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सीबीआई ने एचएसपीसीबी के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर को गिरफ्तार किया, ₹504 करोड़ के बैंक घोटाले में 25वीं गिरफ्तारी

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सीबीआई ने एचएसपीसीबी के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर को गिरफ्तार किया, ₹504 करोड़ के बैंक घोटाले में 25वीं गिरफ्तारी

सारांश

हरियाणा के ₹504 करोड़ के बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। एचएसपीसीबी के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर की गिरफ्तारी के साथ कुल 25 आरोपी पकड़े जा चुके हैं — और 8 सरकारी विभागों के फंड शेल कंपनियों में भेजे जाने की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने एचएसपीसीबी के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर परवीन कुमार को 2 जुलाई को गिरफ्तार किया।
इस मामले में अब तक कुल 25 लोग गिरफ्तार, जिनमें 4 हरियाणा सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
₹504 करोड़ के सरकारी फंड को हरियाणा के 8 विभागों के खातों से फर्जी FD और डेबिट नोट के जरिए निकाला गया।
निकाली गई रकम शेल कंपनियों में स्थानांतरित की गई, जिन्हें आरोपियों द्वारा नियंत्रित किया जाता था।
सीबीआई अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें 6 बैंक अधिकारी भी शामिल हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर परवीन कुमार को गुरुवार, 2 जुलाई को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में बोर्ड के खाते से सरकारी धन के गबन के मामले में की गई है। इस मामले में अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

जांच के दौरान सामने आया कि परवीन कुमार ने विभागीय जानकारी या अनुमति के बिना एक बैंक खाता चुपके से खुलवाया था, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड विभाग में मौजूद नहीं था। इस खाते में एक ऐसे दूसरे आरोपी का मोबाइल नंबर दर्ज किया गया था जो विभाग का कर्मचारी नहीं था — ताकि धोखाधड़ी वाले लेन-देन की भनक न लगे। चेक और डेबिट नोट के माध्यम से निकाली गई रकम को शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) में स्थानांतरित किया गया, जिन्हें आरोपियों द्वारा ही नियंत्रित किया जाता था।

घोटाले का व्यापक दायरा

सीबीआई के अनुसार, एचएसपीसीबी में हुई यह धोखाधड़ी एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। इस घोटाले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों के ₹504 करोड़ के सरकारी फंड को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और नकली डेबिट नोट के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में भेजा गया। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी बैंकिंग प्रणाली में आंतरिक नियंत्रण की खामियों पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

गिरफ्तारियों का ब्यौरा

परवीन कुमार की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में हरियाणा सरकार के गिरफ्तार सरकारी कर्मचारियों की संख्या चार हो गई है। इससे पहले सीबीआई एचएसपीसीबी के दो अन्य अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। कुल मिलाकर अब तक 25 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

चार्जशीट की स्थिति

सीबीआई अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 सरकारी कर्मचारी, 2 कंपनियाँ और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला न केवल सरकारी विभागों की आंतरिक निगरानी में चूक को उजागर करता है, बल्कि बैंकिंग तंत्र में भी गंभीर कमज़ोरियों की ओर इशारा करता है।

आगे की जांच

सीबीआई के अनुसार जांच अभी जारी है और सबूतों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियाँ संभव हैं। एजेंसी शेल कंपनियों के नेटवर्क और धन के अंतिम गंतव्य की पड़ताल कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दो बैंकों और शेल कंपनियों के जटिल नेटवर्क की मिलीभगत का संकेत है। सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी FD और डेबिट नोट वर्षों तक आंतरिक ऑडिट की नज़र से कैसे बचते रहे। बैंक अधिकारियों का चार्जशीट में नाम होना बताता है कि यह चूक नहीं, साँठगाँठ थी। जब तक सरकारी खातों की रियल-टाइम निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट को अनिवार्य नहीं बनाया जाता, ऐसे घोटाले दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड घोटाला क्या है?
यह ₹504 करोड़ का बैंकिंग घोटाला है जिसमें हरियाणा सरकार के 8 विभागों के सरकारी फंड को चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा से फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और नकली डेबिट नोट के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में भेजा गया। इस मामले में सीबीआई जांच कर रही है और अब तक 25 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
परवीन कुमार की इस घोटाले में क्या भूमिका थी?
परवीन कुमार एचएसपीसीबी के तत्कालीन सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर थे। जांच के अनुसार उन्होंने विभागीय अनुमति के बिना एक बैंक खाता गुपचुप तरीके से खुलवाया और धोखाधड़ी वाले लेन-देन को अंजाम देने के लिए उसका इस्तेमाल किया। खाते में एक बाहरी व्यक्ति का मोबाइल नंबर दर्ज था ताकि लेन-देन की जानकारी छुपाई जा सके।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
2 जुलाई 2025 तक इस मामले में कुल 25 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें हरियाणा सरकार के 4 कर्मचारी, बैंक अधिकारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई ने 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।
क्या बैंक अधिकारी भी इस घोटाले में शामिल हैं?
हाँ, सीबीआई की चार्जशीट में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी नामज़द हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह घोटाला केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि बैंकिंग तंत्र के भीतर से भी सहयोग मिला।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सीबीआई की जांच अभी जारी है और शेल कंपनियों के नेटवर्क व धन के अंतिम गंतव्य की पड़ताल की जा रही है। सबूतों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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