सीबीआई ने ₹50 करोड़ के सरकारी फंड गबन में एचएलडब्ल्यूबी के दो अधिकारी गिरफ्तार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड से जुड़ा मामला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 8 जुलाई 2025 को हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड (एचएलडब्ल्यूबी) के दो अधिकारियों — अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और कॉन्ट्रैक्ट आधारित अकाउंटेंट अमित कुमार — को गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में एचएलडब्ल्यूबी के खाते से ₹50 करोड़ की सरकारी राशि धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाली और फर्जी कंपनियों में स्थानांतरित की। यह मामला एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों का कथित तौर पर ₹504 करोड़ का सरकारी धन अवैध रूप से निकाला गया।
मुख्य घटनाक्रम
जांच में सामने आया कि एचएलडब्ल्यूबी के बैंक खाते से धन निकालने के लिए धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन का सहारा लिया गया। निकाली गई राशि को कैपको फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कथित शेल कंपनियों में भेजा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, जुगल किशोर और अमित कुमार के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिलने के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया और कोर्ट में पेश कर सीबीआई की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
व्यापक बैंकिंग फ्रॉड का संदर्भ
यह गिरफ्तारी एक बड़े वित्तीय घोटाले की कड़ी है। आरोपों के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में हरियाणा सरकार के आठ विभागों के कुल ₹504 करोड़ कथित तौर पर फर्जी और अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट तथा धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के माध्यम से निकाले गए। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के फंड प्रबंधन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सीबीआई जांच की स्थिति
हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह मामला हरियाणा स्टेट विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था। अब तक सीबीआई इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियाँ और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।
आगे की कार्रवाई
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के कठघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन के कथित हस्तांतरण की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।