कमजोर वैश्विक संकेतों के प्रभाव से शेयर बाजार गिरावट में बंद, सेंसेक्स में 1 प्रतिशत की कमी
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स में 0.91 प्रतिशत की गिरावट आई।
- निफ्टी में 0.86 प्रतिशत की कमी हुई।
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से चिंता बढ़ी है।
- अगला कारोबारी दिन बुधवार को होगा।
- मार्केट में अस्थिरता बढ़ रही है।
मुंबई, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच, कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को गिरावट के साथ लाल निशान में समापन किया।
इस दौरान, प्रमुख घरेलू बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 702.68 अंक यानी 0.91 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,847.57 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी50 207.95 अंक यानी 0.86 प्रतिशत घटकर 23,842.65 के स्तर पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार में, सेंसेक्स 1,682 अंक या 2.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,868.32 के निचले स्तर पर पहुंच गया था, जबकि निफ्टी 495 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 23,555.60 के निचले स्तर पर पहुंचा।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.57 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार विश्लेषण करें तो निफ्टी ऑटो में 2.09 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.29 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.16 प्रतिशत की कमी आई।
इसके अतिरिक्त, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.73 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.55 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.63 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.35 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 0.29 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 0.22 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
निफ्टी50 में आयशर मोटर्स, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, रिलायंस, इंडिगो, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में 5-2 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जबकि एचडीएफसी लाइफ, अदाणी इंटरप्राइजेज, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, टीएमपीवी, कोल इंडिया और ओएनजीसी के शेयरों में तेजी आई।
घरेलू बाजार में यह गिरावट अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता के विफल होने और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण आई, जिससे मध्य पूर्व संघर्ष के लम्बे खिंचने की चिंता बढ़ गई है।
इस्लामाबाद में सप्ताह के अंत में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, जिससे दो सप्ताह के नाजुक संघर्ष विराम पर संदेह उत्पन्न हुआ है।
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार अब रिकवरी के चरण से बाहर निकलकर एक अधिक सतर्क और जोखिम-संवेदनशील स्थिति में प्रवेश कर रहा है। बढ़ती अस्थिरता और लगभग सभी सेक्टरों में दबाव यह दर्शाता है कि निवेशक अब मैक्रो जोखिमों को गंभीरता से ले रहे हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपए की कमजोरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कंपनियों की कमाई और मार्जिन को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तकनीकी दृष्टि से, निफ्टी ने 23,500-23,600 के सपोर्ट जोन के आस-पास ओपनिंग की और दिन में धीरे-धीरे रिकवरी दिखाई। इंडेक्स ने 23,900 के स्तर को छुआ, जो पहले सपोर्ट था लेकिन अब रेजिस्टेंस बन गया है। हालांकि, इस स्तर के ऊपर टिक नहीं पाया, जिससे ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव साफ दृष्टिगोचर हुआ। आगे के लिए 23,900 इमीडिएट रेजिस्टेंस रहेगा, इसके बाद 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण होगा। नीचे की ओर 23,500-23,600 का दायरा मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। इसके नीचे जाने पर निफ्टी 23,300 और 23,000 तक गिर सकता है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि मोमेंटम इंडिकेटर्स अभी भी हल्का सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं। आरएसआई करीब 52 के आस-पास है, जो न्यूट्रल से ऊपर है और संकेत देता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी हो रही है। हालांकि, मजबूत तेजी तब मानी जाएगी जब इंडेक्स 24,000 के ऊपर टिकेगा। तब तक, बाजार सीमित दायरे में नकारात्मक झुकाव के साथ कारोबार कर सकता है।
कल अंबेडकर जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद रहेगा, इसलिए अगला कारोबारी दिन बुधवार को होगा और वह वैश्विक संकेतों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे।