NSE IPO का GMP एक हफ्ते में 32% टूटा, ₹22,561 करोड़ के इश्यू पर निवेशकों की चिंता बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) बीते एक सप्ताह में करीब 32 प्रतिशत गिर चुका है — 11 सितंबर 2026 के ₹218 प्रति शेयर से घटकर 17 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक ₹148 प्रति शेयर पर आ गया। मुंबई स्थित इस एक्सचेंज का IPO गुरुवार, 18 सितंबर को आम निवेशकों के लिए खुला और 21 सितंबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा।
GMP में गिरावट का क्रम
रिपोर्टों के अनुसार, NSE IPO के GMP में गिरावट लगातार और तेज रही है। 11 सितंबर को GMP ₹218 था, जो 12 सितंबर को ₹208, 13 सितंबर को ₹210, 14 सितंबर को ₹208, 15 सितंबर को ₹160, 16 सितंबर को ₹145 और 17 सितंबर को ₹125 पर आ गया। दोपहर बाद यह मामूली सुधरकर ₹148 पर पहुँचा, लेकिन साप्ताहिक गिरावट 32 प्रतिशत के करीब बनी रही।
गौरतलब है कि GMP एक अनाधिकारिक बाज़ार मूल्य होता है, जो इश्यू प्राइस से ऊपर मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। यह इश्यू प्राइस से ऊपर लिस्टिंग की कोई गारंटी नहीं देता और इसे विनियमित बाज़ार का हिस्सा नहीं माना जाता।
IPO का ढाँचा और मूल्य बैंड
NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। ऊपरी बैंड के आधार पर इसका कुल इश्यू साइज ₹22,561.57 करोड़ है, जिसमें 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।
यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल (OFS) है, अर्थात इसके तहत जुटाई गई सम्पूर्ण राशि मौजूदा निवेशकों के पास जाएगी — कंपनी को कोई नई पूँजी प्राप्त नहीं होगी। यह पहलू विशेषज्ञों के लिए ध्यान का विषय है, क्योंकि OFS संरचना में कंपनी के विस्तार या ऋण-भुगतान के लिए कोई फंड नहीं जाता।
कमजोर वित्तीय प्रदर्शन — निवेशकों की प्रमुख चिंता
NSE के लिए निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कंपनी का वित्त वर्ष 2026 का कमजोर वित्तीय प्रदर्शन है। वित्त वर्ष 26 में ऑपरेशन से आय ₹16,601.31 करोड़ रही, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह ₹17,140.67 करोड़ थी — यानी सालाना आधार पर 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट।
इससे भी अहम यह है कि कंपनी की आय का मुख्य स्रोत, ट्रांजैक्शन चार्जेज, भी दबाव में रहा। समीक्षा अवधि में यह ₹13,635.76 करोड़ से घटकर ₹13,057.01 करोड़ पर आ गया — सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की गिरावट। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पूँजी बाज़ार में कारोबारी गतिविधि आम तौर पर बढ़ रही है, जो कंपनी की बाज़ार हिस्सेदारी पर सवाल खड़े करता है।
आम जनता और निवेशकों पर असर
NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और इसके IPO को भारतीय वित्तीय बाज़ार के इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। हालाँकि, GMP में लगातार गिरावट और वित्तीय आँकड़ों की कमजोरी ने खुदरा निवेशकों की उत्साह को कुछ ठंडा किया है।
विश्लेषकों के अनुसार, चूँकि IPO पूरी तरह OFS आधारित है, इसलिए निवेश का लाभ सीधे कंपनी की भविष्य की वृद्धि से नहीं जुड़ा, बल्कि द्वितीयक बाज़ार में लिस्टिंग गेन पर निर्भर करेगा — जो मौजूदा GMP के रुझान के आधार पर अनिश्चित बना हुआ है।
आगे क्या होगा
NSE IPO का सब्सक्रिप्शन 21 सितंबर 2026 तक खुला रहेगा। लिस्टिंग की तारीख अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुई है। बाज़ार विशेषज्ञों की नज़र संस्थागत निवेशकों (QIB) के सब्सक्रिप्शन के आँकड़ों पर होगी, जो यह तय करेंगे कि IPO को वास्तविक माँग मिलती है या नहीं।