सीबीआई ने CREST चंडीगढ़ धोखाधड़ी में 13 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया, ₹75.34 करोड़ के गबन का मामला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार, 16 जून को चंडीगढ़ के विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) की अदालत में चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी साइंस एंड टेक्निकल प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) के सरकारी कोष के दुरुपयोग से जुड़े मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों, सीआरईएसटी के सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों पर ₹75.34 करोड़ की सरकारी निधि के गबन का आरोप है।
मुख्य आरोपी और आरोप
आरोप पत्र में कुल 13 आरोपी नामजद किए गए हैं। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 5 अधिकारी, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अंतर्गत आने वाले सीआरईएसटी के 2 सरकारी कर्मचारी, 2 फर्जी कंपनियाँ और 4 निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
आरोपियों पर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
जांच के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों ने सीआरईएसटी के सरकारी कर्मचारियों के साथ आपराधिक मिलीभगत कर सीआरईएसटी के बैंक खातों से ₹75.34 करोड़ की राशि निकाली। इसके बाद इस धनराशि को कई निजी व्यक्तियों की सहायता से अन्यत्र स्थानांतरित किया गया, जिन्होंने भी इन सरकारी निधियों से व्यक्तिगत लाभ उठाया। यह ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े वित्तीय अपराधों की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
तीन मामलों में सीबीआई की व्यापक जांच
गौरतलब है कि सीबीआई ने इस श्रृंखला में कुल तीन मामले अपने हाथ में लिए हैं। पहला मामला हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो से लिया गया है, जो हरियाणा सरकार के आठ विभागों से संबंधित है। दो अन्य मामले चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन से लिए गए हैं, जो चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और सीआरईएसटी चंडीगढ़ से जुड़े हैं।
सीबीआई हरियाणा मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ दो आरोप पत्र और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी परियोजना से संबंधित मामले में 7 आरोपियों के खिलाफ एक आरोप पत्र पहले ही दाखिल कर चुकी है। मंगलवार को सीआरईएसटी मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के साथ, तीनों मामलों में अब तक कुल 37 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही हो चुकी है।
आगे क्या होगा
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है और भविष्य में और आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे। विशेष सीबीआई अदालत अब आरोपियों के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी। इस प्रकरण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सरकारी संस्थाओं के बीच वित्तीय निगरानी की खामियों पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।