7 जुलाई 2026
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बीआरओ फंड घोटाले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: 11 राज्यों के 26 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

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बीआरओ फंड घोटाले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: 11 राज्यों के 26 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

सारांश

सीबीआई ने बीआरओ के लद्दाख स्थित प्रोजेक्ट विजयक और प्रोजेक्ट योजक में फर्जी मजदूरों के नाम पर कथित भुगतान घोटाले की जांच में 11 राज्यों के 26 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। चार एफआईआर में लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के 10 अधिकारी आरोपी हैं — यह सीमावर्ती अवसंरचना में भ्रष्टाचार की जांच का अब तक का सबसे बड़ा अभियान है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 6 जुलाई को 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 26 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
जांच बीआरओ के 'प्रोजेक्ट विजयक' और 'प्रोजेक्ट योजक' (लद्दाख) में वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।
आरोप: फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान, गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कदाचार।
चार एफआईआर में 10 अधिकारी नामजद — जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के अधिकारी व इंजीनियर शामिल।
तलाशी में महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद; जांच जारी।
मामला रक्षा मंत्रालय की शिकायत और बीआरओ के टेक्निकल बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स की आंतरिक जांच के बाद दर्ज हुआ।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) में सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़े चार आपराधिक मामलों में 6 जुलाई को एक साथ 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 26 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई लद्दाख में बीआरओ की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं — 'प्रोजेक्ट विजयक' और 'प्रोजेक्ट योजक' — में वित्तीय अनियमितताओं की चल रही जांच का हिस्सा है।

छापेमारी का दायरा और भौगोलिक विस्तार

सीबीआई की तलाशी टीमों ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में एक साथ कार्रवाई की। इतने व्यापक भौगोलिक दायरे में एक साथ छापेमारी यह संकेत देती है कि जांच एजेंसी के अनुसार इस कथित घोटाले के तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं।

मामले की जड़: फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान

सीबीआई के अनुसार, ये मामले अस्थायी मजदूरों (कैजुअल लेबरर्स) की नियुक्ति और फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान जारी करने में गड़बड़ियों से जुड़े हैं, जिससे सरकारी फंड के दुरुपयोग का संदेह है। जांच में मजदूरों की भर्ती और मजदूरी भुगतान से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं के शुरुआती साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।

गौरतलब है कि यह मामला बीआरओ के टेक्निकल बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स की आंतरिक जांच के बाद सामने आया, जिसके आधार पर रक्षा मंत्रालय ने आपराधिक शिकायतें दर्ज कराईं और सीबीआई ने चार एफआईआर दर्ज कीं।

आरोपियों की सूची और आरोपों की प्रकृति

एफआईआर में कुल 10 अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के अधिकारी तथा इंजीनियर शामिल हैं। इसके अलावा कुछ निजी व्यक्तियों के नाम भी एफआईआर में हैं।

जांच के दायरे में आने वाले कथित अपराधों में सरकारी फंड का गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश (भारतीय दंड संहिता के तहत) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक कदाचार और रिश्वतखोरी के आरोप भी लगाए गए हैं।

तलाशी में मिले साक्ष्य

सीबीआई ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है। एजेंसी ने इन मामलों की व्यापक जांच करने और शीघ्र निष्कर्ष तक पहुँचने की प्रतिबद्धता जताई है।

बीआरओ की भूमिका और इस मामले का महत्व

उल्लेखनीय है कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार रणनीतिक संगठन है। यह संगठन मित्र पड़ोसी देशों में भी अवसंरचना निर्माण कार्य करता है, इसलिए इसमें वित्तीय अनियमितताओं के आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर माने जाते हैं। यह मामला आगे और क्या खुलासे करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कार्रवाई भी महज़ एक प्रक्रियात्मक कदम बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने बीआरओ के खिलाफ यह कार्रवाई क्यों की?
सीबीआई ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के लद्दाख स्थित प्रोजेक्ट विजयक और प्रोजेक्ट योजक में फर्जी मजदूरों के नाम पर कथित भुगतान और सरकारी फंड के दुरुपयोग की जांच के तहत यह छापेमारी की। रक्षा मंत्रालय की आपराधिक शिकायत और बीआरओ की आंतरिक जांच में शुरुआती साक्ष्य मिलने के बाद चार एफआईआर दर्ज की गईं।
बीआरओ फंड हेराफेरी मामले में कितने और कौन से अधिकारी आरोपी हैं?
चार एफआईआर में कुल 10 अधिकारियों के नाम हैं, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के सैन्य अधिकारी तथा इंजीनियर शामिल हैं। इसके अलावा कुछ निजी व्यक्ति भी आरोपियों की सूची में हैं।
सीबीआई की छापेमारी किन-किन राज्यों में हुई?
सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड — कुल 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 26 ठिकानों पर तलाशी ली। तलाशी में महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
बीआरओ क्या है और इसमें भ्रष्टाचार के आरोप क्यों गंभीर हैं?
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) भारत का वह रणनीतिक संगठन है जो देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क निर्माण व रखरखाव करता है। यह मित्र पड़ोसी देशों में भी अवसंरचना कार्य करता है, इसलिए इसमें वित्तीय अनियमितताओं के आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं।
इस मामले में किन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं?
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत सरकारी फंड का गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक कदाचार और रिश्वतखोरी के मामले भी दर्ज किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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