सेंसेक्स 437 अंक टूटा, 73,829 पर कारोबार; वैश्विक तनाव और कमज़ोर मानसून की आशंका से बाज़ार दबाव में, IT शेयरों में 2% उछाल
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 2 जून को शुरुआती कारोबार में 437.97 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,829.37 पर ट्रेड करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी50 134.30 अंक या 0.57 प्रतिशत फिसलकर 23,259.70 पर आ गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में व्यवधान के संकेत और कमज़ोर मानसून की आशंकाओं ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।
बाज़ार का शुरुआती हाल
सेंसेक्स 322 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,945.20 पर खुला, जबकि निफ्टी50 153.45 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 23,229.15 पर खुला। व्यापक बाज़ार में भी दबाव रहा — निफ्टी मिडकैप 0.95 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टरवार प्रदर्शन
शुरुआती सत्र में अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी केमिकल्स में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, सीमेंट और मीडिया सेक्टर पर भी बिकवाली का दबाव रहा।
हालाँकि, निफ्टी आईटी इंडेक्स ने करीब 2 प्रतिशत की मज़बूती के साथ बाज़ार को राहत दी। इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और हिंडाल्को के शेयरों में सबसे अधिक तेज़ी रही। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, मैक्स हेल्थ, इटरनल, एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड और श्रीराम फाइनेंस सबसे अधिक दबाव में रहे। निफ्टी मेटल ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।
इंडिया VIX और कमोडिटी बाज़ार
बाज़ार में उतार-चढ़ाव मापने वाला इंडिया VIX 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 16 के स्तर पर आया, जो निवेशकों में सतर्कता का संकेत है। कमोडिटी मोर्चे पर, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ब्रेंट क्रूड 0.67 प्रतिशत गिरकर 94.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.46 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और कमज़ोर मानसून की आशंकाएं निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रही हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा अनुमान के अनुसार, इस वर्ष मानसून सामान्य का केवल 90 प्रतिशत रहने की संभावना है — जो पिछले 11 वर्षों का सबसे कमज़ोर स्तर हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण माँग और महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के समाधान और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाज़ार को राहत मिल सकती है, लेकिन अभी तक किसी ठोस प्रगति के अभाव में निवेशकों की चिंता बनी हुई है। मौजूदा अस्थिर माहौल में उन्होंने निवेशकों को मज़बूत बुनियादी कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश रणनीति बनाए रखने की सलाह दी।
यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दबाव झेल रहा है। आगे के सत्रों में निवेशकों की नज़र पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और मानसून के अपडेट पर रहेगी।