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सेंसेक्स 231 अंक उछला, निफ्टी 23,719 पर बंद; कच्चे तेल में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता से बाज़ार को मिला सहारा

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सेंसेक्स 231 अंक उछला, निफ्टी 23,719 पर बंद; कच्चे तेल में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता से बाज़ार को मिला सहारा

सारांश

कच्चे तेल में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीद ने इस सप्ताह भारतीय बाज़ारों को संभाला — सेंसेक्स 75,415 और निफ्टी 23,719 पर बंद हुए। लेकिन FII की ₹7,570 करोड़ की बिकवाली और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 2007 के बाद के उच्चतम स्तर ने तेज़ी की रफ्तार पर लगाम लगाए रखी।

मुख्य बातें

सेंसेक्स शुक्रवार को 231 अंक (0.31%) बढ़कर 75,415 पर बंद; सप्ताह में कुल 0.24% की तेज़ी।
निफ्टी 50 0.27% चढ़कर 23,719 पर बंद; साप्ताहिक बढ़त 0.32% रही।
निफ्टी मिडकैप100 में 1.36% और निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41% की साप्ताहिक बढ़त।
FII ने इस सप्ताह लगभग ₹7,570 करोड़ की निकासी की, जिससे बाज़ार की ऊपरी चाल सीमित रही।
अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँची।
आगे RBI जून नीति , IIP आँकड़े और अमेरिकी कोर PCE बाज़ार की दिशा तय करेंगे।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 23 मई 2026 को 231 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,415 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता की खबरों ने निवेशकों की धारणा को मज़बूत किया, जिससे पूरे सप्ताह बाज़ार में सकारात्मक रुझान बना रहा।

साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े

सप्ताह भर के कारोबार में सेंसेक्स में कुल 0.24 प्रतिशत की तेज़ी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 ने सप्ताह में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। मिडकैप और स्मॉलकैप खंडों ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया — निफ्टी मिडकैप100 में 1.36 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की बढ़त रही।

हालाँकि, बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार ऊँचे स्तरों पर मज़बूत खरीदारी का अभाव रहा, जिससे तेज़ी की रफ्तार सीमित रही। एक विश्लेषक ने कहा, 'बाज़ार में सुधार के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। ऊँचे स्तरों पर मज़बूत खरीदारी नहीं दिखने से बाज़ार की तेज़ी सीमित रही।'

सेक्टर-वार प्रदर्शन

आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के चलते निवेशकों की रुचि इस सेक्टर में बढ़ी। रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मज़बूती बनी रही।

दूसरी ओर, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर दबाव में रहे। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के असर से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की चिंता बाज़ार में बनी रही, जिसने इन क्षेत्रों की रिकवरी को सीमित किया।

वैश्विक संकेत और बॉन्ड बाज़ार का असर

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई। इससे लगातार बनी महंगाई, ऊँची ऊर्जा कीमतों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएँ गहरी हुई हैं।

यह आशंका और मज़बूत हुई कि लंबे समय तक ऊँची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक लिक्विडिटी और जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है। घरेलू बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी वजह बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाएँ रहीं। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मध्य पूर्व में तनाव घटाने की कोशिशों से भारतीय रुपए को भी समर्थन मिला।

एफआईआई की बिकवाली और तकनीकी स्तर

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिकवाली जारी रखी और कुल निकासी लगभग ₹7,570 करोड़ रही। यह लगातार बिकवाली का दबाव बाज़ार की ऊपरी चाल को रोकने वाला प्रमुख कारक रहा।

तकनीकी नज़रिए से, निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मज़बूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा। बैंक निफ्टी में 54,200 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस और 53,600 से 53,500 का स्तर मज़बूत सपोर्ट जोन के रूप में देखा जा रहा है।

आगे के लिए अहम संकेतक

निवेशकों की नज़र अब भारत के अप्रैल माह के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आँकड़ों पर है, जो यह तय करने में मदद करेंगे कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालिया कमज़ोरी अस्थायी है या दीर्घकालिक। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर PCE आँकड़े भी बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे। यदि PCE आँकड़े अपेक्षा से अधिक आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कमज़ोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाज़ारों में FII निवेश सीमित रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी नींव कमज़ोर है — यह घरेलू आर्थिक मज़बूती से नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक उम्मीदों और कच्चे तेल की अस्थायी नरमी से मिली है। FII की ₹7,570 करोड़ की निकासी बताती है कि विदेशी पूँजी अभी भी भारत को लेकर आश्वस्त नहीं है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँचना एक गंभीर संकेत है — यह वैश्विक लिक्विडिटी को उभरते बाज़ारों से दूर खींच सकता है। जब तक RBI की जून नीति और IIP आँकड़े घरेलू माँग की पुष्टि नहीं करते, यह तेज़ी टिकाऊ कम और संवेदनशील अधिक लगती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी बढ़त हुई?
सेंसेक्स शुक्रवार 23 मई 2026 को 231 अंक (0.31%) उछलकर 75,415 पर बंद हुआ और पूरे सप्ताह में 0.24% की तेज़ी रही। निफ्टी 50 दिन में 0.27% चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ, जबकि साप्ताहिक बढ़त 0.32% रही।
बाज़ार में इस सप्ताह तेज़ी के क्या कारण रहे?
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता की खबरों ने निवेशकों की धारणा को मज़बूत किया। इससे भारतीय रुपए को भी समर्थन मिला और आईटी सेक्टर में आकर्षक वैल्यूएशन पर खरीदारी बढ़ी।
FII ने इस सप्ताह कितनी निकासी की और इसका बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस सप्ताह लगभग ₹7,570 करोड़ की निकासी की। इस बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण बाज़ार की ऊपरी चाल सीमित रही और ऊँचे स्तरों पर मज़बूत खरीदारी नहीं दिखी।
निफ्टी 50 के लिए अगले सप्ताह के अहम तकनीकी स्तर क्या हैं?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मज़बूत रेजिस्टेंस जोन है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा। बैंक निफ्टी में 54,200 पर रेजिस्टेंस और 53,600 से 53,500 पर सपोर्ट देखा जा रहा है।
आगे बाज़ार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?
निवेशकों की नज़र भारत के अप्रैल IIP आँकड़ों, RBI की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर PCE आँकड़ों पर है। यदि PCE आँकड़े अधिक आते हैं तो फेडरल रिज़र्व की दर कटौती की उम्मीदें कमज़ोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाज़ारों में FII निवेश प्रभावित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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