सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में 2 अधिकारी दबोचे, हरियाणा के ₹504 करोड़ फर्जी FD में ट्रांसफर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 30 जून 2025 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (मोहाली शाखा) के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा सरकार के विभागों के सरप्लस फंड को जाली फिक्स्ड डिपॉजिट और फर्जी डेबिट नोट के ज़रिए निजी कंपनियों में स्थानांतरित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
मामले का मूल घटनाक्रम
चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा इस धोखाधड़ी का केंद्र रही। जांच के अनुसार, हरियाणा सरकार के 8 विभागों के कुल ₹504 करोड़ जाली और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट तथा डेबिट नोट के माध्यम से फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए गए। सीबीआई का कहना है कि दोनों गिरफ्तार अधिकारियों ने संदिग्ध बैंक खाते खुलवाने और धोखाधड़ी वाले लेनदेन को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को पंचकूला में स्पेशल जज के समक्ष पेश किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब सीबीआई पहले ही इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
जांच का दायरा और चार्जशीट
सीबीआई ने हरियाणा के इस मामले में अब तक जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 कंपनियाँ और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। गौरतलब है कि यह जांच मूल रूप से हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो के पास थी, जिसे राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने अपने हाथ में लिया।
चंडीगढ़ के दो अतिरिक्त मामले
सीबीआई ने चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी से जुड़े दो और मामले भी अपने हाथ में लिए हैं। पहला मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से संबंधित है, जिसमें 5 बैंकरों, 1 सीएससीएल अधिकारी और 1 निजी व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
दूसरा मामला क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़ा है, जिसमें 5 बैंकरों, 2 क्रेस्ट अधिकारियों, 4 निजी व्यक्तियों और 2 कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इस प्रकार तीनों मामलों में कुल आरोपियों की संख्या काफी बड़ी हो गई है।
सरकारी फंड की वसूली पर फोकस
सीबीआई के अनुसार एजेंसी इन सभी मामलों में दोषियों को सज़ा दिलाने के साथ-साथ गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए सरकारी धन का पूरा हिसाब लगाने में जुटी है। यह मामला उस व्यापक चिंता को रेखांकित करता है जिसमें सार्वजनिक विभागों के सरप्लस फंड की निगरानी में कथित तौर पर बड़ी चूक हुई। आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियों और जांच के विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।