सेंसेक्स 231 अंक उछला, निफ्टी 23,719 पर बंद; कच्चे तेल में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता से बाज़ार को मिला सहारा
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 23 मई 2026 को 231 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,415 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता की खबरों ने निवेशकों की धारणा को मज़बूत किया, जिससे पूरे सप्ताह बाज़ार में सकारात्मक रुझान बना रहा।
साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े
सप्ताह भर के कारोबार में सेंसेक्स में कुल 0.24 प्रतिशत की तेज़ी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 ने सप्ताह में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। मिडकैप और स्मॉलकैप खंडों ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया — निफ्टी मिडकैप100 में 1.36 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की बढ़त रही।
हालाँकि, बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार ऊँचे स्तरों पर मज़बूत खरीदारी का अभाव रहा, जिससे तेज़ी की रफ्तार सीमित रही। एक विश्लेषक ने कहा, 'बाज़ार में सुधार के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। ऊँचे स्तरों पर मज़बूत खरीदारी नहीं दिखने से बाज़ार की तेज़ी सीमित रही।'
सेक्टर-वार प्रदर्शन
आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के चलते निवेशकों की रुचि इस सेक्टर में बढ़ी। रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मज़बूती बनी रही।
दूसरी ओर, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर दबाव में रहे। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के असर से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की चिंता बाज़ार में बनी रही, जिसने इन क्षेत्रों की रिकवरी को सीमित किया।
वैश्विक संकेत और बॉन्ड बाज़ार का असर
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई। इससे लगातार बनी महंगाई, ऊँची ऊर्जा कीमतों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएँ गहरी हुई हैं।
यह आशंका और मज़बूत हुई कि लंबे समय तक ऊँची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक लिक्विडिटी और जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है। घरेलू बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी वजह बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाएँ रहीं। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मध्य पूर्व में तनाव घटाने की कोशिशों से भारतीय रुपए को भी समर्थन मिला।
एफआईआई की बिकवाली और तकनीकी स्तर
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिकवाली जारी रखी और कुल निकासी लगभग ₹7,570 करोड़ रही। यह लगातार बिकवाली का दबाव बाज़ार की ऊपरी चाल को रोकने वाला प्रमुख कारक रहा।
तकनीकी नज़रिए से, निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मज़बूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा। बैंक निफ्टी में 54,200 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस और 53,600 से 53,500 का स्तर मज़बूत सपोर्ट जोन के रूप में देखा जा रहा है।
आगे के लिए अहम संकेतक
निवेशकों की नज़र अब भारत के अप्रैल माह के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आँकड़ों पर है, जो यह तय करने में मदद करेंगे कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालिया कमज़ोरी अस्थायी है या दीर्घकालिक। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर PCE आँकड़े भी बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे। यदि PCE आँकड़े अपेक्षा से अधिक आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कमज़ोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाज़ारों में FII निवेश सीमित रह सकता है।