सेंसेक्स 208 अंक टूटा, निफ्टी 23,941 पर; मध्य पूर्व तनाव और अमेरिकी टैरिफ से फार्मा शेयरों पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 23 जुलाई को शुरुआती कारोबार में 208 अंक (0.27 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 76,553 पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 51 अंक (0.22 प्रतिशत) लुढ़ककर 23,941 पर कारोबार कर रहा था। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी टैरिफ के ऐलान ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया है।
फार्मा और प्रमुख सेक्टर पर असर
शुरुआती कारोबार में निफ्टी फार्मा सूचकांक 0.81 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ सबसे अधिक दबाव में था। जानकारों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ की घोषणा को फार्मा शेयरों में बिकवाली का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी कमोडिटीज लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी डिफेंस और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स हरे निशान में बने रहे।
सेंसेक्स के शेयरों का हाल
ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड हरे निशान में थे। दूसरी ओर, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टाटा स्टील, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), टीसीएस, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, इटरनल, भारती एयरटेल, टाइटन, एचसीएल टेक और कोटक महिंद्रा बैंक लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 152 अंक (0.25 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 62,142 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 33 अंक (0.17 प्रतिशत) गिरकर 19,097 पर कारोबार कर रहा था।
वैश्विक बाज़ारों का मिलाजुला रुख
एशियाई बाज़ारों में मिलाजुला कारोबार रहा। टोक्यो, हांगकांग, सोल और जकार्ता के बाज़ार हरे निशान में थे, जबकि शंघाई लाल निशान में था। अमेरिकी बाज़ारों में बुधवार के सत्र में गिरावट रही — डाओ जोन्स लगभग सपाट (0.01 प्रतिशत) बंद हुआ और नैस्डैक तकनीकी शेयरों में दबाव के कारण 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
मध्य पूर्व संकट और कच्चे तेल का दबाव
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के बीच हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमले ने पश्चिम एशिया के संकट को और गहरा कर दिया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऊँची कच्चे तेल की कीमतों के प्रति भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए व्यापक आर्थिक स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बन रही है, और निवेशकों की धारणा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।