MCX पर सोना ₹1,53,800 और चांदी ₹2,35,300 पर फिसली, अमेरिकी PPI डेटा पर टिकी निवेशकों की नजर
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गुरुवार, 13 अगस्त को सोना और चांदी दोनों की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, लेकिन कारोबार के दौरान मुनाफावसूली हावी हो गई और दोनों कीमती धातुओं के भाव लुढ़क गए। वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी ब्याज दर नीति को लेकर असमंजस के बीच घरेलू वायदा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।
MCX पर सोने का हाल
अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स ₹189 की बढ़त के साथ ₹1,55,071 प्रति 10 ग्राम पर खुला। हालांकि यह तेजी टिकाऊ नहीं रही और बाद में सोना ₹1,082 यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,53,800 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सत्र के दौरान सोने ने ₹1,55,145 का उच्चतम और ₹1,53,600 का निचला स्तर छुआ। उल्लेखनीय है कि मौजूदा कीमतें इस वर्ष के रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम से काफी नीचे बनी हुई हैं।
चांदी में भी बिकवाली का दबाव
सितंबर डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स ₹165 की बढ़त के साथ ₹2,38,000 प्रति किलोग्राम पर खुला, लेकिन जल्द ही बिकवाली हावी हो गई। कारोबार के दौरान चांदी ₹2,535 यानी 1.07 प्रतिशत टूटकर ₹2,35,300 प्रति किलोग्राम पर आ गई। दिन में इसने ₹2,38,000 का उच्चतम और ₹2,35,236 का निचला स्तर छुआ। चांदी का वार्षिक रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति
वैश्विक बाजार में भी सीमित गिरावट दर्ज की गई। COMEX पर सोना 4,468.80 डॉलर प्रति औंस पर खुला और बाद में 2.40 डॉलर की कमजोरी के साथ 4,465.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। चांदी 65.45 डॉलर प्रति औंस पर खुली और 0.11 डॉलर की मामूली गिरावट के साथ 65.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गई। इसके बावजूद दोनों धातुएं हाल के ऊँचे स्तरों के करीब बनी हुई हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,450 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिका है।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर
बुधवार को जारी अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) रिपोर्ट में जुलाई की महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही, जो जून के 3.5 प्रतिशत से थोड़ी कम है और बाजार के अनुमान के अनुरूप है। लगातार दूसरे महीने महंगाई में नरमी से निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रुख से बच सकता है। अब निवेशकों की नजर गुरुवार को जारी होने वाले प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़ों पर है, जो फेड की अगली नीतिगत दिशा का संकेत दे सकते हैं।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, सितंबर की फेड बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना घटकर लगभग 40 प्रतिशत रह गई है, जो एक सप्ताह पहले करीब 54 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना कम होने से सोने को समर्थन मिलता है, क्योंकि कम ब्याज दरें उन निवेश साधनों को आकर्षक बनाती हैं जो नियमित ब्याज नहीं देते।
भू-राजनीतिक तनाव और आगे की राह
सोने की कीमतों को मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से भी सहारा मिल रहा है। समुद्री जहाजों पर हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है, जबकि ईरान से जुड़े विवादों का समाधान अभी भी अस्पष्ट है। निवेशकों की सुरक्षित निवेश की माँग और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी कीमती धातुओं को नीचे जाने से रोक रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहेंगी, सोने को मजबूत समर्थन मिलता रह सकता है।