6 जुलाई 2026
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सोना ₹1,46,327 और चांदी ₹2,35,344 पर फिसली; मजबूत डॉलर और सस्ते कच्चे तेल से सर्राफा बाजार पर दबाव

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सोना ₹1,46,327 और चांदी ₹2,35,344 पर फिसली; मजबूत डॉलर और सस्ते कच्चे तेल से सर्राफा बाजार पर दबाव

सारांश

मजबूत डॉलर और सस्ते कच्चे तेल की दोहरी मार से 6 जुलाई को MCX पर सोना ₹1,46,327 और चांदी ₹2,35,344 पर आ गई। DSP नेत्रा रिपोर्ट याद दिलाती है कि जनवरी 2026 के रिकॉर्ड से 30% और 54% की गिरावट के बावजूद, ऐतिहासिक पैमाने पर यह अभी भी सीमित सुधार है।

मुख्य बातें

MCX पर 6 जुलाई 2026 को अगस्त डिलीवरी सोना ₹1,051 (0.71%) गिरकर ₹1,46,327 प्रति 10 ग्राम पर आया।
सितंबर डिलीवरी चांदी ₹2,066 (0.87%) टूटकर ₹2,35,344 प्रति किलोग्राम पर; इंट्राडे में 1% से अधिक की गिरावट।
IBJA के अनुसार 999 प्यूरिटी सोना ₹1,45,583 और चांदी ₹2,33,158 पर बंद।
वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड लगभग 4,136 डॉलर और स्पॉट सिल्वर 61.7 डॉलर प्रति औंस पर।
डॉलर इंडेक्स (DXY) 100.07 के आसपास; WTI क्रूड 68.3 डॉलर और ब्रेंट 71.67 डॉलर प्रति बैरल ।
DSP नेत्रा रिपोर्ट के अनुसार सोना जनवरी 2026 के 5,602 डॉलर शिखर से ~30% और चांदी 121.6 डॉलर से ~54% नीचे।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार, 6 जुलाई 2026 को सर्राफा बाजार दबाव में खुला — अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1,051 यानी 0.71 प्रतिशत टूटकर ₹1,46,327 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि सितंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹2,066 यानी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,35,344 प्रति किलोग्राम पर पहुँची। मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने निवेशकों को मुनाफावसूली के लिए प्रेरित किया, जिसका सीधा असर दोनों कीमती धातुओं पर दिखा।

MCX पर इंट्राडे कारोबार का हाल

दिन के कारोबार में सोना अपने पिछले बंद भाव ₹1,47,378 से 0.77 प्रतिशत टूटकर ₹1,46,231 प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुँचा। चांदी में बिकवाली और तीखी रही — इसका भाव पिछले बंद ₹2,37,410 से 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर ₹2,35,010 प्रति किलोग्राम के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गया।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 999 प्यूरिटी वाला सोना सोमवार की शाम ₹1,45,583 प्रति 10 ग्राम पर रहा, जो शुक्रवार के बंद भाव ₹1,46,107 से ₹524 कम है। वहीं, 999 प्यूरिटी वाली चांदी ₹2,33,158 प्रति किलोग्राम पर आई, जो पिछले बंद ₹2,33,354 से ₹196 की मामूली गिरावट दर्शाती है।

वैश्विक बाजार में भी दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड शुरुआत में करीब 0.6 प्रतिशत बढ़कर 4,195 डॉलर प्रति औंस तक पहुँचा था, लेकिन बाद में फिसलकर लगभग 4,136 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। स्पॉट सिल्वर भी 61.7 डॉलर प्रति औंस पर आ गई और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स (DXY) फिर से मजबूत होकर 101 के स्तर पर पहुँचा और फिलहाल 100.07 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। आमतौर पर डॉलर के मजबूत होने पर सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों की माँग कमजोर पड़ जाती है।

कच्चे तेल की नरमी का असर

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। WTI क्रूड लगभग 68.3 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड करीब 71.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे सोने की सुरक्षित निवेश वाली माँग भी कुछ कमजोर हुई है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी रोजगार के कमजोर आँकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण सोने और चांदी में अच्छी तेजी देखी गई थी। कमजोर रोजगार आँकड़ों के बाद यह उम्मीद बढ़ी थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 में ब्याज दरों में अपेक्षा से कम बढ़ोतरी करेगा।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: DSP नेत्रा रिपोर्ट

DSP नेत्रा (जुलाई 2026 संस्करण) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में सोना 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा था, जिसके बाद गिरकर 3,942 डॉलर प्रति औंस तक आ गया — यानी लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट। हालाँकि, यह 1980 के बाद आई 71 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट से काफी कम है; उस समय सोने को स्थायी निचला स्तर बनाने में करीब 19 वर्ष और पुराने रिकॉर्ड तक पहुँचने में लगभग 28 वर्ष लगे थे।

चांदी के मामले में, जनवरी 2026 में यह 121.6 डॉलर प्रति औंस के शिखर पर थी और फिर गिरकर 55.6 डॉलर प्रति औंस पर आ गई — करीब 54 प्रतिशत की गिरावट। इसके बावजूद यह 1980 के बाद की 93 प्रतिशत की गिरावट से कहीं कम है। उस दौर में चांदी को स्थायी निचला स्तर बनाने में 11 वर्ष से अधिक और पुराने रिकॉर्ड तक पहुँचने में 31 वर्ष से अधिक का समय लगा था।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमती धातुओं में बड़ी तेजी के बाद सुधार आना सामान्य बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक नजरिए से निवेश करना चाहिए, क्योंकि इतिहास बताता है कि बड़ी गिरावट के बाद स्थायी निचला स्तर बनाने में कई महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लग सकता है। आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा और डॉलर की चाल ही सर्राफा बाजार का रुख तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है — जनवरी 2026 के रिकॉर्ड शिखर के बाद सोने और चांदी में जो सुधार आया है, वह अभी कहाँ खड़ा है? DSP नेत्रा रिपोर्ट का ऐतिहासिक तुलनात्मक विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि मौजूदा गिरावट 1980 के बाद की ऐतिहासिक गिरावटों से काफी कम है, फिर भी निवेशकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उस दौर में रिकवरी में दशकों लगे थे। असली चिंता यह है कि फेडरल रिजर्व की नीतिगत अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय खुदरा निवेशक अल्पकालिक भाव-परिवर्तनों पर अत्यधिक प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जबकि दीर्घकालिक संरचनात्मक तस्वीर अभी भी अस्पष्ट बनी हुई है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

6 जुलाई 2026 को MCX पर सोने और चांदी का भाव कितना रहा?
MCX पर अगस्त डिलीवरी सोना ₹1,46,327 प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी चांदी ₹2,35,344 प्रति किलोग्राम पर रही। इंट्राडे में सोना ₹1,46,231 और चांदी ₹2,35,010 के निचले स्तर तक पहुँची।
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का कारण क्या है?
मजबूत अमेरिकी डॉलर (DXY ~100.07) और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी मुख्य कारण रहे। डॉलर मजबूत होने पर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की माँग घटती है, जिससे निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
IBJA के अनुसार 6 जुलाई को सोने-चांदी का भाव क्या था?
IBJA के आँकड़ों के अनुसार 999 प्यूरिटी सोना ₹1,45,583 प्रति 10 ग्राम और 999 प्यूरिटी चांदी ₹2,33,158 प्रति किलोग्राम पर रही। सोने में शुक्रवार के बंद भाव से ₹524 और चांदी में ₹196 की गिरावट आई।
DSP नेत्रा रिपोर्ट में सोने-चांदी की ऐतिहासिक गिरावट के बारे में क्या कहा गया है?
DSP नेत्रा (जुलाई 2026) के अनुसार सोना जनवरी 2026 के 5,602 डॉलर के शिखर से ~30% और चांदी 121.6 डॉलर से ~54% नीचे आ चुकी है। हालाँकि यह गिरावट 1980 के बाद की 71% (सोना) और 93% (चांदी) की ऐतिहासिक गिरावट से काफी कम है।
क्या अभी सोने-चांदी में निवेश करना सही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक नजरिए से निवेश करना चाहिए। इतिहास बताता है कि बड़ी गिरावट के बाद कीमती धातुओं को स्थायी निचला स्तर बनाने में महीनों से वर्षों तक का समय लग सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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