सेंसेक्स 45 अंक फिसला, निफ्टी 24,061 पर सपाट; फार्मा-हेल्थकेयर में खरीदारी, IT-डिफेंस दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सोमवार, 29 जून को शुरुआती कारोबार में 45 अंक की मामूली गिरावट के साथ 77,055 पर था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 5 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,061 पर टिका रहा। मिलेजुले वैश्विक संकेतों और अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि में भारतीय बाज़ार की शुरुआत सपाट रही।
कौन से सेक्टर आगे, कौन से पीछे
शुरुआती कारोबार में निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांक शीर्ष पर रहे। निफ्टी फिन सर्विस, निफ्टी सर्विसेज़, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
दूसरी ओर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी आईटी, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी पीएसई, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी ऑटो लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक: गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स की प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में इटरनल, सन फार्मा, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, एचयूएल, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट शामिल रहे।
गिरावट वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, इन्फोसिस, टीसीएस, एमएंडएम, बीईएल, भारती एयरटेल और एलएंडटी प्रमुख रहे।
एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों का हाल
एशियाई बाज़ारों में मिलाजुला रुख देखा गया। टोक्यो, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे, जबकि शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक में तेज़ी रही। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाज़ार नकारात्मक रुख के साथ बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.09% की कमज़ोरी के साथ और नैस्डैक 0.24% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल पर असर
बाज़ार की सतर्कता की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़की सैन्य तनातनी है। हालाँकि रिपोर्टों के अनुसार दोनों देश एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं और मंगलवार को कतर में बैठक संभव है।
मध्य पूर्व के इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। रिपोर्ट लिखे जाने तक WTI क्रूड 1.23% की तेज़ी के साथ $70.07 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.98% की मज़बूती के साथ $73.30 प्रति बैरल पर था।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कच्चे तेल की अधिकांश ज़रूरतें आयात से पूरी करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति दोनों पर दबाव बना सकती हैं। आने वाले सत्रों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कतर वार्ता के नतीजे बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।