सेंसेक्स 561 अंक टूटा, 77,054 पर बंद; पश्चिम एशिया तनाव और ब्रेंट क्रूड 4% उछाल से बाजार दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स मंगलवार, 14 जुलाई को 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत फिसलकर 24,052.05 पर आ गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने घरेलू बाजार में लगातार तीन दिनों की बढ़त के सिलसिले को तोड़ दिया।
मुख्य घटनाक्रम
कारोबारी सत्र के दौरान 2,632 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,422 शेयरों में बढ़त रही और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं आया। व्यापक बाजारों में भी दबाव साफ दिखा — निफ्टी मिडकैप 100 में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1 प्रतिशत की गिरावट आई।
निफ्टी50 के 39 शेयर लाल निशान में बंद हुए। सर्वाधिक नुकसान झेलने वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, HDFC लाइफ इंश्योरेंस, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन शामिल रहे। वहीं भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, TCS और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज टॉप गेनर्स में रहे।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी रियल्टी सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला क्षेत्र रहा, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी PSU बैंक (-1.8 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-1.6 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (-1.1 प्रतिशत) और निफ्टी IT (-1 प्रतिशत) भी दबाव में रहे।
इसके अलावा निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.8 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6 प्रतिशत), निफ्टी FMCG (-0.6 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया और निफ्टी इंफ्रा (दोनों -0.3 प्रतिशत) में भी गिरावट दर्ज हुई। इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा ने 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया और निफ्टी मेटल 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
रुपया और कच्चा तेल
भारतीय रुपया मंगलवार को 57 पैसे की गिरावट के साथ 96.25 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 95.68 रुपये प्रति डॉलर पर था। वैश्विक कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 4 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल आई और यह 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति दोनों पर दबाव बढ़ा सकती हैं।
पश्चिम एशिया संकट का असर
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहरा गया है — अमेरिका ने कथित तौर पर लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार पर नई नाकाबंदी की घोषणा की है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम गलियारा है और इसके बंद होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। आलोचकों का कहना है कि यदि तनाव और लंबा खिंचा तो भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
आगे क्या
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी नीतिगत प्रतिक्रिया और वैश्विक बाजारों के रुख पर टिकी रहेगी।