₹504 करोड़ सरकारी धन गबन: सीबीआई ने चंडीगढ़-लुधियाना में 5 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 23 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ और लुधियाना में एक साथ पाँच स्थानों पर छापेमारी कर ₹504 करोड़ के सरकारी धन गबन मामले में अहम डिजिटल और दस्तावेज़ी साक्ष्य ज़ब्त किए। यह कार्रवाई चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले की जाँच के तहत की गई।
छापेमारी में क्या मिला
जाँच एजेंसी ने तलाशी के दौरान डिजिटल स्टोरेज ड्राइव, डिजिटल सिग्नेचर, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़, वित्तीय रिकॉर्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। इन सभी साक्ष्यों की बारीकी से जाँच और फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
छापेमारी में शामिल ठिकानों में गबन की गई राशि के कथित लाभार्थियों के आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सीएससीएल अधिकारी अनुभव मिश्रा का परिसर तथा जाँच से जुड़े निजी संस्थानों के कार्यालय शामिल थे।
घोटाले का स्वरूप
सीबीआई के अनुसार, यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक व्यापक बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब ₹504 करोड़ सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के ज़रिए निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया।
गौरतलब है कि यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर जाँच की जिम्मेदारी बाद में सीबीआई को सौंपी गई।
अब तक की कानूनी कार्रवाई
इस मामले में सीबीआई अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियाँ और छह व्यक्ति शामिल हैं।
इसके अलावा सीबीआई ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जाँच की है। पहला मामला सीएससीएल और नगर निगम चंडीगढ़ से संबंधित है, जिसमें पाँच बैंक अधिकारियों, एक सीएससीएल अधिकारी और एक निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। दूसरा मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) से जुड़ा है, जिसमें पाँच बैंक अधिकारी, दो सीआरईएसटी अधिकारी, चार निजी व्यक्ति और दो कंपनियाँ आरोपी हैं।
सीबीआई की प्रतिबद्धता
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे मामले में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। एजेंसी गबन किए गए सार्वजनिक धन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने और अपराध से अर्जित राशि को ट्रेस करने की दिशा में जाँच जारी रखेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर देशव्यापी बहस तेज़ है और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।