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₹661 करोड़ सरकारी फंड घोटाला: सीबीआई के 6 ठिकानों पर छापे, हरियाणा अधिकारियों-बैंकरों की मिलीभगत के सबूत मिले

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₹661 करोड़ सरकारी फंड घोटाला: सीबीआई के 6 ठिकानों पर छापे, हरियाणा अधिकारियों-बैंकरों की मिलीभगत के सबूत मिले

सारांश

सीबीआई ने ₹661 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और पंचकूला में 6 जगहों पर छापे मारे। हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों और IDFC फर्स्ट बैंक व AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मियों की मिलीभगत के सबूत मिले हैं। हरियाणा के 8 और चंडीगढ़ के 2 विभाग प्रभावित हुए।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 7 जून 2026 को दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और पंचकूला में 6 ठिकानों पर छापेमारी की।
घोटाले में ₹661 करोड़ के सरकारी धन का गबन, हरियाणा के 8 और चंडीगढ़ के 2 विभाग प्रभावित।
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मियों की मिलीभगत के सबूत मिले।
नोएडा की विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में अपराध की रकम जमा कर डायरेक्टर के व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर की गई।
सीबीआई ने पंचकूला अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका दर्ज।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 जून 2026 को दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और पंचकूला समेत 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर ₹661 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई की। इस मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे हरियाणा सरकार के धन की धोखाधड़ी से निकासी का आरोप है।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई को ऐसे आपत्तिजनक साक्ष्य मिले, जो यह दर्शाते हैं कि हरियाणा कैडर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी खाते खुलवाए, धनराशि का हस्तांतरण कराया और उसे अन्यत्र भेजने में सक्रिय सहयोग दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, इन अधिकारियों को इस मिलीभगत और जानबूझकर कार्रवाई न करने के बदले अनुचित लाभ मिला।

छापेमारी में नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर के घर व कार्यालय भी शामिल थे। जांच में सामने आया कि अपराध से अर्जित रकम पहले विपम कंसल्टेंसी के खाते में जमा की गई, जिसे बाद में डायरेक्टर के व्यक्तिगत खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और संपत्ति के कागजात जब्त किए गए।

घोटाले का दायरा और प्रभावित विभाग

सीबीआई के अनुसार, इस घोटाले ने हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप कुल ₹661 करोड़ के सरकारी धन का गबन हुआ। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में रखी सरकारी निधि को व्यवस्थित तरीके से निकाला गया।

गौरतलब है कि यह जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से प्राप्त एक मामले और चंडीगढ़ आर्थिक अपराध थाने में दर्ज दो मामलों को सीबीआई द्वारा अपने हाथ में लेने के बाद शुरू हुई थी।

चार्जशीट और कानूनी कार्रवाई

प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने पंचकूला की सीबीआई अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के सरकारी अधिकारियों की भूमिका का विस्तृत विवरण दिया गया है। चार्जशीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा हरियाणा सरकार के फंड को किस तरीके से धोखाधड़ी से निकाला गया।

आरोप आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन और लोक सेवकों की मिलीभगत से जुड़े अपराधों से संबंधित हैं।

आगे क्या होगा

सीबीआई के अनुसार, तीनों मामलों में जांच तेज गति से जारी है और इसमें संलिप्त पाए गए सभी व्यक्तियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी खजाने की डिजिटल सुरक्षा और बैंकिंग निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की मिलीभगत के लिए दीर्घकालिक आंतरिक निगरानी विफलता जिम्मेदार हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित तंत्र का संकेत है — जहाँ लोक सेवक, बैंक कर्मी और निजी कंपनियाँ एक साथ सरकारी खजाने को खोखला करने में लगी रहीं। सवाल यह है कि ₹661 करोड़ का यह गबन वर्षों तक आंतरिक ऑडिट और बैंकिंग अनुपालन तंत्र की नजर से कैसे बचा रहा। हरियाणा के 10 विभागों का एक साथ प्रभावित होना यह भी दर्शाता है कि यह कोई छिटपुट भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि संस्थागत विफलता है। चार्जशीट दाखिल होना एक शुरुआत है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब उन निगरानी तंत्रों की भी जांच हो जो इस दौरान मूकदर्शक बने रहे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

₹661 करोड़ का सरकारी फंड घोटाला क्या है?
यह हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के ₹661 करोड़ के धन के गबन का मामला है। आरोप है कि सरकारी अधिकारियों ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मियों के साथ मिलकर फर्जी खातों के जरिए यह रकम निकाली।
सीबीआई ने किन जगहों पर छापेमारी की?
सीबीआई ने 7 जून 2026 को चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में 6 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। इनमें हरियाणा कैडर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और नोएडा की विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर के घर व कार्यालय शामिल थे।
विपम कंसल्टेंसी की इस मामले में क्या भूमिका है?
जांच के अनुसार, अपराध से अर्जित धनराशि पहले नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में जमा की गई और फिर उसे कंपनी के डायरेक्टर के व्यक्तिगत बैंक खाते में स्थानांतरित किया गया। तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं।
इस मामले में सीबीआई ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
सीबीआई ने पंचकूला की सीबीआई अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका का विवरण है। तीनों मामलों में जांच जारी है और सभी संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह जांच सीबीआई के पास कैसे पहुँची?
यह जांच मूल रूप से हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और चंडीगढ़ आर्थिक अपराध थाने में दर्ज मामलों के रूप में शुरू हुई थी। बाद में इन मामलों को सीबीआई ने अपने अधिकार क्षेत्र में लेकर जांच शुरू की।
राष्ट्र प्रेस
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