सेंसेक्स 400 अंक से ज़्यादा उछला, निफ्टी 23,245 पर; पश्चिम एशिया तनाव में राहत से बाज़ार हरे निशान में
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स मंगलवार, 9 जून को सुबह के कारोबार में 409.79 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,934.05 पर ट्रेड करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 122.15 अंक (0.53 प्रतिशत) चढ़कर 23,245.15 पर कारोबार कर रहा था। पश्चिम एशिया में ईरान-इज़रायल तनाव में अस्थायी विराम और ब्रेंट क्रूड के 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से निवेशकों की धारणा मज़बूत हुई।
बाज़ार का शुरुआती कारोबार
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद स्तर 73,524.26 के मुकाबले 511.15 अंक की छलांग के साथ 74,035.41 पर कारोबार की शुरुआत की। निफ्टी 50 भी पिछले बंद 23,123 से 136.05 अंक ऊपर 23,259.05 पर खुला। व्यापक बाज़ार में भी तेज़ी का माहौल रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.09 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करते नज़र आए।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ और निफ्टी बैंक में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी फार्मा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल और निफ्टी ऑयल एंड गैस ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके विपरीत, निफ्टी आईटी में गिरावट रही और यह सत्र का सबसे कमज़ोर सेक्टर बना।
निफ्टी 50 के शीर्ष लाभार्थियों में इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक, ग्रासिम इंडस्ट्रीज़, ट्रेंट और एक्सिस बैंक शामिल रहे, जबकि टाइटन, इन्फोसिस, एनटीपीसी, कोल इंडिया और मैक्स हेल्थ शीर्ष घाटे वाले शेयरों में रहे।
वैश्विक कारक: पश्चिम एशिया और एच-1बी राहत
ईरान ने इज़रायल पर हमले फिलहाल रोक दिए हैं, हालाँकि तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि इज़रायल लेबनान में अपना अभियान जारी रखता है तो हमले फिर शुरू हो सकते हैं। इस नाज़ुक युद्धविराम के दीर्घकालिक टिकाऊपन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना भारतीय बाज़ार के लिए सकारात्मक संकेत है।
इसके अलावा, अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए एच-1बी वीज़ा शुल्क को रद्द कर दिया है। इसे भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए हल्की राहत के रूप में देखा जा रहा है, हालाँकि आईटी सेक्टर के शेयर इस सत्र में दबाव में रहे।
विशेषज्ञों की राय
बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बड़ी शॉर्ट पोज़िशन अभी भी बनी हुई है, जिससे साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन उतार-चढ़ाव और ट्रेडिंग वॉल्यूम अधिक रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेज़ी के समर्थक निवेशक (बुल्स) अभी इतने मज़बूत नहीं हैं कि बड़ी रैली करा सकें, जबकि मंदी के समर्थक निवेशक (बियर्स) ऊँचे स्तरों पर बिकवाली का दबाव बना सकते हैं।
गौरतलब है कि एफआईआई की लगातार बिकवाली में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। हालाँकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लार्ज कैप शेयरों का मूल्यांकन अब संतुलित स्तर पर पहुँच चुका है और बैंकिंग सेक्टर में एफआईआई की बिकवाली के चलते कई अच्छे शेयर आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं। दो से तीन साल के निवेश नज़रिए वाले निवेशकों के लिए बैंकिंग सेक्टर एक अनुकूल अवसर हो सकता है।
आगे का परिदृश्य
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में चौथी तिमाही के मज़बूत नतीजों और विकास संभावनाओं के कारण निवेशकों की रुचि बनी हुई है। पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और एफआईआई के प्रवाह की दिशा आने वाले सत्रों में बाज़ार की चाल तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।