सेंसेक्स 1,695 अंक उछला, निफ्टी 23,623 पर बंद; अमेरिका-ईरान शांति वार्ता और क्रूड में गिरावट से बाजार में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 13 जून 2025 को 1,695 अंक यानी 2.30 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 75,528 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 1.99 प्रतिशत चढ़कर 23,623 के स्तर पर पहुँचा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर निवेशकों में बढ़ते भरोसे और ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार को लगातार दो सप्ताह की गिरावट के बाद मजबूत पलटाव दिलाया।
साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े
पूरे सप्ताह के आधार पर सेंसेक्स में 1.73 प्रतिशत और निफ्टी में 1.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजार सूचकांकों का प्रदर्शन भी सकारात्मक रहा — निफ्टी मिडकैप-100 इंडेक्स 0.98 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप-100 इंडेक्स 0.48 प्रतिशत मजबूत हुआ। हालाँकि, हालिया तेज रैली के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव भी देखा गया।
सेक्टोरल प्रदर्शन: विजेता और पिछड़े
सेक्टोरल मोर्चे पर वित्तीय क्षेत्र सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निजी बैंकों में सकारात्मक नियामकीय घटनाक्रम और निवेशकों के रक्षात्मक रुख के कारण इन शेयरों में जोरदार खरीदारी हुई। एफएमसीजी शेयरों ने भी कीमतों को बनाए रखने की क्षमता के दम पर तेजी दर्ज की।
दूसरी ओर, आईटी सेक्टर में बिकवाली का सिलसिला जारी रहा। चीन में माँग कमजोर रहने की आशंकाओं और कमोडिटी कीमतों में नरमी के कारण मेटल शेयरों पर भी दबाव बना रहा। विश्लेषकों के अनुसार, लार्ज-कैप शेयरों का प्रदर्शन समग्र रूप से बेहतर रहा।
एफआईआई बनाम डीआईआई: निवेश प्रवाह की तस्वीर
सप्ताह के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब ₹15,300 करोड़ के शेयर बेचे, जो बाजार के लिए एक प्रमुख चुनौती बनी रही। हालाँकि सप्ताह के अंतिम दिनों में बिकवाली की गति कुछ धीमी पड़ी। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने मजबूत खरीदारी जारी रखी और सप्ताह भर में करीब ₹24,000 करोड़ का शुद्ध निवेश किया — जो बाजार को संभालने में निर्णायक भूमिका रही।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक चुनौतियों और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में इस सप्ताह कुछ नरमी आई, लेकिन लगातार बने महंगाई दबाव और मजबूत रोजगार आँकड़ों के कारण ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें फिलहाल टलती नजर आ रही हैं।
बॉन्ड बाजार और आरबीआई का प्रभाव
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीतियों से बाजार में बढ़ी तरलता और ऋण बाजार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण भारतीय बॉन्ड यील्ड में भी गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में है जब वैश्विक बॉन्ड बाजारों में उथल-पुथल जारी है।
तकनीकी स्तर और आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस रहेगा, जबकि 23,550–23,500 का क्षेत्र तत्काल समर्थन (इमीडिएट सपोर्ट) का काम कर सकता है। बैंक निफ्टी के लिए 56,900–57,000 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस और 56,500–56,400 का दायरा इमीडिएट सपोर्ट क्षेत्र माना जा रहा है।
एक विश्लेषक ने कहा, 'भारतीय शेयर बाजार पूरे सप्ताह सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और हल्के नकारात्मक रुख के बावजूद सप्ताह के अंत में इसमें अच्छी रिकवरी देखने को मिली।' आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर घरेलू थोक मूल्य सूचकांक (WPI) महंगाई के आँकड़ों, चीन के औद्योगिक उत्पादन के आँकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के आगामी ब्याज दर फैसले पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।