हरियाणा ₹504 करोड़ घोटाला: सीबीआई की तीसरी चार्जशीट, 6 IAS समेत 19 नए आरोपी नामजद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 2 सितंबर 2026 को पंचकूला स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत में हरियाणा सरकार के ₹504 करोड़ के धन-गबन मामले में अपनी तीसरी चार्जशीट दाखिल की। इस नवीनतम चार्जशीट में 19 नए आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी भी शामिल हैं। इस मामले में अब तक चार्जशीट किए गए आरोपियों की कुल संख्या 37 हो गई है।
नई चार्जशीट में कौन-कौन नामजद
तीसरी चार्जशीट में हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी, IDFC फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारी, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का 1 अधिकारी और राज्य सरकार के 9 अन्य अधिकारी शामिल हैं। सीबीआई के अनुसार इन सभी पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करना, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, खातों में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले सीबीआई इस मामले में 18 अन्य आरोपियों के विरुद्ध दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियाँ शामिल थीं।
घोटाले का तरीका: कैसे हुई धोखाधड़ी
सीबीआई की जाँच में सामने आया कि सरकारी अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर सुनियोजित ढंग से यह घोटाला अंजाम दिया। राज्य सरकार के 8 विभागों के धन को अधिकृत बैंकों से निकालकर IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की कुछ शाखाओं में खोले गए खातों में स्थानांतरित किया गया।
इस प्रक्रिया में राज्य वित्त विभाग के वित्तीय अनुशासन और धोखाधड़ी-रोधी दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। इन खातों से धन ऐसे तीसरे पक्षों के खातों में भेजा गया जिनका सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था। बाद में इस रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर नकद में बदला गया, जिससे आरोपियों ने कथित तौर पर अवैध आर्थिक लाभ उठाया।
प्रभावित विभाग और संस्थाएँ
इस घोटाले की चपेट में आए विभागों और संस्थाओं में पंचायत विभाग, पंचकूला नगर निगम, कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड शामिल हैं।
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि इसमें जन-कल्याण से जुड़े विभाग — शिक्षा, श्रम, कृषि और बिजली — सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
जाँच की स्थिति और अब तक की कार्रवाई
सीबीआई ने यह जाँच हरियाणा सरकार के अनुरोध पर राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। अब तक जाँच एजेंसी 54 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है और इस क्रम में लगभग ₹20 करोड़ मूल्य का सोना भी बरामद किया गया है। इस मामले में अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त, सीबीआई ने चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य संबद्ध मामलों की जाँच भी अपने हाथ में ली है — एक चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से संबंधित और दूसरा नगर निगम चंडीगढ़ तथा चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी से जुड़ा। इन दोनों मामलों में भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
आगे क्या होगा
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि तीनों मामलों में अन्य संदिग्धों और आरोपियों के खिलाफ जाँच जारी रहेगी। विशेष अदालत अब आरोपियों के विरुद्ध सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। यह मामला हरियाणा में सरकारी धन की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।