सेंसेक्स 73,983 पर सपाट बंद, मिडकैप 905 अंक टूटा; वैश्विक अस्थिरता और FII बिकवाली का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स बुधवार, 10 जून को 64.42 अंक की मामूली बढ़त के साथ 73,983.18 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 27.15 अंक की गिरावट के साथ 23,214.95 पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में छाई अनिश्चितता, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और अमेरिका-ईरान तनाव के चलते व्यापक बाजारों में भारी दबाव देखा गया।
मुख्य घटनाक्रम
दिन की शुरुआत तेजी के साथ हुई — सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,918.76 से 69.51 अंक ऊपर 73,988.27 पर खुला, और निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,242.10 से 8.15 अंक नीचे 23,233.95 पर खुला। हालांकि कारोबार के मध्य में दोनों बेंचमार्क में बढ़त देखने को मिली, लेकिन अंत में बाजार सपाट या मामूली नुकसान के साथ बंद हुआ।
व्यापक बाजारों में नुकसान कहीं अधिक गहरा रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 905.25 अंक यानी 1.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,810.20 पर बंद हुआ, और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 241.10 अंक यानी 1.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,822.50 पर बंद हुआ।
सेक्टोरल प्रदर्शन
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी मीडिया, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में बंद हुए।
दूसरी तरफ, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी सर्विसेज हरे निशान में रहे।
सेंसेक्स के शेयरों में HUL, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank, ITC, HDFC Bank, L&T, Sun Pharma, Power Grid और TCS बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं Eternal, Tata Steel, Bajaj Finserv, Titan, HCL Tech, M&M, Bharti Airtel, NTPC, BEL, Infosys और Trent नुकसान में रहे।
वैश्विक दबाव और FII बिकवाली
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सियोल, हांगकांग, टोक्यो और अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों में आई गिरावट ने भारतीय बाजार में बिकवाली को हवा दी। इसके साथ ही FII की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाए हुए है। मंगलवार को FII ने इक्विटी में ₹4,566.03 करोड़ की बिकवाली की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर किया हुआ है। इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है — ब्रेंट क्रूड फिर से 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है, जो आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अतिरिक्त चिंता का विषय है।
आम निवेशक पर असर
मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली से खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो पर सीधा असर पड़ा है, क्योंकि इन वर्गों में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी अधिक होती है। गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों से मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में लगातार दबाव बना हुआ है, जो बड़े-कैप शेयरों की तुलना में कहीं अधिक तीव्र रहा है।
क्या होगा आगे
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, FII के रुख, ब्रेंट क्रूड की दिशा और अमेरिका-ईरान तनाव के घटनाक्रम पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी। जब तक वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं होती, व्यापक बाजारों में दबाव जारी रहने की संभावना है।