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गीतिका जाखड़: अर्जुन अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में जीते मेडल

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गीतिका जाखड़: अर्जुन अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में जीते मेडल

सारांश

हिसार के अग्रोहा गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय अखाड़े तक — गीतिका जाखड़ ने 2006 में अर्जुन पुरस्कार पाकर इतिहास रचा और भारतीय महिला कुश्ती को एक नई पहचान दी। कॉमनवेल्थ से एशियाई खेलों तक, उनकी यात्रा प्रेरणा की मिसाल है।

मुख्य बातें

गीतिका जाखड़ का जन्म 18 अगस्त 1985 को हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा गाँव में हुआ।
मात्र 15 वर्ष की आयु में भारत केसरी खिताब जीता और अगले 9 वर्षों तक लगातार यह खिताब अपने नाम किया।
2006 में भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित — यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान ।
2003 और 2005 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण; 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक।
एशियाई खेलों में 2006 में रजत और 2014 में कांस्य पदक।
2019 में हरियाणा पुलिस DSP के रूप में विश्व कुश्ती खेल (पुलिस) में 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक।

गीतिका जाखड़ भारत की उन विरल महिला पहलवानों में शुमार हैं, जिन्होंने कुश्ती को परिवार की विरासत से उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा बुलंद किया। मात्र 13 वर्ष की आयु में अखाड़े में उतरने वाली गीतिका ने कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक के बाद एक उपलब्धियाँ दर्ज कीं। 2006 में वह अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं — एक ऐसा कीर्तिमान जो उनकी असाधारण यात्रा को परिभाषित करता है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

गीतिका जाखड़ का जन्म 18 अगस्त 1985 को हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा गाँव में हुआ। उनके परिवार में खेल की गहरी जड़ें थीं — उनके दादा स्वयं पहलवान रहे और पिता एक स्पोर्ट्स अधिकारी थे। इस माहौल ने गीतिका में बचपन से ही कुश्ती के प्रति गहरा अनुराग पैदा किया।

मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने प्रतिष्ठित भारत केसरी खिताब जीता और अगले 9 वर्षों तक लगातार इस ख़िताब पर अपना दबदबा बनाए रखा — यह निरंतरता भारतीय कुश्ती में दुर्लभ है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपलब्धियाँ

2003 और 2005 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गीतिका ने स्वर्ण पदक जीते। 2007 में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। एशियाई खेलों में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा — 2006 में रजत और 2014 में कांस्य पदक उनके नाम रहे।

2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में गीतिका ने एक बार फिर रजत पदक जीतकर अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता साबित की। 2019 में हरियाणा पुलिस में डीएसपी पद पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने विश्व कुश्ती खेल (पुलिस) में 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता — यह दर्शाता है कि सेवा और खेल उनके लिए समानांतर चलते रहे।

राष्ट्रीय स्तर पर वर्चस्व

2007 में गीतिका ने नेशनल गेम्स और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप दोनों में स्वर्ण पदक जीते। 2011 में वह नेशनल चैंपियनशिप जीतने वाली सबसे कम उम्र की पहलवान बनीं। राष्ट्रीय खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें भीम पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।

पुरस्कार और सम्मान

गीतिका की सबसे बड़ी उपलब्धि 2006 में भारत सरकार द्वारा प्रदत्त अर्जुन पुरस्कार है। वह यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं — कुश्ती के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण। 2009 में उन्हें कल्पना चावला उत्कृष्टता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

यह ऐसे समय में आया जब महिला कुश्ती को मुख्यधारा की पहचान मिलना अभी शुरू ही हुई थी। गौरतलब है कि गीतिका की यात्रा ने उन पहलवानों की पीढ़ी को प्रेरित किया जो बाद में ओलंपिक तक पहुँचीं।

विरासत और आगे की राह

हरियाणा के एक छोटे से गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक और फिर पुलिस सेवा में उच्च पद तक — गीतिका जाखड़ की कहानी भारतीय महिला खेल की उस पीढ़ी का प्रतीक है जिसने बिना किसी बड़े ढाँचे के अपनी जगह बनाई। उनका करियर भविष्य की पहलवानों के लिए एक जीवंत मानदंड बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न मीडिया का वह ध्यान जो आज मिलता है — फिर भी उन्होंने एक दशक से अधिक तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्चस्व बनाए रखा। अर्जुन पुरस्कार में उनका नाम पहली महिला पहलवान के रूप में दर्ज होना महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पूरी पीढ़ी की मान्यता थी जिसने ग्रामीण हरियाणा के अखाड़ों में बिना सुर्खियों के पसीना बहाया। यह सवाल उठता है कि जब ऐसी खिलाड़ियाँ सेवानिवृत्ति के बाद कोचिंग या खेल प्रशासन में नहीं आतीं, तो उनका अनुभव अगली पीढ़ी तक कितना पहुँच पाता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीतिका जाखड़ कौन हैं और वह क्यों प्रसिद्ध हैं?
गीतिका जाखड़ हरियाणा की एक अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान हैं, जो 2006 में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। उन्होंने कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते हैं।
गीतिका जाखड़ को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
गीतिका जाखड़ को भारत सरकार ने 2006 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं, जो भारतीय कुश्ती इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
गीतिका जाखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कौन-कौन से पदक जीते?
गीतिका जाखड़ ने 2003 और 2005 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते। 2007 में उन्होंने रजत पदक हासिल किया और 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक अपने नाम किया।
गीतिका जाखड़ ने भारत केसरी खिताब कितनी बार जीता?
गीतिका जाखड़ ने 15 वर्ष की आयु में पहली बार भारत केसरी खिताब जीता और उसके बाद लगातार 9 वर्षों तक इस खिताब को अपने नाम किया। यह निरंतरता भारतीय महिला कुश्ती में असाधारण मानी जाती है।
गीतिका जाखड़ वर्तमान में क्या करती हैं?
2019 में गीतिका जाखड़ हरियाणा पुलिस में डीएसपी पद पर कार्यरत थीं और उसी दौरान उन्होंने विश्व कुश्ती खेल (पुलिस) में 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। वह खेल और सेवा दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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