सेंसेक्स 1,200 अंक उछला, निफ्टी 23,984 पर खुला — अमेरिका-ईरान शांति समझौते से बाजार में जबरदस्त तेजी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सोमवार, 16 जून 2025 को लगभग 1,200 अंक यानी 1.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,725.27 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 करीब 360 अंक यानी 1.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,984.85 पर खुला। यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक जोखिम भावना में आई मजबूती का सीधा परिणाम है। पश्चिम एशिया में चार महीने से जारी संघर्ष के खत्म होने की उम्मीद ने निवेशकों में उत्साह भर दिया।
बाजार का शुरुआती प्रदर्शन
खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 1,089.96 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,617.91 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी 341.45 अंक यानी 1.45 प्रतिशत ऊपर 23,964.35 पर ट्रेड कर रहा था। व्यापक बाजारों में भी खरीदारी का जोश दिखा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
सेक्टरवार तेजी: मेटल और रियल्टी सबसे आगे
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल में सबसे अधिक 3.61 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स दोनों में 2.3 प्रतिशत, तथा निफ्टी ऑटो में 2.2 प्रतिशत की तेजी आई। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.9 प्रतिशत, और निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.4 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। हालाँकि, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी के केवल 5 शेयर लाल निशान में रहे, जबकि श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, इटरनल, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी सबसे बड़े लाभार्थी रहे।
अमेरिका-ईरान समझौता: पृष्ठभूमि और महत्व
राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। मैं इसके द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूर्ण रूप से अनुमति देता हूँ और साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक अवरोध को तत्काल हटाने की भी अनुमति देता हूँ।' रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तत्काल समाप्त करने की घोषणा की है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले चार महीनों में हजारों लोगों की जान जा चुकी थी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
कच्चे तेल में भारी गिरावट, भारत को राहत
समझौते की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 5 प्रतिशत गिरकर $83.05 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 5.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ लगभग $80 प्रति बैरल पर पहुँच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है, जो भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देशों के लिए बड़ी राहत है।
विशेषज्ञों की राय: GDP और महँगाई अनुमान सुधरे
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएँ बेहतर हुई हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा कि इस बदले परिदृश्य में वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान संशोधित कर 6.9 प्रतिशत और CPI मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत किया जा सकता है। गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में हर बड़ी गिरावट सीधे चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति पर असर डालती है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक इस समझौते के क्रियान्वयन और वैश्विक प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।