8 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी 23,080 पर; पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की उछाल से बाज़ार धराशायी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी 23,080 पर; पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की उछाल से बाज़ार धराशायी

सारांश

पश्चिम एशिया में इज़राइल-ईरान तनाव और ब्रेंट क्रूड के 96.90 डॉलर तक पहुँचने से सोमवार को भारतीय बाज़ार धराशायी हो गए। सेंसेक्स 800 अंक और निफ्टी 286 अंक टूटे; इंडिया VIX 15 प्रतिशत उछला। रियल्टी, मेटल और IT सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहे।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 8 जून को 800 से अधिक अंक (1.11%) गिरकर 73,421.61 पर खुला।
निफ्टी 50 286 अंक (1.22%) लुढ़ककर 23,080.70 पर आया।
रियल्टी सेक्टर में 2 प्रतिशत , मेटल , ऑटो और IT में 1 प्रतिशत से अधिक गिरावट।
इंडिया VIX लगभग 15 प्रतिशत उछलकर 18 के करीब पहुँचा।
ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर 96.90 डॉलर , WTI 4.64% उछलकर 94.75 डॉलर प्रति बैरल।
निक्केई 225 ~4%, कॉस्पी 5% गिरा; एशियाई बाज़ारों में व्यापक बिकवाली।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सोमवार, 8 जून को 800 से अधिक अंक यानी 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,421.61 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 286 अंक यानी 1.22 प्रतिशत लुढ़ककर 23,080.70 पर आ गया। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट, कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल और एशियाई बाज़ारों से मिले कमज़ोर संकेतों ने एक साथ भारतीय बाज़ार पर दबाव बनाया।

किन शेयरों पर सबसे अधिक असर

सेक्टोरल स्तर पर रियल्टी शेयरों में सबसे तीखी मार पड़ी — इस सूचकांक में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। मेटल, ऑटो और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सूचकांक भी 1 प्रतिशत से अधिक फिसले।

निफ्टी 50 के प्रमुख कमज़ोर शेयरों में विप्रो, टीसीएस, हिंदाल्को इंडस्ट्रीज़, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे। व्यापक बाज़ार भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा — निफ्टी मिडकैप 100, मिडकैप 150 और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

अस्थिरता का संकेत: इंडिया VIX उछला

बाज़ार में घबराहट का पैमाना माने जाने वाला इंडिया VIX लगभग 15 प्रतिशत उछलकर 18 के स्तर के आसपास पहुँच गया। यह तेज़ उछाल निवेशकों की बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, बाज़ार की व्यापक तकनीकी संरचना अभी भी कमज़ोर बनी हुई है। निफ्टी महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है और 'लोअर हाई-लोअर लो' का पैटर्न बनाए हुए है, जो लगातार बिकवाली के दबाव का संकेत देता है। उनके अनुसार निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन 23,100–23,000 के दायरे में है, जबकि 23,500–23,700 के बीच मज़बूत प्रतिरोध मौजूद है।

पश्चिम एशिया संकट: तेल आपूर्ति पर मंडराता ख़तरा

निवेशकों की धारणा को सबसे अधिक कमज़ोर करने वाला कारक पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव रहा। लेबनान पर इज़राइल के नए हमलों और ईरान के कई शहरों में विस्फोटों की खबरों ने आशंका जगा दी है कि यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ा तो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल-आयातक देशों पर पड़ेगा।

हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि संघर्ष समाप्त करने के लिए समझौता अभी भी संभव है और उन्होंने इज़राइली नेतृत्व से तनाव न बढ़ाने का आग्रह किया था। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक प्रयास युद्धविराम की दिशा में सक्रिय हैं।

कच्चा तेल और एशियाई बाज़ार

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 4.64 प्रतिशत उछलकर 94.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एशियाई बाज़ारों में भी व्यापक बिकवाली रही — जापान का निक्केई 225 लगभग 4 प्रतिशत गिरा, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 5 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहा, और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग करीब 1 प्रतिशत नीचे था।

गौरतलब है कि यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। आने वाले सत्रों में बाज़ार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर कोई भी व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए असमान रूप से बड़ा झटका होगा, क्योंकि देश अपनी तेल ज़रूरत का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है। ट्रंप की 'समझौता संभव है' वाली बात बाज़ार को अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन जब तक ज़मीनी हकीकत नहीं बदलती, यह अस्थिरता बनी रहेगी।
RashtraPress
8 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8 जून को सेंसेक्स और निफ्टी में इतनी गिरावट क्यों आई?
पश्चिम एशिया में इज़राइल-ईरान संघर्ष के गहराने, ब्रेंट क्रूड के 4 प्रतिशत उछलकर 96.90 डॉलर प्रति बैरल पहुँचने और एशियाई बाज़ारों में व्यापक बिकवाली के कारण 8 जून को भारतीय बाज़ार तेज़ी से गिरे। निवेशकों की धारणा कमज़ोर हुई और सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूटकर 73,421 पर खुला।
निफ्टी के लिए अभी सपोर्ट और रेजिस्टेंस कहाँ है?
विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन 23,100–23,000 के दायरे में है, जबकि 23,500–23,700 के बीच मज़बूत प्रतिरोध मौजूद है। निफ्टी फिलहाल 'लोअर हाई-लोअर लो' पैटर्न में है जो लगातार बिकवाली के दबाव का संकेत देता है।
पश्चिम एशिया तनाव का भारतीय बाज़ार पर क्या असर पड़ता है?
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा रहता है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं। भारत अपनी तेल ज़रूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए इसका सीधा असर महँगाई, चालू खाते के घाटे और कॉर्पोरेट मार्जिन पर पड़ता है।
आज किन सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही?
रियल्टी सेक्टर में लगभग 2 प्रतिशत की सबसे तीखी गिरावट रही। मेटल, ऑटो और IT सूचकांक भी 1 प्रतिशत से अधिक फिसले। विप्रो, टीसीएस, हिंदाल्को, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस निफ्टी के प्रमुख कमज़ोर शेयरों में रहे।
इंडिया VIX का 18 तक पहुँचना क्या दर्शाता है?
इंडिया VIX बाज़ार की अपेक्षित अस्थिरता का पैमाना है — यह जितना ऊँचा हो, निवेशकों में उतनी अधिक घबराहट। 8 जून को VIX लगभग 15 प्रतिशत उछलकर 18 के करीब पहुँचा, जो संकेत देता है कि निकट भविष्य में बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले