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हरियाणा IDFC फंड घोटाला: CBI की तीसरी चार्जशीट, 6 IAS समेत 37 आरोपी अब जाँच के घेरे में

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हरियाणा IDFC फंड घोटाला: CBI की तीसरी चार्जशीट, 6 IAS समेत 37 आरोपी अब जाँच के घेरे में

सारांश

हरियाणा के ₹504 करोड़ के सरकारी फंड गबन मामले में CBI ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की — इस बार 6 IAS अधिकारी सीधे घेरे में हैं। कुल 37 आरोपी, 26 गिरफ्तार और ₹20 करोड़ का सोना ज़ब्त। यह घोटाला हरियाणा के प्रशासनिक तंत्र में वित्तीय अनुशासन की गहरी विफलता को उजागर करता है।

मुख्य बातें

CBI ने 2 सितंबर को पंचकूला में 19 नए आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की।
नई चार्जशीट में हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी , IDFC फर्स्ट बैंक के 3 और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का 1 अधिकारी शामिल।
घोटाले की कुल राशि ₹504 करोड़ ; हरियाणा सरकार के 8 विभाग प्रभावित।
अब तक कुल 37 आरोपी नामज़द, 26 गिरफ्तार ; 54 स्थानों पर तलाशी।
CBI ने लगभग ₹20 करोड़ मूल्य का सोना सहित अहम साक्ष्य ज़ब्त किए।
CBI ने यह जाँच हरियाणा सरकार के अनुरोध पर राज्य सतर्कता ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 2 सितंबर को पंचकूला में CBI मामलों के विशेष न्यायाधीश के समक्ष हरियाणा के ₹504 करोड़ के सरकारी राशि गबन मामले में 19 नए आरोपियों के विरुद्ध तीसरी चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी शामिल हैं, जो इस घोटाले की जाँच को और अधिक संवेदनशील बनाता है।

मुख्य घटनाक्रम

CBI की नवीनतम चार्जशीट में कुल 19 आरोपी नामज़द किए गए हैं — 6 IAS अधिकारी (हरियाणा कैडर), IDFC फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारी, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का 1 अधिकारी और हरियाणा राज्य सरकार के 9 अन्य अधिकारी। इससे पहले CBI 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और निजी कंपनियाँ शामिल थीं। अब इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या 37 हो गई है।

घोटाले का तरीका

जाँच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने दोनों बैंकों के अधिकारियों के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश रची। हरियाणा सरकार के 8 विभागों के फंड को अधिकृत बैंकों से हटाकर IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की उन विशिष्ट शाखाओं में स्थानांतरित किया गया, जहाँ आरोपी बैंक अधिकारी तैनात थे।

इन शाखाओं में नए बैंक खाते खोले गए और वहाँ से फंड को धोखाधड़ी से निकालकर ऐसे तीसरे पक्षों को ट्रांसफर कर दिया गया, जिनका सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था। बाद में इस राशि को कई बैंक खातों में घुमाकर नकद में बदला गया और आरोपियों ने इससे व्यक्तिगत लाभ उठाया। इस पूरी प्रक्रिया में हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के वित्तीय सावधानी और धोखाधड़ी रोकथाम संबंधी दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन किया गया।

प्रभावित विभाग

इस घोटाले की चपेट में आए 8 सरकारी विभाग इस प्रकार हैं — पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड। इन विभागों की सार्वजनिक सेवाओं और कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित धनराशि को कथित तौर पर निजी लाभ के लिए हड़पा गया।

आरोपों की गंभीरता

आरोपियों पर लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करना, जालसाजी, नकली दस्तावेजों को वास्तविक बताकर उपयोग करना, खातों में हेरफेर, आपराधिक विश्वासघात, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध के लिए उकसाना, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार शामिल हैं।

जाँच की वर्तमान स्थिति

CBI ने यह जाँच हरियाणा सरकार के अनुरोध पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। अब तक CBI ने 54 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया है, जिसमें लगभग ₹20 करोड़ मूल्य का सोना सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य ज़ब्त किए गए हैं। इस मामले में अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह मामला हरियाणा के प्रशासनिक ढाँचे में वित्तीय अनुशासन की गंभीर खामियों को उजागर करता है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नौकरशाही की संस्थागत विफलता का मामला है। सवाल यह है कि ₹504 करोड़ अधिकृत बैंकों से बाहर कैसे गए, जबकि वित्त विभाग के स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद थे — और इन दिशानिर्देशों की निगरानी करने वाले अधिकारी खुद आरोपी हैं। यह मामला यह भी दर्शाता है कि राज्य सतर्कता ब्यूरो ने जाँच CBI को क्यों सौंपी — स्थानीय जाँच तंत्र की सीमाएँ स्पष्ट थीं। अब असली परीक्षा अदालत में होगी, जहाँ यह देखना होगा कि क्या आरोपों की यह लंबी सूची दोषसिद्धि में बदल पाती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा IDFC फंड घोटाला क्या है?
यह हरियाणा सरकार के 8 विभागों के ₹504 करोड़ की सरकारी राशि के कथित गबन का मामला है। आरोप है कि सरकारी अधिकारियों ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर फंड को अनधिकृत खातों में स्थानांतरित कर नकद में बदल लिया।
CBI की तीसरी चार्जशीट में कौन-कौन शामिल हैं?
तीसरी चार्जशीट में 19 आरोपी हैं — हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी, IDFC फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारी, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का 1 अधिकारी और हरियाणा राज्य सरकार के 9 अन्य अधिकारी। अब तक इस मामले में कुल 37 लोग आरोपी बन चुके हैं।
इस घोटाले में कितने विभाग प्रभावित हुए हैं?
हरियाणा सरकार के 8 विभाग प्रभावित हुए हैं — पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, श्रम कल्याण बोर्ड, कृषि विपणन बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड।
CBI ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
CBI ने 54 स्थानों पर तलाशी ली है और लगभग ₹20 करोड़ मूल्य का सोना सहित कई अहम साक्ष्य ज़ब्त किए हैं। अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और तीन चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं।
CBI ने यह जाँच कैसे अपने हाथ में ली?
CBI ने यह जाँच हरियाणा सरकार के अनुरोध पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो से अपने हाथ में ली। मामले की संवेदनशीलता और वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी को जाँच सौंपी गई।
राष्ट्र प्रेस
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