सेंसेक्स 1,092 अंक टूटा, अगले हफ्ते 74,500 का सपोर्ट अहम; वैश्विक अस्थिरता से बाज़ार पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 31 मई को 1,092 अंक यानी 1.44% की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 359 अंक यानी 1.50% फिसलकर 23,547.75 पर आ गया। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और एमएससीआई (MSCI) सूचकांक के पुनर्संतुलन से उपजे दबाव के चलते अगले सप्ताह भी सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
शुक्रवार की गिरावट का कारण
विश्लेषकों का कहना है कि अधिकांश कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित दायरे में टिके रहे, लेकिन अंतिम 30 मिनटों में एमएससीआई पुनर्संतुलन के प्रभावी होने के साथ ही सभी क्षेत्रों में भारी बिकवाली का दबाव बढ़ गया। दिन के दौरान सेंसेक्स का निचला स्तर करीब 1,300 अंक की गिरावट तक पहुँचा, जबकि निफ्टी का इंट्राडे लो 23,485 रहा।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की संभावना को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में पहले से ही सतर्कता का माहौल है।
तकनीकी आउटलुक: प्रमुख स्तर
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर एक बाज़ार विशेषज्ञ ने कहा, 'सेंसेक्स के लिए तात्कालिक रुकावट का स्तर 75,800–76,000 के क्षेत्र में है, जबकि 76,500–76,700 का दायरा एक प्रमुख प्रतिरोध और आपूर्ति क्षेत्र बना हुआ है।'
एक अन्य विश्लेषक ने बताया, 'गिरावट की स्थिति में तात्कालिक सपोर्ट 74,500–74,200 के क्षेत्र में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र से ऊपर बने रहना अधिक कमज़ोरी को रोकने के लिए महत्वपूर्ण होगा, जबकि इसके नीचे निर्णायक रूप से टूटने से गिरावट का दबाव और बढ़ सकता है।'
निवेशक भावना और बाज़ार का रुझान
विशेषज्ञों के अनुसार, सेंसेक्स में नकारात्मक रुझान बना हुआ है क्योंकि उच्च स्तरों पर खरीदारी का उत्साह कमज़ोर है और निवेशक सतर्कता बरतते हुए किनारे पर बने हुए हैं। गौरतलब है कि यह गिरावट ऐसे सप्ताह के अंत में आई जब बाज़ार पहले से ही वैश्विक संकेतों को लेकर सावधान था।
अगले सप्ताह की संभावनाएँ
बाज़ार जानकारों का मानना है कि जब तक सेंसेक्स 76,000 के ऊपर टिककर बंद नहीं होता, तब तक तेज़ी का रुझान कमज़ोर बना रहेगा। वैश्विक संकेत — विशेषकर अमेरिकी व्यापक आर्थिक आँकड़े और भू-राजनीतिक घटनाक्रम — अगले सप्ताह बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।