15 सितंबर 2026
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीबी एग्रो की याचिका खारिज की, महाराष्ट्र FDA नोटिस पर शाहरुख-अजय-टाइगर को राहत नहीं

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीबी एग्रो की याचिका खारिज की, महाराष्ट्र FDA नोटिस पर शाहरुख-अजय-टाइगर को राहत नहीं

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीबी एग्रो की वह याचिका ठुकरा दी जो महाराष्ट्र FDA के उन नोटिसों को चुनौती दे रही थी, जो शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के कथित सरोगेट विज्ञापन पर जारी हुए थे। अदालत ने कहा — यह मामला महाराष्ट्र में सुना जाए।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को पीबी एग्रो की याचिका क्षेत्राधिकार के अभाव में खारिज की।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि नोटिसों से जुड़े विवाद के लिए महाराष्ट्र उचित मंच है।
महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान , अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल पान मसाला के कथित सरोगेट विज्ञापन पर नोटिस जारी किए थे।
अदालत ने पाया कि पीबी एग्रो को स्वयं कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया था।
केंद्र सरकार और CCPA ने भी याचिका का विरोध करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय को उचित मंच बताया।
CCPA ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे की स्वतंत्र जाँच जारी रखे हुए है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को पीबी एग्रो — विमल इलायची की निर्माता कंपनी — द्वारा दायर वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा बॉलीवुड अभिनेताओं शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी कारण बताओ नोटिसों को चुनौती दी गई थी। ये नोटिस विमल पान मसाला के कथित अप्रत्यक्ष (सरोगेट) विज्ञापन को लेकर जारी किए गए थे।

न्यायालय का फैसला और क्षेत्राधिकार का सवाल

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यह विवाद दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। न्यायालय ने टिप्पणी की कि महाराष्ट्र FDA द्वारा जारी नोटिसों से उत्पन्न शिकायतों और आपत्तियों को उठाने के लिए महाराष्ट्र अधिक उपयुक्त मंच होगा।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह सिद्ध करने में विफल रहा कि मुकदमे का कोई महत्वपूर्ण या मुख्य भाग नई दिल्ली में उत्पन्न हुआ था। गौरतलब है कि सोमवार को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के प्रश्न पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

पीबी एग्रो के तर्क और अदालत का जवाब

पीबी एग्रो ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उसका मुख्यालय दिल्ली में है और विज्ञापन अभियान कथित तौर पर राष्ट्रीय राजधानी से ही परिकल्पित, तैयार और प्रबंधित किया गया था। कंपनी ने यह भी दावा किया कि ब्रांड एंबेसडरों को भुगतान दिल्ली से किया गया था, इसलिए दिल्ली उच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई का अधिकार रखता है।

हालाँकि, अदालत ने इन सभी आधारों को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि पीबी एग्रो को स्वयं कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था — कंपनी को न जवाब दाखिल करने, न कोई विज्ञापन हटाने, न दस्तावेज़ पेश करने और न ही महाराष्ट्र FDA के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया था।

सुनवाई में याचिकाकर्ता के अन्य तर्क

सुनवाई के दौरान पीबी एग्रो ने यह भी तर्क दिया कि नोटिस केवल अभिनेताओं को जारी किए गए थे, जबकि विज्ञापन से संबंधित किसी भी कार्रवाई से अपूरणीय क्षति कंपनी को होगी, न कि अभिनेताओं को। उसने यह भी प्रश्न उठाया कि महाराष्ट्र FDA के पास किसी विज्ञापन को रोकने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र है या नहीं।

केंद्र सरकार और CCPA का रुख

केंद्र सरकार और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पीबी एग्रो की याचिका की स्वीकार्यता का विरोध किया। उनका तर्क था कि चूँकि विवादित कार्रवाई महाराष्ट्र FDA द्वारा की गई थी, इसलिए कंपनी को बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए था।

CCPA ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे की स्वतंत्र रूप से जाँच कर रहा है, लेकिन महाराष्ट्र FDA द्वारा नोटिस जारी किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। यह बयान कारण बताओ नोटिस की वैधता को और पुख्ता करता है।

मामले की पृष्ठभूमि और आगे की राह

यह विवाद महाराष्ट्र FDA द्वारा शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल पान मसाला के कथित सरोगेट विज्ञापन के संबंध में जारी नोटिस से जुड़ा है। तीनों अभिनेता विमल इलायची के विज्ञापनों से संबद्ध रहे हैं, जिसे आलोचकों ने तंबाकू उत्पाद का परोक्ष प्रचार बताया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद पीबी एग्रो के पास बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का विकल्प बचा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अदालत ने इसे स्पष्ट रूप से नकार दिया। गौरतलब है कि भारत में सरोगेट विज्ञापन पर नकेल कसने की माँग वर्षों से उठती रही है, फिर भी बड़े ब्रांड तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर प्रतिबंधित उत्पादों का परोक्ष प्रचार करते रहे हैं। CCPA की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में नियामकीय रुख सख्त हो रहा है। अब असली परीक्षा यह होगी कि बॉम्बे उच्च न्यायालय में मामला जाए तो नोटिसों की वैधता पर क्या निर्णय होता है और क्या अभिनेताओं को जवाब देना पड़ता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीबी एग्रो की याचिका क्यों खारिज की?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पाया कि महाराष्ट्र FDA द्वारा जारी नोटिसों को चुनौती देने का उचित मंच दिल्ली नहीं, बल्कि महाराष्ट्र है। न्यायालय ने यह भी कहा कि पीबी एग्रो यह साबित नहीं कर सकी कि मुकदमे का कोई मुख्य हिस्सा नई दिल्ली में उत्पन्न हुआ था।
महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस क्यों जारी किए?
महाराष्ट्र FDA ने तीनों अभिनेताओं को विमल पान मसाला के कथित सरोगेट (अप्रत्यक्ष) विज्ञापन के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किए। तीनों विमल इलायची के विज्ञापनों से जुड़े रहे हैं, जिसे कथित तौर पर तंबाकू उत्पाद का परोक्ष प्रचार माना गया।
पीबी एग्रो अब आगे क्या कदम उठा सकती है?
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पीबी एग्रो के पास बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का विकल्प है। केंद्र सरकार और CCPA ने भी यही सुझाव दिया था, क्योंकि विवादित कार्रवाई महाराष्ट्र FDA द्वारा की गई थी।
CCPA की इस मामले में क्या भूमिका है?
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पीबी एग्रो की याचिका की स्वीकार्यता का विरोध किया और कहा कि वह इस मुद्दे की स्वतंत्र जाँच कर रहा है। CCPA ने महाराष्ट्र FDA द्वारा नोटिस जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
क्या पीबी एग्रो को भी महाराष्ट्र FDA से नोटिस मिला था?
नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र FDA ने कारण बताओ नोटिस केवल अभिनेताओं — शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ — को जारी किए थे, न कि पीबी एग्रो को। कंपनी को न जवाब दाखिल करने, न दस्तावेज़ पेश करने और न ही FDA के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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