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मध्य पूर्व के तनाव और एफआईआई की बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी में 3 प्रतिशत की गिरावट

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मध्य पूर्व के तनाव और एफआईआई की बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी में 3 प्रतिशत की गिरावट

सारांश

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जब सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई। जानें इसके पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।

मुख्य बातें

सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
घरेलू निवेशकों का समर्थन बाजार को सहारा दे रहा है।

मुंबई, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली के चलते इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा गया। सप्ताह के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 3 प्रतिशत तक गिरावट का सामना कर गए, जिससे निवेशकों की चिंताएँ बढ़ गईं।

सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगभग 2.9 प्रतिशत की कमी आई। सेंसेक्स 81,287.19 से गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,178.65 से घटकर 24,450.45 पर समाप्त हुआ।

इस अवधि में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार बिकवाली की। उन्होंने इस सप्ताह भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी की। वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की नीति के कारण विदेशी निवेशक सतर्क दिखाई दिए।

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) के मजबूत निवेश ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद की।

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।

मुख्य सूचकांकों के अलावा व्यापक बाजार भी दबाव में रहे। बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में भी सप्ताह के दौरान लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टर के अनुसार देखें तो, अधिकांश इंडेक्स नकारात्मक दायरे में बंद हुए। सबसे अधिक गिरावट बीएसई रियल्टी, बीएसई ऑयल एंड गैस, बीएसई बैंकएक्स, बीएसई ऑटो और बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में देखी गई। इनसे क्रमशः 4.9 प्रतिशत, 4.8 प्रतिशत, 4.6 प्रतिशत, 3.9 प्रतिशत और 3.1 प्रतिशत की गिरावट हुई।

हालांकि, बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स में हल्की बढ़त देखी गई, जो 0.2 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा डिफेंस सेक्टर के शेयरों में भी लगभग 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों की रुचि रक्षा कंपनियों में बढ़ी है।

वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड, विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच खींचतान देखी गई।

उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली उनकी 'जोखिम से बचाव की रणनीति' को दर्शाती है।

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों का निवेश और एसआईपी के माध्यम से निरंतर आ रहे फंड ने बाजार को सहारा दिया, जिससे गिरावट अधिक गहरी नहीं हुई।

विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी50 इंडेक्स 24,450 के आसपास अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज के करीब पहुँच गया है। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार की दीर्घकालिक स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है।

इस बीच, बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी है। ट्रेडिंग सत्र के दौरान इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स में 11 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जो दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की स्थिति में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के प्रमुख कारण वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रहे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों के मजबूत समर्थन से बाजार की दीर्घकालिक स्थिति अभी भी अच्छी बनी हुई है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई।
विदेशी निवेशकों ने इस सप्ताह कितनी बिकवाली की?
विदेशी निवेशकों ने इस सप्ताह भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से अधिक की बिकवाली की।
कच्चे तेल की कीमतों में क्या बदलाव आया?
मध्य पूर्व के तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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