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आईडीएफसी बैंक घोटाला: सीबीआई ने 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, हरियाणा और चंडीगढ़ में ₹657 करोड़ की हेराफेरी

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आईडीएफसी बैंक घोटाला: सीबीआई ने 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, हरियाणा और चंडीगढ़ में ₹657 करोड़ की हेराफेरी

सारांश

सीबीआई ने आईडीएफसी बैंक घोटाले में एक साथ दो चार्जशीट दाखिल कीं — हरियाणा में ₹504 करोड़ और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी में ₹153 करोड़ की कथित हेराफेरी। सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप, जांच अभी जारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 12 जून 2026 को आईडीएफसी बैंक घोटाले में 9 आरोपियों के खिलाफ दो अलग-अलग विशेष अदालतों में चार्जशीट दाखिल की।
हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में कथित तौर पर ₹504 करोड़ और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड मामले में ₹153 करोड़ की हानि का अनुमान।
हरियाणा मामले में यह दूसरी चार्जशीट है; इससे पहले 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
चंडीगढ़ मामले में 7 आरोपी नामजद — 5 बैंक अधिकारी , 1 सीएससीएल अधिकारी , 1 निजी व्यक्ति ।
पिछले सप्ताह चंडीगढ़ , पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में 6 स्थानों पर छापेमारी हुई।
सीबीआई ने संकेत दिया कि दोनों मामलों में आगे और चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 12 जून 2026 को हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के सरकारी फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में सरकारी अधिकारियों और आईडीएफसी बैंक के कर्मचारियों सहित कुल 9 आरोपियों के खिलाफ दो अलग-अलग विशेष अदालतों में चार्जशीट दाखिल की। इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर कथित तौर पर ₹657 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएँ सामने आई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंक लेन-देन के चलते लगभग ₹504 करोड़ का नुकसान हुआ। वहीं, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित मामले में करीब ₹153 करोड़ की हानि का अनुमान लगाया गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों में आगे भी अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।

चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

दोनों मामलों में आरोपी कौन हैं

हरियाणा मामले की चार्जशीट पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इसमें दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें कथित अपराध से प्राप्त धन का लाभार्थी बताया गया है। गौरतलब है कि यह इस मामले में दूसरी चार्जशीट है — इससे पहले सीबीआई 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियाँ और चार निजी व्यक्ति शामिल थे।

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले की चार्जशीट चंडीगढ़ स्थित सीबीआई विशेष अदालत में दाखिल हुई है। इसमें कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है — पाँच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति। यह इस मामले में पहली चार्जशीट है।

जांच की पृष्ठभूमि

सीबीआई ने यह जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से आठ विभागों से जुड़े एक मामले को अपने हाथ में लेने के बाद शुरू की थी। इसके अलावा, चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामले भी सीबीआई को सौंपे गए थे।

जांच के दौरान सीबीआई ने पिछले सप्ताह चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में छह स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी में हरियाणा कैडर के कुछ सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड तथा उसके निदेशक के ठिकाने शामिल थे।

कथित मिलीभगत का तरीका

सीबीआई के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर खाते खुलवाने, धनराशि ट्रांसफर करने और बाद में उसे अन्यत्र भेजने में सहयोग किया। एजेंसी का कहना है कि सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के जरिए इस धन का दुरुपयोग किया गया।

आगे क्या होगा

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में जांच अभी जारी है और भविष्य में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी योजनाओं के फंड में पारदर्शिता और बैंकिंग तंत्र की जवाबदेही पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी खजाने और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की बैंकिंग-निगरानी में गहरी खामियों का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार शहरी बुनियादी ढाँचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है — और अगर सीएससीएल जैसी संस्था के फंड इस तरह निकाले जा सकते हैं, तो निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठते हैं। ₹657 करोड़ की यह कथित हेराफेरी अकेले एक बैंक या एक विभाग की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी-बैंकिंग इंटरफेस पर व्यवस्थागत कमज़ोरी की ओर इशारा करती है। जब तक जवाबदेही केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहेगी, ऐसे घोटाले दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीएफसी बैंक घोटाले में सीबीआई ने किन पर चार्जशीट दाखिल की है?
सीबीआई ने हरियाणा और चंडीगढ़ मामलों में कुल 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें सरकारी अधिकारी, आईडीएफसी बैंक के कर्मचारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं।
इस घोटाले में कितने रुपये की हेराफेरी का आरोप है?
हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में कथित तौर पर ₹504 करोड़ और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड मामले में ₹153 करोड़ की हानि का अनुमान है, यानी कुल मिलाकर ₹657 करोड़ से अधिक।
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड घोटाला क्या है?
यह मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसमें बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से खाते खुलवाकर और धन ट्रांसफर करके ₹153 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है। यह मामला पहले चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन में था, जिसे बाद में सीबीआई को सौंपा गया।
सीबीआई ने इस मामले में छापेमारी कहाँ की?
सीबीआई ने पिछले सप्ताह चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में छह स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी में हरियाणा कैडर के सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के ठिकाने शामिल थे।
क्या इन मामलों में और गिरफ्तारियाँ या चार्जशीट संभव हैं?
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में जांच अभी जारी है और आगे भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। हरियाणा मामले में पहले ही 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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