सेंसेक्स 236 अंक उछला, 77,892 पर खुला; बैंकिंग-रियल्टी शेयरों में जोरदार खरीदारी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स बुधवार, 26 अगस्त को शुरुआती कारोबार में 236.01 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,892.10 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 7.40 अंक की मामूली तेजी के साथ 24,341.95 पर था। वैश्विक बाज़ारों में मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी — इन तीन कारकों ने मिलकर घरेलू बाज़ार को हरे निशान में धकेला।
बाज़ार में किसने की अगुआई
शुरुआती सत्र में निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे अधिक बढ़त में रहे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी मीडिया, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
दूसरी तरफ, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी आईटी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी ऑटो लाल निशान में थे, जो दर्शाता है कि तेजी व्यापक नहीं, बल्कि चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रही।
प्रमुख शेयरों का हाल
सेंसेक्स के गेनर्स में इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, अदाणी पोर्ट्स, इंडिगो, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, टीसीएस, एचयूएल, एचसीएल टेक, कोटक महिंद्रा बैंक और मारुति सुजुकी शामिल रहे।
वहीं, इन्फोसिस, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, एलएंडटी, बीईएल, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक और टाइटन दबाव में रहे।
बाज़ार को मिले दो बड़े सकारात्मक संकेत
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, बुधवार के सत्र में दो प्रमुख कारकों ने धारणा को बेहतर किया। पहला — अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शिपिंग बहाल होने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 86.3 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊँची कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाज़ार की रैली में सबसे बड़ी रुकावट रही थीं, इसलिए यह गिरावट राहत की खबर है।
दूसरा — अमेरिका में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड घटकर 4.64 प्रतिशत पर आई, जो वैश्विक इक्विटी बाज़ारों के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है क्योंकि इससे उभरते बाज़ारों में पूंजी प्रवाह बढ़ने की संभावना रहती है।
वैश्विक बाज़ारों का मिज़ाज
एशियाई बाज़ारों में व्यापक मजबूती देखी गई — टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल, बैंकॉक और जकार्ता सभी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। पिछले सत्र में अमेरिकी बाज़ार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.30 प्रतिशत और नैस्डैक 0.66 प्रतिशत की मजबूती के साथ।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संकेतों को एक साथ तौल रहे हैं। भारतीय बाज़ार की दिशा आगे काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और फेडरल रिज़र्व के अगले कदम पर निर्भर करेगी।