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सीबीआई ने CREST चंडीगढ़ धोखाधड़ी में 13 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया, ₹75.34 करोड़ के गबन का मामला

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सीबीआई ने CREST चंडीगढ़ धोखाधड़ी में 13 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया, ₹75.34 करोड़ के गबन का मामला

सारांश

सीबीआई ने चंडीगढ़ की विशेष अदालत में CREST के ₹75.34 करोड़ के गबन मामले में IDFC फर्स्ट बैंक के 5 अधिकारियों समेत 13 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया। तीनों संबंधित मामलों में अब तक 37 आरोपी नामजद हो चुके हैं और जांच जारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 16 जून को चंडीगढ़ की विशेष अदालत में सीआरईएसटी धोखाधड़ी मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया।
आरोप पत्र में 13 आरोपी नामजद — आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 5 अधिकारी , सीआरईएसटी के 2 सरकारी कर्मचारी , 2 फर्जी कंपनियाँ और 4 निजी व्यक्ति ।
सीआरईएसटी के बैंक खातों से ₹75.34 करोड़ की सरकारी निधि निकालने और हस्तांतरित करने का आरोप।
सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 सहित कई धाराओं में मामला दर्ज।
तीनों संबंधित मामलों में सीबीआई अब तक कुल 37 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है; जांच जारी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार, 16 जून को चंडीगढ़ के विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) की अदालत में चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी साइंस एंड टेक्निकल प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) के सरकारी कोष के दुरुपयोग से जुड़े मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों, सीआरईएसटी के सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों पर ₹75.34 करोड़ की सरकारी निधि के गबन का आरोप है।

मुख्य आरोपी और आरोप

आरोप पत्र में कुल 13 आरोपी नामजद किए गए हैं। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 5 अधिकारी, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अंतर्गत आने वाले सीआरईएसटी के 2 सरकारी कर्मचारी, 2 फर्जी कंपनियाँ और 4 निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

आरोपियों पर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों ने सीआरईएसटी के सरकारी कर्मचारियों के साथ आपराधिक मिलीभगत कर सीआरईएसटी के बैंक खातों से ₹75.34 करोड़ की राशि निकाली। इसके बाद इस धनराशि को कई निजी व्यक्तियों की सहायता से अन्यत्र स्थानांतरित किया गया, जिन्होंने भी इन सरकारी निधियों से व्यक्तिगत लाभ उठाया। यह ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े वित्तीय अपराधों की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

तीन मामलों में सीबीआई की व्यापक जांच

गौरतलब है कि सीबीआई ने इस श्रृंखला में कुल तीन मामले अपने हाथ में लिए हैं। पहला मामला हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो से लिया गया है, जो हरियाणा सरकार के आठ विभागों से संबंधित है। दो अन्य मामले चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन से लिए गए हैं, जो चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और सीआरईएसटी चंडीगढ़ से जुड़े हैं।

सीबीआई हरियाणा मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ दो आरोप पत्र और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी परियोजना से संबंधित मामले में 7 आरोपियों के खिलाफ एक आरोप पत्र पहले ही दाखिल कर चुकी है। मंगलवार को सीआरईएसटी मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के साथ, तीनों मामलों में अब तक कुल 37 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही हो चुकी है।

आगे क्या होगा

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है और भविष्य में और आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे। विशेष सीबीआई अदालत अब आरोपियों के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी। इस प्रकरण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सरकारी संस्थाओं के बीच वित्तीय निगरानी की खामियों पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत इतने समय तक नजरअंदाज कैसे होती रही। ₹75.34 करोड़ की निकासी के लिए कई स्तरों पर अनुमोदन की जरूरत होती है — यह केवल कुछ व्यक्तियों की करतूत नहीं, बल्कि प्रणालीगत निगरानी की विफलता का संकेत है। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और हरियाणा के आठ विभागों से जुड़े समानांतर मामले बताते हैं कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक पैटर्न है। जब तक आंतरिक ऑडिट तंत्र को दांत नहीं दिए जाते, सीबीआई की कार्रवाई क्षति-नियंत्रण से अधिक कुछ नहीं रहेगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने CREST चंडीगढ़ मामले में क्या आरोप पत्र दाखिल किया है?
सीबीआई ने 16 जून को चंडीगढ़ की विशेष अदालत में CREST के सरकारी कोष से ₹75.34 करोड़ के गबन के मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया है। इनमें IDFC फर्स्ट बैंक के 5 अधिकारी, CREST के 2 सरकारी कर्मचारी, 2 फर्जी कंपनियाँ और 4 निजी व्यक्ति शामिल हैं।
CREST चंडीगढ़ क्या है और इसमें धोखाधड़ी कैसे हुई?
CREST यानी चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी साइंस एंड टेक्निकल प्रमोशन सोसाइटी, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अंतर्गत एक सरकारी संस्था है। आरोप के अनुसार, IDFC फर्स्ट बैंक के अधिकारियों ने CREST के सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर CREST के बैंक खातों से ₹75.34 करोड़ निकाले और निजी व्यक्तियों के माध्यम से इसे अन्यत्र स्थानांतरित किया।
इस मामले में अब तक कितने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है?
सीबीआई ने तीन संबंधित मामलों में अब तक कुल 37 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए हैं — हरियाणा मामले में 17, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी मामले में 7 और CREST मामले में 13। तीनों मामलों की जांच अभी जारी है और भविष्य में और आरोप पत्र दाखिल होने की संभावना है।
आरोपियों पर कौन-सी धाराओं में मामला दर्ज है?
आरोपियों पर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
विशेष सीबीआई अदालत अब आरोपियों के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी। सीबीआई ने संकेत दिया है कि जांच जारी है और भविष्य में और आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे। हरियाणा और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी से जुड़े समानांतर मामलों में भी जांच चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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