एयर इंडिया ने हब-एंड-स्पोक मॉडल को 'क्रांतिकारी कदम' बताया, वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू
सारांश
Key Takeaways
- एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने सरकार के हब-एंड-स्पोक मॉडल को 'क्रांतिकारी कदम' बताया।
- वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू की गईं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए सुलभता बढ़ाने के लिए।
- वर्तमान में 35%25 भारतीय यात्री दुबई, लंदन, सिंगापुर जैसे विदेशी हबों के माध्यम से पारगमन करते हैं।
- सरकार का लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र बनाना।
- नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने उड़ान योजना के तहत टियर-2 और टियर-3 हवाई अड्डों की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया।
नई दिल्ली, 29 अप्रैल 2026। एयर इंडिया ने बुधवार को सरकार के 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल को अपनाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारतीय एविएशन सेक्टर में संरचनात्मक परिवर्तन आएगा। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने इस पहल को एविएशन सेक्टर के लिए एक 'क्रांतिकारी कदम' बताया और कहा कि इससे घरेलू कनेक्टिविटी मजबूत होगी और देश भर में एयरपोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग संभव होगा।
वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शुभारंभ
इसी घोषणा के साथ, एयर इंडिया ने 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के तहत वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लॉन्च किया। यह कदम पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को अधिक सुलभ बनाने का उद्देश्य रखता है। विल्सन ने कहा, "यह भारतीय एविएशन के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने और पूरे एविएशन इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी प्रयासों के लिए हम उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं।"
टियर-2 और टियर-3 शहरों को लाभ
एयर इंडिया के गवर्नेंस, रिस्क, कंप्लायंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स के ग्रुप हेड पी. बालाजी ने कहा कि इस कदम से भारत के वैश्विक एविएशन को महानगरों से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब अधिक सुलभ हो जाएगी, जो पहले केवल बड़े मेट्रोपॉलिटन हवाई अड्डों तक सीमित था।
सरकार की रणनीतिक दृष्टि
इसी महीने की शुरुआत में, नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने दिल्ली हवाई अड्डे पर हब-एंड-स्पोक संचालन को लागू करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। मंत्री ने कहा कि यह मॉडल उड़ान योजना के तहत विकसित टियर-II और टियर-III हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी को सक्षम करेगा।
विदेशी हबों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत से लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब के माध्यम से पारगमन करते हैं। इस प्रवृत्ति को बदलने के लिए, सरकार का लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय केंद्रों का विकास करना है। यह रणनीति न केवल विदेशी मुद्रा बचाएगी, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाएगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि हब-एंड-स्पोक मॉडल भारतीय एविएशन में एक नई संरचना लाने का प्रयास है, जहाँ प्रमुख हब हवाई अड्डे क्षेत्रीय हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। इससे छोटे शहरों के यात्रियों को प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लाभ मिलेगा और भारतीय एयरलाइन्स को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।