सोने-चांदी में ऐतिहासिक गिरावट: MCX पर सोना ₹1,40,928 और चांदी ₹2,17,005 पर, डॉलर की मजबूती और फेड की सख्ती बनी वजह
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 जून 2026 (बुधवार) को सोने और चांदी की कीमतें कई महीनों के निचले स्तर पर आ गईं — अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 3.8% यानी ₹5,601 गिरकर ₹1,40,928 प्रति 10 ग्राम पर पहुँचा, जबकि जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 3.9% यानी ₹8,829 टूटकर ₹2,17,005 प्रति किलोग्राम पर आ गई। अमेरिकी डॉलर की असाधारण मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श के सख्त मौद्रिक रुख ने निवेशकों को इन कीमती धातुओं से दूर कर दिया है।
MCX पर दिन का कारोबार
सोने का अगस्त 2026 वायदा बुधवार को ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम पर खुला और दिन के कारोबार में ₹1,40,928 के निचले स्तर को छुआ, जो पिछले बंद ₹1,46,529 से ₹5,601 नीचे रहा। चांदी का जुलाई वायदा ₹2,22,579 प्रति किलोग्राम पर खुलकर ₹2,17,005 तक लुढ़का — पिछले बंद ₹2,25,834 से ₹8,829 की चोट खाई। यह गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में आई करीब 2% की नरमी के ठीक बाद आई है, जिससे लगातार दो सत्रों में कीमती धातुओं पर भारी दबाव बना रहा।
वैश्विक बाज़ार में भी भारी दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार कॉमेक्स पर सोना $169 प्रति ट्रॉय औंस टूटकर $3,980 प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया — यह मध्य नवंबर 2025 के बाद पहली बार $4,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे की गिरावट है। कॉमेक्स पर चांदी भी करीब $4 प्रति औंस टूटकर $58 प्रति औंस पर पहुँची, जो दिसंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। जून 2026 में अब तक सोने की कीमतों में लगभग 13% की गिरावट दर्ज हो चुकी है — बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह रुझान महीने के अंत तक जारी रहा, तो यह पिछले एक दशक से अधिक समय में सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट साबित हो सकती है।
गिरावट के पीछे की वजहें
बाज़ार विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है, जो सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाला सबसे बड़ा कारक बन गया है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं में सोना महँगा हो जाता है, जिससे वैश्विक माँग कमज़ोर पड़ती है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श की पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने निवेशकों को चौंका दिया — उच्च ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों को कम आकर्षक बना देती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते की दिशा में प्रयासों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, जिसने भू-राजनीतिक जोखिम के कारण सोने में आई 'सेफ-हेवन' माँग को और कमज़ोर किया।
ऐतिहासिक संदर्भ: रिकॉर्ड तेजी के बाद तीखी पलटी
गौरतलब है कि 2026 की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड ऊँचाइयाँ छुई थीं और जनवरी में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचे थे। पिछले तीन वर्षों में सोने ने लगातार दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की थी — केंद्रीय बैंकों, फंड मैनेजरों और खुदरा निवेशकों की मजबूत खरीदारी इसकी वजह थी। फरवरी 2026 के अंत में वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति बनने के बाद बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ी और निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। तब से अब तक सोने में लगभग 24% और चांदी में करीब 38% की गिरावट आ चुकी है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों की नज़र अब आने वाले अमेरिकी आर्थिक आँकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर है, ताकि ब्याज दरों की भविष्य की दिशा स्पष्ट हो सके। जब तक डॉलर इंडेक्स में मजबूती बनी रहती है और फेड के सख्त रुख के संकेत मिलते रहते हैं, कीमती धातुओं में राहत की उम्मीद सीमित नज़र आती है।