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NSE IPO के GMP में गिरावट से NIACL और IFCI के शेयर 14% तक धराशायी

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NSE IPO के GMP में गिरावट से NIACL और IFCI के शेयर 14% तक धराशायी

सारांश

NSE के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम तीन दिन में ₹310 से ₹221 पर आ गया — और इस गिरावट की सीधी मार NIACL और IFCI के शेयरों पर पड़ी, जो 14% तक टूट गए। SEBI का ऑब्जर्वेशन लेटर मिल चुका है, लेकिन बाज़ार की बेचैनी बता रही है कि असली परीक्षा अभी बाकी है।

मुख्य बातें

NIACL के शेयर 8 सितंबर को इंट्राडे में ₹199.52 तक गिरे, पिछली क्लोजिंग ₹231.20 से 13.71% नीचे।
IFCI का इंट्राडे लो ₹92.75 रहा, पिछली क्लोजिंग ₹102.51 से 9.5% कम।
NSE IPO का GMP 5 सितंबर के ₹310 से घटकर 8 सितंबर को ₹221 प्रति शेयर पर आया।
SEBI ने NSE के करीब ₹30,000 करोड़ के IPO के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी किया।
NSE का IPO पूरी तरह OFS होगा; करीब 14.89 करोड़ शेयर बिकेंगे, जो पेड-अप कैपिटल का करीब 6% है।
NIACL की NSE में 1.42% और IFCI की SHCIL के ज़रिए NSE में अप्रत्यक्ष 4.4% हिस्सेदारी है।

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NIACL) और IFCI के शेयर 8 सितंबर को 14 प्रतिशत तक लुढ़क गए, क्योंकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में तीखी गिरावट दर्ज की गई। NSE IPO की संभावित लिस्टिंग की उम्मीद में बीते कुछ हफ्तों में इन शेयरों में जो तेज़ी आई थी, वह अब उलटती दिख रही है।

NIACL के शेयरों में भारी बिकवाली

NIACL के शेयर ने मंगलवार के कारोबार में ₹199.52 का इंट्राडे लो बनाया, जो इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस ₹231.20 से 13.71 प्रतिशत कम है। दोपहर 12 बजे IST तक यह शेयर NSE पर 9.50 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹209.50 पर कारोबार कर रहा था।

गौरतलब है कि NIACL के पास NSE में 1.42 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। NSE IPO की अटकलों के चलते यह शेयर बीते कुछ हफ्तों में करीब 30 प्रतिशत चढ़ चुका था — अब वही तेज़ी पलट रही है।

IFCI के शेयरों पर भी दबाव

IFCI के शेयर ने इंट्राडे में ₹92.75 का निचला स्तर छुआ, जो इसकी पिछली क्लोजिंग ₹102.51 से 9.5 प्रतिशत कम है। उसी समय यह 8.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹94.16 पर था।

यह ऐसे समय में आया है जब IFCI के पास स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) में 52 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और SHCIL की NSE में करीब 4.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस अप्रत्यक्ष जुड़ाव के कारण IFCI के शेयर में गिरावट से पहले 40 प्रतिशत तक की तेज़ी देखी गई थी।

NSE IPO का GMP: तीन दिन में बड़ी गिरावट

NSE के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम 5 सितंबर को ₹310 प्रति शेयर पर था, जो 8 सितंबर तक घटकर ₹221 प्रति शेयर पर आ गया — यानी महज़ तीन दिनों में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट। GMP का यह उतार-चढ़ाव संबंधित शेयरों की कीमतों पर सीधा असर डाल रहा है।

सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर और आगे की प्रक्रिया

बीते शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने NSE के करीब ₹30,000 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी किया। इसका अर्थ है कि एक्सचेंज अब आईपीओ की अंतिम प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है और उसे SEBI के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करना होगा, जिसके बाद आईपीओ बाज़ार में आ सकता है।

NSE का यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा, यानी इससे प्राप्त राशि सीधे कंपनी के खाते में नहीं जाएगी। इसके तहत करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री प्रस्तावित है, जो NSE के कुल पेड-अप कैपिटल का करीब 6 प्रतिशत हो सकता है।

आगे क्या होगा

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, GMP में आई गिरावट निवेशकों के बीच आईपीओ की लिस्टिंग कीमत को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है। NIACL और IFCI जैसे शेयरों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जब तक NSE का RHP दाखिल नहीं हो जाता और आईपीओ की तारीख स्पष्ट नहीं होती।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ खुदरा निवेशक ग्रे मार्केट के अनुमानों के आधार पर संबंधित शेयरों में सट्टा लगाते हैं — और जब GMP पलटता है, तो नुकसान असली होता है। SEBI का ऑब्जर्वेशन लेटर एक नियामकीय मील का पत्थर है, लेकिन यह IPO की सफलता की गारंटी नहीं। OFS संरचना यह भी बताती है कि NSE को पूँजी की ज़रूरत नहीं, बल्कि मौजूदा शेयरधारक निकास चाहते हैं — जो नए निवेशकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। बिना RHP और कीमत-बैंड के, GMP महज़ अटकल है — और आज का बाज़ार यही याद दिला रहा है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE IPO के GMP में गिरावट से NIACL और IFCI के शेयर क्यों गिरे?
NIACL और IFCI दोनों की NSE में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है, इसलिए NSE IPO के GMP में गिरावट से इन शेयरों की कीमतें भी दबाव में आ गईं। GMP 5 सितंबर के ₹310 से घटकर 8 सितंबर को ₹221 पर आ गया, जिससे निवेशकों ने इन शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
NSE IPO क्या है और इसकी स्थिति क्या है?
NSE का प्रस्तावित IPO करीब ₹30,000 करोड़ का है और यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में आएगा। SEBI ने इसके लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया है; अब NSE को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करना होगा, जिसके बाद IPO बाज़ार में आ सकता है।
NIACL और IFCI की NSE में कितनी हिस्सेदारी है?
NIACL की NSE में सीधे 1.42 प्रतिशत हिस्सेदारी है। IFCI की SHCIL में 52 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और SHCIL की NSE में करीब 4.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है — यानी IFCI की NSE में अप्रत्यक्ष भागीदारी है।
NSE IPO में OFS का क्या अर्थ है और निवेशकों पर इसका क्या असर होगा?
OFS (ऑफर फॉर सेल) का अर्थ है कि IPO से मिलने वाली राशि NSE की कंपनी के खाते में नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इसके तहत करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी, जो NSE के कुल पेड-अप कैपिटल का करीब 6 प्रतिशत है।
NSE IPO के GMP में इतनी तेज़ गिरावट कब से आई?
NSE IPO का GMP 5 सितंबर को ₹310 प्रति शेयर था, जो 8 सितंबर तक घटकर ₹221 प्रति शेयर पर आ गया — महज़ तीन दिनों में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट। इसी गिरावट ने संबंधित शेयरों में बिकवाली को हवा दी।
राष्ट्र प्रेस
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