गीता रानी: 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता का करियर डोपिंग विवाद के बाद थमा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वेटलिफ्टर गीता रानी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया, लेकिन 2015 में डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनका करियर कभी पटरी पर नहीं लौट सका। 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में 75+ किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली इस खिलाड़ी ने भारतीय वेटलिफ्टिंग को एक नई पहचान दी थी। फिलहाल उन्होंने आधिकारिक रूप से संन्यास की घोषणा नहीं की है।
शुरुआती जीवन और कोचिंग
गीता रानी का जन्म 16 सितंबर 1981 को संगरूर, पंजाब में हुआ था। बचपन से ही वेटलिफ्टिंग के प्रति गहरी रुचि रखने वाली गीता ने महज 13 वर्ष की उम्र में कोच सुरिंदर सिंह से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। इसी समर्पण ने उन्हें आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत
गीता ने अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा का पहला प्रदर्शन 2003 में हैदराबाद में आयोजित एफ्रो-एशियन गेम्स में किया, जहाँ उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके अगले ही वर्ष 2004 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में तीन रजत पदक अपने नाम किए, जिससे उनकी गिनती भारत की शीर्ष वेटलिफ्टरों में होने लगी।
2006 का स्वर्णिम पल
मेलबर्न में आयोजित 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में 75+ किलोग्राम भारवर्ग में गीता ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि ने उन्हें देश-विदेश में बड़ी लोकप्रियता दिलाई। इसी वर्ष भारत सरकार ने उनके शानदार योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया। यह पुरस्कार भारतीय खेल जगत का एक महत्त्वपूर्ण सम्मान माना जाता है।
2010 में निराशा
नई दिल्ली में 2010 में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता पदक जीतने से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं। गृह-मैदान पर इस निराशा के बावजूद वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सक्रिय रहीं।
डोपिंग विवाद और करियर पर असर
2015 में राष्ट्रीय खेलों के दौरान गीता रानी एक प्रतिबंधित पदार्थ के लिए डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाई गईं। इसके परिणामस्वरूप उन पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया। 2017 में यह प्रतिबंध समाप्त हुआ, परंतु इसके बाद से वह किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में नज़र नहीं आई हैं। गौरतलब है कि इस तरह के विवाद किसी भी एथलीट के करियर पर दीर्घकालिक असर डालते हैं — वापसी की राह तकनीकी प्रतिबंध हटने के बाद भी आसान नहीं होती। अभी तक उन्होंने आधिकारिक रूप से संन्यास की घोषणा नहीं की है, जिससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।