रामबन बस हादसा: घायल महिला की मौत, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जताया शोक
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में गुरुवार को जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर हुए बस हादसे में घायल एक महिला यात्री की शनिवार, 4 अक्टूबर 2026 को मौत हो गई। पश्चिम बंगाल में पंजीकृत यह स्लीपर बस मारूग के पास एक सुरंग के अंदर पलट गई थी, जिसमें कुल 38 यात्री घायल हुए थे। इस दुखद घटना पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।
हादसे का विवरण
अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को श्रीनगर से जम्मू जा रही पश्चिम बंगाल नंबर की एक स्लीपर बस NH-44 पर मारूग के पास एक सुरंग के भीतर अचानक पलट गई। उस समय बस में 55 यात्री सवार थे। हादसे के तत्काल बाद पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), सेना के जवानों और सिविल क्विक रिस्पॉन्स टीम के स्वयंसेवकों ने घटनास्थल पर पहुँचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
घायल यात्रियों को रामबन के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से शुरुआत में 9 गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जम्मू के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल में रेफर किया गया। बाद में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से साझा की गई जानकारी में 4 गंभीर घायलों को GMC जम्मू भेजे जाने की पुष्टि की गई, जबकि शेष घायलों का उपचार ज़िला अस्पताल में जारी है।
उपराज्यपाल और केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'रामबन में हुए बस हादसे से बहुत दुख हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई। पीड़ित परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। गंभीर रूप से घायल लोगों को जीएमसी जम्मू भेजा गया है, उनके बेहतर इलाज के लिए मैंने रामबन के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) से बात की है। उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूँ।'
केंद्रीय राज्य मंत्री और उधमपुर सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने रामबन के डीसी मोहम्मद इलियास खान से सीधे बात कर हालात की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि उनका कार्यालय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद एवं चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जा रही है।
बचाव और चिकित्सा प्रबंधन
यह हादसा NH-44 पर हुआ, जो जम्मू और कश्मीर को जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग है। इस मार्ग पर पहाड़ी इलाकों और सुरंगों में दुर्घटनाएँ पहले भी होती रही हैं। बहु-एजेंसी समन्वय के तहत घायलों को जल्द-से-जल्द अस्पताल पहुँचाया गया। GMC जम्मू में गंभीर मामलों का इलाज जारी है और राज्य प्रशासन उनकी रिकवरी पर नज़र बनाए हुए है।
आम जनता पर असर और भविष्य की चिंता
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर बड़ी संख्या में यात्री-वाहन आवाजाही होती है और सुरंगों में दुर्घटनाओं की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी मार्गों पर भारी यात्री बसों के परिचालन में सख्त निगरानी और चालक प्रशिक्षण अत्यावश्यक है। मृतका के परिजनों और शेष घायल यात्रियों को राहत देने की ज़िम्मेदारी अब ज़िला प्रशासन पर है।