सेंसेक्स 151 अंक टूटकर 77,502 पर खुला, अमेरिकी फेड के बंटे फैसले से बाजार में दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 30 जुलाई को सुबह 9:15 बजे IST पर 151 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,502 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 37 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,213 पर आ गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व के 9-3 के बंटे हुए मतदान से लिए गए ब्याज दर संबंधी फैसले ने वैश्विक इक्विटी बाज़ारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम
शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक दबाव निफ्टी रियल्टी पर देखा गया, जो 0.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। इसके अलावा निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी सर्विसेज़ भी लाल निशान में रहे।
दूसरी ओर, निफ्टी आईटी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी ऑयल एंड गैस हरे निशान में कारोबार करते नज़र आए।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, सन फार्मा, एमएंडएम, पावर ग्रिड, एचयूएल, आईटीसी, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एचडीएफसी बैंक शीर्ष लाभ में रहे। वहीं एशियन पेंट्स, इटरनल, इंडिगो, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एलएंडटी और टाइटन शीर्ष गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।
फेड के बंटे फैसले का असर
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, फेडरल रिज़र्व का ब्याज दरें न बढ़ाने का निर्णय भले ही अपेक्षित था, लेकिन 9-3 के विभाजित मतदान ने इक्विटी बाज़ारों के लिए नकारात्मक संकेत दिया। तीन सदस्यों ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरें बढ़ाने के पक्ष में मत दिया, जिससे निकट भविष्य में दर वृद्धि की आशंका बलवती हो गई है। इस अनिश्चितता के चलते बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई और एसएंडपी 500 बुधवार को 2 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार 'ब्रेकआउट' ट्रेंड की दहलीज़ पर खड़ा था। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत का अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचना इस संभावित ब्रेकआउट में बड़ी रुकावट बन रहा है।
वैश्विक बाज़ारों का हाल
एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुझान रहा। टोक्यो और जकार्ता हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। अमेरिकी बाज़ार में बुधवार को भारी बिकवाली रही — डाओ जोन्स 2.19 प्रतिशत और नैस्डैक 1.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
आगे क्या
बाज़ार विश्लेषकों की नज़र अब फेड की अगली बैठक और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है। यदि ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर की सीमा पार करता है, तो घरेलू मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है, जो भारतीय बाज़ार की रिकवरी को और जटिल बना सकता है।