उन्मुक्त चंद: अंडर-19 वर्ल्ड कप के विजेता कप्तान, जो बने रातों-रात के सितारे लेकिन...
सारांश
Key Takeaways
- उन्मुक्त चंद ने 2012 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता।
- आईपीएल में उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
- उन्होंने अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट में खेलना शुरू किया।
- फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 3,379 रन बनाए।
- उन्मुक्त चंद की कहानी प्रेरणादायक है।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्रीय प्रेस)। उन्मुक्त चंद, जिन्होंने २०१२ में अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-१९ वर्ल्ड कप का खिताब दिलवाया, ने अपनी अद्वितीय बल्लेबाजी से एक खास पहचान बनाई। इस खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन सीनियर टीम में खेलने का अवसर नहीं मिला। इसके बाद, उन्मुक्त ने अमेरिका जाने का फैसला किया।
२६ मार्च १९९३ को दिल्ली में जन्मे उन्मुक्त चंद ने स्कूल के दिनों में ही रणजी में डेब्यू किया। उन्होंने २०१० में घरेलू क्रिकेट में अपने करियर की शुरुआत की और अपने चौथे मैच में १५१ रन की पारी खेली। केवल १८ साल और १५ दिन की उम्र में उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलने का अवसर मिला, लेकिन उस सीज़न में उन्होंने केवल २ रन बनाए।
२०१२ में, उन्मुक्त चंद को अंडर-१९ वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में भारत फाइनल में पहुँचा, जहाँ उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था। भारतीय टीम ने २२६ रनों का लक्ष्य रखा, और उन्मुक्त ने १३० गेंदों में ६ छक्कों और ७ चौकों के साथ १११ रन की नाबाद पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाया। इस टूर्नामेंट में उन्मुक्त ने सबसे अधिक रन बनाए, जिसमें उन्होंने ६ मैचों में ४९.२० की औसत से २४६ रन बनाए।
इस अद्भुत प्रदर्शन ने उन्मुक्त चंद को रातों-रात एक सुपरस्टार बना दिया। प्रशंसकों ने उनकी तुलना विराट कोहली से करना शुरू कर दिया, जिनकी कप्तानी में भारत ने २००८ में अंडर-१९ वर्ल्ड कप जीता था, लेकिन आईपीएल में उन्होंने निराश किया।
उन्मुक्त ने २०११ से २०१६ के बीच आईपीएल में ३ टीमों (दिल्ली कैपिटल्स, राजस्थान रॉयल्स, और मुंबई इंडियंस) के लिए २१ मैच खेले, जिसमें उन्होंने १५ की औसत से केवल ३०० रन ही बनाए।
हालाँकि आईपीएल में उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत निराशाजनक रहा, लेकिन उन्होंने इंडिया 'ए' टीम का नियमित हिस्सा बने रहकर २०१३ में न्यूजीलैंड 'ए' और २०१५ में बांग्लादेश 'ए' के खिलाफ जीत हासिल की। उन्होंने २०१६ में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में गुजरात के खिलाफ ५८ गेंदों में १०३ रन बनाए।
उन्मुक्त चंद ने ६७ फर्स्ट क्लास मैचों में ३१.५७ की औसत से ३,३७९ रन बनाए। इस दौरान उन्होंने ८ शतक और १६ अर्धशतक बनाए। वहीं, १२० लिस्ट-ए मैचों में उन्होंने ४१.३३ की औसत से ४,५०५ रन बनाए, जिसमें ७ शतक और ३२ अर्धशतक शामिल हैं। चंद ने अपने करियर में १०३ टी२० मैच खेले, जिसमें ३ शतक और १० अर्धशतक के साथ २,१४१ रन बनाए।
भारत की सीनियर टीम में मौका न मिलने के कारण, उन्मुक्त चंद ने २०२१ में भारतीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। इसके बाद, उन्होंने अमेरिका में खेलने का निर्णय लिया, जहाँ मेजर लीग क्रिकेट (एमएलसी) में पिछले ३ सीज़नों में १९ मैच खेलते हुए २९.३३ की औसत से ५२८ रन बनाए। इस लीग में उनके नाम ५ अर्धशतक भी हैं।