8 जुलाई 2026
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सीबीआई ने ₹50 करोड़ के सरकारी फंड गबन में एचएलडब्ल्यूबी के दो अधिकारी गिरफ्तार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड से जुड़ा मामला

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सीबीआई ने ₹50 करोड़ के सरकारी फंड गबन में एचएलडब्ल्यूबी के दो अधिकारी गिरफ्तार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड से जुड़ा मामला

सारांश

सीबीआई ने ₹50 करोड़ के सरकारी फंड गबन में हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया। यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा से जुड़े ₹504 करोड़ के बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है, जिसमें अब तक 17 आरोपियों पर चार्जशीट दायर हो चुकी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 8 जुलाई 2025 को एचएलडब्ल्यूबी के अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और अकाउंटेंट अमित कुमार को गिरफ्तार किया।
दोनों पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा से ₹50 करोड़ की सरकारी राशि गबन का आरोप है।
धन कथित तौर पर कैपको फिनटेक सर्विसेज , एसआरआर प्लानिंग गुरुस और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी शेल कंपनियों में भेजा गया।
यह मामला हरियाणा के 8 सरकारी विभागों से जुड़े ₹504 करोड़ के बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है।
सीबीआई अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है, जिनमें 6 बैंक अधिकारी शामिल हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 8 जुलाई 2025 को हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड (एचएलडब्ल्यूबी) के दो अधिकारियों — अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और कॉन्ट्रैक्ट आधारित अकाउंटेंट अमित कुमार — को गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में एचएलडब्ल्यूबी के खाते से ₹50 करोड़ की सरकारी राशि धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाली और फर्जी कंपनियों में स्थानांतरित की। यह मामला एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों का कथित तौर पर ₹504 करोड़ का सरकारी धन अवैध रूप से निकाला गया।

मुख्य घटनाक्रम

जांच में सामने आया कि एचएलडब्ल्यूबी के बैंक खाते से धन निकालने के लिए धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन का सहारा लिया गया। निकाली गई राशि को कैपको फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कथित शेल कंपनियों में भेजा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, जुगल किशोर और अमित कुमार के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिलने के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया और कोर्ट में पेश कर सीबीआई की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

व्यापक बैंकिंग फ्रॉड का संदर्भ

यह गिरफ्तारी एक बड़े वित्तीय घोटाले की कड़ी है। आरोपों के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में हरियाणा सरकार के आठ विभागों के कुल ₹504 करोड़ कथित तौर पर फर्जी और अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट तथा धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के माध्यम से निकाले गए। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के फंड प्रबंधन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सीबीआई जांच की स्थिति

हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह मामला हरियाणा स्टेट विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था। अब तक सीबीआई इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियाँ और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।

आगे की कार्रवाई

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के कठघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन के कथित हस्तांतरण की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्हीं सरकारी कर्मचारियों पर हैं जिन्हें सार्वजनिक धन की रक्षा करनी थी। शेल कंपनियों के जरिए धन का कथित हस्तांतरण दर्शाता है कि यह एकाकी घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तंत्र था। आठ विभागों का एक साथ प्रभावित होना यह सवाल उठाता है कि आंतरिक ऑडिट और बैंकिंग निगरानी तंत्र इतने लंबे समय तक क्यों विफल रहे। जब तक जवाबदेही केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहेगी, असली सवाल — कि निर्णय लेने वाले स्तर पर क्या चूक हुई — अनुत्तरित रहेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने एचएलडब्ल्यूबी के किन अधिकारियों को गिरफ्तार किया और क्यों?
सीबीआई ने हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड के अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और कॉन्ट्रैक्ट आधारित अकाउंटेंट अमित कुमार को गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में एचएलडब्ल्यूबी के खाते से ₹50 करोड़ की सरकारी राशि धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाली।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक चंडीगढ़ फ्रॉड में कुल कितनी राशि का गबन हुआ?
जांच के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा से जुड़े इस बड़े घोटाले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों का कथित तौर पर ₹504 करोड़ का सरकारी धन फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाला गया।
इस मामले में सीबीआई ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
सीबीआई ने हरियाणा सरकार के अनुरोध पर यह जांच हरियाणा स्टेट विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है, जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियाँ और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।
इस घोटाले में शेल कंपनियों की क्या भूमिका थी?
जांच के अनुसार, एचएलडब्ल्यूबी के खाते से निकाली गई राशि कैपको फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कथित शेल कंपनियों में स्थानांतरित की गई। ये फर्जी या अस्तित्वहीन कंपनियाँ सरकारी धन को छिपाने और इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल की गईं।
गिरफ्तार अधिकारियों को कोर्ट ने क्या सजा दी?
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों — जुगल किशोर और अमित कुमार — को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उन्हें सीबीआई की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। मामले की आगे की सुनवाई जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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