30 जुलाई 2026
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सेंसेक्स 151 अंक टूटकर 77,502 पर खुला, अमेरिकी फेड के बंटे फैसले से बाजार में दबाव

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सेंसेक्स 151 अंक टूटकर 77,502 पर खुला, अमेरिकी फेड के बंटे फैसले से बाजार में दबाव

सारांश

फेडरल रिज़र्व के 9-3 के बंटे मतदान ने वैश्विक बाज़ारों में हलचल मचा दी। सेंसेक्स 151 अंक टूटकर खुला, निफ्टी रियल्टी सबसे ज़्यादा दबाव में। ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर के करीब पहुँचना और अमेरिका-ईरान तनाव — दोनों मिलकर भारतीय बाज़ार के संभावित ब्रेकआउट को रोक रहे हैं।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 30 जुलाई को 151 अंक (0.20%) गिरकर 77,502 पर और निफ्टी 37 अंक (0.15%) गिरकर 24,213 पर खुला।
निफ्टी रियल्टी सबसे अधिक 0.50%+ की गिरावट के साथ, प्राइवेट बैंक , मीडिया और एनर्जी भी लाल निशान में।
फेडरल रिज़र्व ने 9-3 के बंटे मतदान से ब्याज दरें यथावत रखीं; तीन सदस्यों ने दर वृद्धि के पक्ष में वोट दिया।
एसएंडपी 500 बुधवार को 2% , डाओ जोन्स 2.19% और नैस्डैक 1.74% गिरकर बंद हुए।
ब्रेंट क्रूड अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब, जो भारतीय बाज़ार के लिए अतिरिक्त दबाव।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 30 जुलाई को सुबह 9:15 बजे IST पर 151 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,502 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 37 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,213 पर आ गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व के 9-3 के बंटे हुए मतदान से लिए गए ब्याज दर संबंधी फैसले ने वैश्विक इक्विटी बाज़ारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक दबाव निफ्टी रियल्टी पर देखा गया, जो 0.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। इसके अलावा निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी सर्विसेज़ भी लाल निशान में रहे।

दूसरी ओर, निफ्टी आईटी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी ऑयल एंड गैस हरे निशान में कारोबार करते नज़र आए।

टॉप गेनर्स और लूज़र्स

सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, सन फार्मा, एमएंडएम, पावर ग्रिड, एचयूएल, आईटीसी, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एचडीएफसी बैंक शीर्ष लाभ में रहे। वहीं एशियन पेंट्स, इटरनल, इंडिगो, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एलएंडटी और टाइटन शीर्ष गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

फेड के बंटे फैसले का असर

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, फेडरल रिज़र्व का ब्याज दरें न बढ़ाने का निर्णय भले ही अपेक्षित था, लेकिन 9-3 के विभाजित मतदान ने इक्विटी बाज़ारों के लिए नकारात्मक संकेत दिया। तीन सदस्यों ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरें बढ़ाने के पक्ष में मत दिया, जिससे निकट भविष्य में दर वृद्धि की आशंका बलवती हो गई है। इस अनिश्चितता के चलते बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई और एसएंडपी 500 बुधवार को 2 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार 'ब्रेकआउट' ट्रेंड की दहलीज़ पर खड़ा था। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत का अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचना इस संभावित ब्रेकआउट में बड़ी रुकावट बन रहा है।

वैश्विक बाज़ारों का हाल

एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुझान रहा। टोक्यो और जकार्ता हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। अमेरिकी बाज़ार में बुधवार को भारी बिकवाली रही — डाओ जोन्स 2.19 प्रतिशत और नैस्डैक 1.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

आगे क्या

बाज़ार विश्लेषकों की नज़र अब फेड की अगली बैठक और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है। यदि ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर की सीमा पार करता है, तो घरेलू मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है, जो भारतीय बाज़ार की रिकवरी को और जटिल बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और बाज़ार इसी अनिश्चितता की कीमत चुका रहे हैं। भारतीय बाज़ार के लिए असली चुनौती दोहरी है: एक तरफ संभावित अमेरिकी दर वृद्धि से विदेशी पूँजी का पलायन, दूसरी तरफ ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर की ओर बढ़ना जो आयात बिल और चालू खाता घाटे को चौड़ा करेगा। गौरतलब है कि निफ्टी आईटी और फार्मा का हरे निशान में रहना दर्शाता है कि निवेशक रक्षात्मक और डॉलर-आय वाले क्षेत्रों की ओर झुक रहे हैं — यह प्रवृत्ति तब तक जारी रह सकती है जब तक फेड की दिशा स्पष्ट नहीं होती।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

30 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरकर खुले?
30 जुलाई को सेंसेक्स 151 अंक (0.20%) गिरकर 77,502 पर और निफ्टी 37 अंक (0.15%) गिरकर 24,213 पर खुला। यह गिरावट मुख्यतः अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के बंटे हुए फैसले और वैश्विक बिकवाली के कारण रही।
अमेरिकी फेड के फैसले से भारतीय बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरें यथावत रखीं, लेकिन 9-3 के बंटे मतदान ने संकेत दिया कि जल्द दर वृद्धि हो सकती है। इससे बॉन्ड यील्ड बढ़ी, एसएंडपी 500 में 2% की गिरावट आई और भारतीय इक्विटी बाज़ार पर भी दबाव पड़ा।
आज किन सेक्टर्स में सबसे अधिक गिरावट रही?
निफ्टी रियल्टी 0.50% से अधिक गिरा और सबसे अधिक दबाव में रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक, मीडिया, फाइनेंशियल सर्विसेज़, पीएसयू बैंक, एनर्जी, इन्फ्रा और सर्विसेज़ भी लाल निशान में रहे।
ब्रेंट क्रूड का बाज़ार पर क्या असर है?
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारतीय बाज़ार के संभावित ब्रेकआउट में सबसे बड़ी रुकावट है, क्योंकि इससे आयात लागत और मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
वैश्विक बाज़ारों में बुधवार को क्या हुआ?
अमेरिकी बाज़ार में डाओ जोन्स 2.19% और नैस्डैक 1.74% की गिरावट के साथ बंद हुए। एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुझान रहा — टोक्यो और जकार्ता हरे में, जबकि शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में रहे।
राष्ट्र प्रेस
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