10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उदय चंद: विश्व कुश्ती चैंपियनशिप जीतने वाले आज़ाद भारत के पहले पहलवान, 13 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उदय चंद: विश्व कुश्ती चैंपियनशिप जीतने वाले आज़ाद भारत के पहले पहलवान, 13 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन

सारांश

उदय चंद सिर्फ एक पहलवान नहीं थे — वे आज़ाद भारत की कुश्ती पहचान के पहले वैश्विक प्रतीक थे। 1961 में जापान में विश्व खिताब, 13 साल का अटूट राष्ट्रीय चैंपियनशिप रिकॉर्ड और अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले पहलवान — उनकी विरासत आज भी भारतीय कुश्ती की रीढ़ है।

मुख्य बातें

उदय चंद आज़ाद भारत के पहले पहलवान थे जिन्होंने 1961 में जापान में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का खिताब जीता।
वे 1958 से 1970 तक लगातार 13 वर्षों तक राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन रहे — यह रिकॉर्ड आज तक अटूट है।
1962 के एशियाई खेलों में दो रजत पदक , 1966 में कांस्य पदक और 1970 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
कुश्ती में अर्जुन पुरस्कार ( 1961 ) पाने वाले भारत के पहले पहलवान बने।
भारतीय सेना में 1953–1970 तक सूबेदार पद पर सेवारत रहे; बाद में 1970–1995 तक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कुश्ती प्रशिक्षक रहे।

उदय चंद — यह नाम भारतीय कुश्ती के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। 1961 में जापान में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का खिताब जीतकर उदय चंद आज़ाद भारत के पहले पहलवान बने जिन्होंने यह गौरव हासिल किया। इससे भी बड़ी उपलब्धि यह रही कि वे 1958 से 1970 तक लगातार 13 वर्षों तक राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन रहे — एक ऐसा रिकॉर्ड जिसे आज तक कोई पहलवान नहीं तोड़ सका।

प्रारंभिक जीवन और कुश्ती की शुरुआत

उदय चंद का जन्म 25 जून 1935 को हरियाणा के हिसार जिले (वर्तमान फतेहाबाद) के जांडली गाँव में हुआ। उनके बड़े भाई हरिराम भी एक कुशल पहलवान थे, और उदय ने उन्हीं के साथ अखाड़े में कुश्ती की बारीकियाँ सीखीं। अपने पैने दाँव-पेंच और अटूट शारीरिक बल के बूते उन्होंने शीघ्र ही कुश्ती जगत में अपनी पहचान बनानी शुरू की।

ऐतिहासिक विश्व चैंपियनशिप खिताब

1961 में जापान में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उदय चंद ने इतिहास रचा। स्वतंत्र भारत के लिए यह पहली बार था जब किसी पहलवान ने यह सर्वोच्च खिताब अपने नाम किया। उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में उनके भाई हरिराम ने भी भाग लिया था। यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि नवस्वतंत्र भारत की कुश्ती शक्ति का वैश्विक मंच पर पहला बड़ा ऐलान थी।

एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल में पदक

1962 के एशियाई खेलों में उदय चंद ने दो रजत पदक जीतकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण दिया। इसके बाद 1966 के एशियाई खेलों में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। 1970 में उनका स्वर्ण पदक जीतने का सपना भी साकार हुआ, जब उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

अर्जुन पुरस्कार और सेना में सेवा

भारत सरकार ने उनकी उपलब्धियों को 1961 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया — और उदय चंद कुश्ती में यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले देश के पहले पहलवान बने। खेल के साथ-साथ उन्होंने भारतीय सेना में भी सेवाएँ दीं। वे 1953 से 1970 तक सूबेदार के पद पर कार्यरत रहे।

कोचिंग विरासत और भविष्य की पीढ़ी

मैदान से संन्यास लेने के बाद उदय चंद ने कोचिंग के ज़रिये कुश्ती को अगली पीढ़ी तक पहुँचाया। 1970 से 1995 तक उन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कृषि विश्वविद्यालय) में बतौर प्रशिक्षक सेवाएँ दीं और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक पहलवान तैयार किए। उनकी विरासत आज भी भारतीय कुश्ती की नींव में जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना आधुनिक खेल विज्ञान के, केवल अखाड़े की मिट्टी और अदम्य संकल्प के बल पर। 13 वर्षों का राष्ट्रीय चैंपियनशिप रिकॉर्ड आज के युग में भी अटूट है, जो बताता है कि उनकी श्रेष्ठता कितनी असाधारण थी। विडंबना यह है कि ऐसी विरासत को मुख्यधारा की खेल चर्चाओं में वह स्थान नहीं मिलता जिसकी वह हकदार है। भारतीय कुश्ती को अपने इन नींव-पत्थरों को याद रखना होगा, वरना हर नई पीढ़ी बिना जड़ों के आगे बढ़ती रहेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदय चंद कौन थे और उन्हें क्यों याद किया जाता है?
उदय चंद आज़ाद भारत के पहले पहलवान थे जिन्होंने 1961 में जापान में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का खिताब जीता। इसके अलावा वे 1958 से 1970 तक लगातार 13 वर्षों तक राष्ट्रीय चैंपियन रहे, जो आज तक एक अटूट रिकॉर्ड है।
उदय चंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उदय चंद का जन्म 25 जून 1935 को हरियाणा के हिसार जिले (वर्तमान फतेहाबाद) के जांडली गाँव में हुआ था। उनके बड़े भाई हरिराम भी पहलवान थे, जिनके साथ उन्होंने कुश्ती सीखी।
उदय चंद को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
उदय चंद को 1961 में भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। वे कुश्ती के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने वाले देश के पहले पहलवान बने।
उदय चंद ने एशियाई खेलों में कौन-कौन से पदक जीते?
उदय चंद ने 1962 के एशियाई खेलों में दो रजत पदक और 1966 के एशियाई खेलों में एक कांस्य पदक जीता। इसके अलावा 1970 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया।
खेल से संन्यास के बाद उदय चंद ने क्या किया?
खेल जीवन के बाद उदय चंद ने 1970 से 1995 तक हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कुश्ती प्रशिक्षक के रूप में सेवाएँ दीं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक पहलवान तैयार किए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले