सेंसेक्स 1,092 अंक टूटा, निफ्टी 23,547 पर बंद; FII बिकवाली और कमजोर मानसून अनुमान से बाजार दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स इस सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 1,092 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 1.50 प्रतिशत फिसलकर 23,547.75 पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की करीब ₹23,700 करोड़ की शुद्ध बिकवाली और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान से उपजी खाद्य महंगाई की आशंकाओं ने पूरे सप्ताह बाजार की धारणा को कमजोर रखा। सप्ताह-भर में सेंसेक्स 0.85 प्रतिशत और निफ्टी 0.72 प्रतिशत नीचे रहे।
साप्ताहिक गिरावट के प्रमुख कारण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस सप्ताह की गिरावट के पीछे एक साथ कई कारक सक्रिय रहे। IMD के उस पूर्वानुमान ने सर्वाधिक चिंता पैदा की जिसमें इस बार मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है — इससे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ने का अंदेशा है। इसके अलावा, MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग से जुड़े समायोजन के कारण सप्ताह के अंतिम सत्र में संस्थागत निवेशकों की ओर से बड़े पैमाने पर बिकवाली देखी गई, जिसने लार्ज-कैप शेयरों पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार अमेरिका-ईरान कूटनीतिक वार्ता की संभावनाओं से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते कुछ राहत महसूस कर रहे थे। तेल की सस्ती कीमतों से ऑटो और मेटल सेक्टर को सहारा मिला, लेकिन घरेलू मोर्चे पर मानसून की अनिश्चितता ने इस सकारात्मकता को सीमित कर दिया।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
सरकारी बैंकों (PSU Banks) को बॉन्ड यील्ड में गिरावट से हुए मार्क-टू-मार्केट ट्रेजरी लाभ का फायदा मिला। वहीं FMCG, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में गिरावट दर्ज हुई, क्योंकि जोखिम-क्षमता बढ़ने के माहौल में रक्षात्मक (डिफेंसिव) शेयरों का आकर्षण घटा। विश्लेषकों ने बताया कि लार्ज-कैप पर दबाव के बावजूद व्यापक बाजार ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मजबूती
बेंचमार्क सूचकांकों के विपरीत, व्यापक बाजार ने इस सप्ताह बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स सप्ताह-भर में 0.54 प्रतिशत चढ़ा और कुछ समय के लिए अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (ऑल-टाइम हाई) को भी छू गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। गौरतलब है कि यह विभाजन दर्शाता है कि FII की बिकवाली मुख्यतः लार्ज-कैप केंद्रित रही, जबकि घरेलू खुदरा और संस्थागत प्रवाह ने मिड-स्मॉल सेगमेंट को थामे रखा।
रुपया और कच्चा तेल
इस सप्ताह भारतीय रुपया भी कुछ मजबूत हुआ। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की उस टिप्पणी ने रुपये को सहारा दिया जिसमें संकेत दिया गया कि रुपया अभी भी अपने वास्तविक मूल्य से कम आंका गया है। अमेरिका-ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए राहत की बात है।
तकनीकी स्तर और आगे की राह
बाजार सहभागियों के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए 24,000–24,100 का स्तर निकट-अवधि का मजबूत प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र बना रहेगा, जबकि 23,300–23,000 का दायरा महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) जोन के रूप में काम करेगा। बैंक निफ्टी के लिए 54,600–54,800 निकटतम रेजिस्टेंस और 54,200–54,000 तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लार्ज-कैप में मजबूत निवेश रुझान बनने के लिए नीतिगत स्पष्टता, सामान्य मानसून की पुष्टि और भू-राजनीतिक तनाव में कमी जरूरी होगी। निवेशकों की नजर अब RBI की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा, GDP आंकड़ों, परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आंकड़ों पर टिकी है, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।