सीबीआई ने एचएसपीसीबी के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर को गिरफ्तार किया, ₹504 करोड़ के बैंक घोटाले में 25वीं गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर परवीन कुमार को गुरुवार, 2 जुलाई को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में बोर्ड के खाते से सरकारी धन के गबन के मामले में की गई है। इस मामले में अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
जांच के दौरान सामने आया कि परवीन कुमार ने विभागीय जानकारी या अनुमति के बिना एक बैंक खाता चुपके से खुलवाया था, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड विभाग में मौजूद नहीं था। इस खाते में एक ऐसे दूसरे आरोपी का मोबाइल नंबर दर्ज किया गया था जो विभाग का कर्मचारी नहीं था — ताकि धोखाधड़ी वाले लेन-देन की भनक न लगे। चेक और डेबिट नोट के माध्यम से निकाली गई रकम को शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) में स्थानांतरित किया गया, जिन्हें आरोपियों द्वारा ही नियंत्रित किया जाता था।
घोटाले का व्यापक दायरा
सीबीआई के अनुसार, एचएसपीसीबी में हुई यह धोखाधड़ी एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। इस घोटाले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों के ₹504 करोड़ के सरकारी फंड को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और नकली डेबिट नोट के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में भेजा गया। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी बैंकिंग प्रणाली में आंतरिक नियंत्रण की खामियों पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
गिरफ्तारियों का ब्यौरा
परवीन कुमार की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में हरियाणा सरकार के गिरफ्तार सरकारी कर्मचारियों की संख्या चार हो गई है। इससे पहले सीबीआई एचएसपीसीबी के दो अन्य अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। कुल मिलाकर अब तक 25 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
चार्जशीट की स्थिति
सीबीआई अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 सरकारी कर्मचारी, 2 कंपनियाँ और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला न केवल सरकारी विभागों की आंतरिक निगरानी में चूक को उजागर करता है, बल्कि बैंकिंग तंत्र में भी गंभीर कमज़ोरियों की ओर इशारा करता है।
आगे की जांच
सीबीआई के अनुसार जांच अभी जारी है और सबूतों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियाँ संभव हैं। एजेंसी शेल कंपनियों के नेटवर्क और धन के अंतिम गंतव्य की पड़ताल कर रही है।