TMC के 36 अन्य खाते सक्रिय थे, जिनमें ₹164 करोड़ से अधिक जमा थे। साथ ही, पीठ ने मामले की सुनवाई योग्यता पर ED की प्रारंभिक आपत्ति खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद ECIR कार्यवाही में मनमानी के आरोपों की जांच से उच्च न्यायालय को नहीं रोका जा सकता।
TMC का पक्ष और राजनीतिक आरोप
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई 'बिना सोचे-समझे और मनमाने ढंग' से की गई, और इसमें अपराध से प्राप्त किसी विशेष राशि की पहचान या उसे अलग नहीं किया गया। पार्टी का आरोप है कि यह कदम पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद उसके खिलाफ शुरू किए गए दबाव अभियान की एक कड़ी है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और पश्चिम बंगाल के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है, और विपक्षी दल लंबे समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं।
आगे की राह
अब सर्वोच्च न्यायालय की पीठ तय करेगी कि क्या कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता है। यह मामला न केवल TMC के वित्तीय संचालन बल्कि PMLA के तहत राजनीतिक दलों के खातों को फ्रीज करने की ED की शक्तियों की सीमाओं पर भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत स्थापित कर सकता है।