1 अक्टूबर 2026
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रामबन में NH-44 पर स्लीपर बस पलटी, 33 यात्री घायल; 9 को जम्मू GMC रेफर किया

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रामबन में NH-44 पर स्लीपर बस पलटी, 33 यात्री घायल; 9 को जम्मू GMC रेफर किया

सारांश

जम्मू-कश्मीर के रामबन में NH-44 की एक सुरंग के भीतर स्लीपर बस पलटने से 33 यात्री घायल हो गए। बस में 55 यात्री सवार थे और 9 गंभीर रूप से घायलों को जम्मू GMC भेजा गया। यह हाईवे बार-बार हादसों की वजह से सवालों के घेरे में है।

मुख्य बातें

1 अक्टूबर 2026 को रामबन ज़िले में NH-44 की सुरंग में पश्चिम बंगाल पंजीकृत स्लीपर बस पलट गई।
हादसे में 33 यात्री घायल ; बस में कुल 55 यात्री सवार थे।
9 गंभीर घायलों को जम्मू GMC अस्पताल रेफर किया गया।
पुलिस, SDRF, CRPF, सेना और सिविल टीमों ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया।
हादसे के बाद प्रभावित सुरंग में यातायात के लिए एक लेन बहाल की गई।
रामबन-बनिहाल खंड इस हाईवे का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहाँ भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएँ आम हैं।

जम्मू-कश्मीर के रामबन ज़िले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर 1 अक्टूबर 2026 को एक स्लीपर बस के पलट जाने से कम से कम 33 यात्री घायल हो गए। पश्चिम बंगाल में पंजीकृत यह बस मारूग के निकट एक सुरंग के भीतर अनियंत्रित होकर पलट गई, जबकि उस समय बस में 55 यात्री सवार थे।

हादसे का विवरण

ट्रैफिक अधिकारियों के अनुसार गुरुवार को श्रीनगर से जम्मू की ओर जा रही यह स्लीपर बस रामबन ज़िले में मारूग के पास सुरंग के अंदर पलट गई। हादसे के तुरंत बाद पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सेना और सिविल क्विक रिस्पॉन्स टीम के स्वयंसेवकों ने घटनास्थल पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

सभी 33 घायल यात्रियों को रामबन ज़िला अस्पताल ले जाया गया। इनमें से 9 यात्रियों की हालत अधिक गंभीर होने पर उन्हें आगे के उपचार के लिए जम्मू शहर स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल रेफर किया गया। हादसे के बाद प्रभावित सुरंग में यातायात के लिए एक लेन खोल दी गई।

यह हाईवे क्यों बना बार-बार हादसों की जगह

जम्मू-कश्मीर ट्रैफिक पुलिस और यातायात विशेषज्ञों की रिपोर्टों के अनुसार, NH-44 पर दुर्घटनाओं की मुख्य वजहें जटिल भौगोलिक परिस्थितियाँ, निर्माणाधीन इंफ्रास्ट्रक्चर और मानवीय चूक हैं। रामबन से बनिहाल तक का हिस्सा विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है, जहाँ बार-बार भूस्खलन, ऊपर से गिरते पत्थर और सड़क धंसने की घटनाएँ होती हैं।

यातायात विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के तहत पहाड़ियों को काटने से कुछ ढलानें अस्थिर हो गई हैं। इससे ब्लाइंड स्पॉट, तीखे मोड़ और अचानक संकरे होने वाले हिस्से बन गए हैं। भारी बारिश और अचानक बाढ़ की स्थिति में सड़क की सतह अत्यंत फिसलन भरी हो जाती है।

राहत एवं बचाव कार्य

घटनास्थल पर त्वरित बहु-एजेंसी प्रतिक्रिया की वजह से बचाव कार्य तेज़ी से पूरा हुआ। SDRF, CRPF और सेना की टुकड़ियों ने सुरंग के भीतर फँसे यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के बाद हाईवे पर यातायात आंशिक रूप से बाधित रहा, हालाँकि बाद में एक लेन बहाल कर दी गई।

आम जनता पर असर और आगे की स्थिति

यह हाईवे कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क धमनी है और प्रतिदिन हज़ारों वाहन इससे गुज़रते हैं। गौरतलब है कि हाल के महीनों में इस मार्ग पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिससे इस क्षेत्र में सड़क सुरक्षा उपायों की माँग बढ़ती जा रही है। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक चल रही सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएँ पूरी नहीं होतीं और तीखे मोड़ों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होते, तब तक इस मार्ग पर जोखिम बना रहेगा। घायलों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि NH-44 पर बढ़ते हादसों की एक और कड़ी है — और यह सवाल उठाता है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएँ सुरक्षा को बेहतर बनाने की जगह नई खतरनाक संरचनाएँ क्यों पैदा कर रही हैं। सुरंगों के भीतर दुर्घटनाएँ विशेष रूप से चिंताजनक हैं क्योंकि वहाँ बचाव की गुंजाइश सीमित होती है। बहु-एजेंसी प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन असली ज़रूरत रोकथाम की है — यानी तीखे मोड़ों पर गति नियंत्रण, रात्रि यात्रा प्रतिबंध और ड्राइवर योग्यता सत्यापन पर ठोस कार्रवाई।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामबन में NH-44 पर बस हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा 1 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के रामबन ज़िले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर मारूग के पास एक सुरंग के भीतर हुआ। श्रीनगर से जम्मू जा रही स्लीपर बस सुरंग के अंदर पलट गई।
इस हादसे में कितने लोग घायल हुए और उनका इलाज कहाँ हो रहा है?
हादसे में कम से कम 33 यात्री घायल हुए, जिन्हें रामबन ज़िला अस्पताल ले जाया गया। इनमें से 9 गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जम्मू स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल रेफर किया गया।
बस में कितने यात्री सवार थे और बचाव कार्य किसने किया?
हादसे के समय बस में 55 यात्री सवार थे। पुलिस, SDRF, CRPF, सेना और सिविल क्विक रिस्पॉन्स टीम के स्वयंसेवकों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और घायलों को अस्पताल पहुँचाया।
NH-44 पर बार-बार हादसे क्यों होते हैं?
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार, रामबन-बनिहाल खंड में भूस्खलन, गिरते पत्थर, भारी बारिश और सड़क धंसने की घटनाएँ इस मार्ग को विशेष रूप से खतरनाक बनाती हैं। सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के कारण बने ब्लाइंड स्पॉट और तीखे मोड़ भी हादसों की प्रमुख वजह हैं।
हादसे के बाद हाईवे पर यातायात की क्या स्थिति है?
हादसे के बाद प्रभावित सुरंग में यातायात आंशिक रूप से बाधित रहा। अधिकारियों ने बाद में सुरंग में एक लेन यातायात के लिए खोल दी, जिससे आवाजाही बहाल हो सकी।
राष्ट्र प्रेस
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