15 सितंबर 2026
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की मेल-बैलेट अपील खारिज की, मिडटर्म चुनावों से पहले बड़ा झटका

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की मेल-बैलेट अपील खारिज की, मिडटर्म चुनावों से पहले बड़ा झटका

सारांश

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की वह अपील खारिज कर दी जो नवंबर मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले मेल-बैलेट पर नए संघीय नियम थोपना चाहती थी। नॉर्थ कैरोलिना में 3 लाख बैलेट पहले ही भेजे जा चुके थे। यह फैसला राज्य-संचालित चुनाव प्रक्रिया बनाम संघीय डाक नियंत्रण की बड़ी संवैधानिक लड़ाई का अहम पड़ाव है।

मुख्य बातें

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को ट्रंप प्रशासन की मेल-बैलेट नियम संबंधी आपातकालीन अपील खारिज की।
3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों में USPS के नए मेल-बैलेट नियम लागू नहीं होंगे।
नॉर्थ कैरोलिना में लगभग 3 लाख अनुपस्थित मतदाता बैलेट पहले ही भेजे जा चुके थे।
जस्टिस एलिटो और जस्टिस थॉमस ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई।
2024 में लगभग एक-तिहाई अमेरिकी मतदाताओं ने डाक के ज़रिए मतदान किया था।
इस फैसले से भविष्य के चुनावों के लिए नियमों की वैधता का मामला अभी भी अनसुलझा है।

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को ट्रंप प्रशासन की वह आपातकालीन अपील खारिज कर दी, जिसमें नवंबर मिडटर्म चुनावों से पहले मेल-बैलेट पर नए और व्यापक संघीय नियम लागू करने की अनुमति माँगी गई थी। कोर्ट के इस फैसले ने निचली अदालत द्वारा लगाए गए उस प्रतिबंध को बरकरार रखा जो अमेरिकी डाक सेवा (USPS) के नए नियमों पर लगाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

मार्च 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके आधार पर डाक सेवा ने अगस्त 2026 में नए नियम लागू किए। इन नियमों के तहत राज्यों को मतपत्रों के लिफाफों का नया डिज़ाइन बनाना होता, उन पर मशीन से पढ़े जा सकने वाले फीचर और प्रत्येक मतदाता के लिए अलग बारकोड लगाना अनिवार्य होता।

इसके अतिरिक्त, राज्यों को ये डिज़ाइन संघीय मंजूरी के लिए भेजने होते और मतदाताओं के नाम, पते तथा बारकोड की जानकारी एक नए डाक सेवा पोर्टल पर अपलोड करनी होती। जो डाक सामग्री इन मानकों पर खरी न उतरती, उसे अस्वीकार कर राज्य चुनाव अधिकारियों को वापस कर दिया जाता।

कोर्ट का रुख और असहमति

सुप्रीम कोर्ट ने अपने बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा, 'सरकार के लिए यह साबित करना मुश्किल है कि जिला अदालत के शुरुआती आदेश को चुनौती देने के मामले में उसकी जीत की संभावना मजबूत है।' कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन राहत के लिए आवश्यक शर्तें इस मामले में प्रतिबंध हटाने के पक्ष में नहीं हैं।

हालाँकि, जस्टिस सैमुअल एलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई। एलिटो का कहना था कि डाक सेवा के पास 'डाक वितरण को नियंत्रित करने की व्यापक शक्ति' है और नियमों को चुनौती देने वाले पक्ष यह साबित नहीं कर पाए कि एजेंसी ने अपने अधिकारों की सीमा स्पष्ट रूप से पार की है।

जस्टिस ब्रेट कैवनॉ बहुमत के साथ रहे, लेकिन उन्होंने संभावना जताई कि डाक सेवा के पास भविष्य में ऐसे नियम बनाने का वैधानिक अधिकार हो सकता है। उन्होंने लिखा कि 'कम से कम इतनी संभावना जरूर है कि अंतिम नियम डाक सेवा को कानून की ओर से दिए गए अधिकारों के दायरे में आते हों।' बावजूद इसके, उन्होंने इस साल इन्हें लागू करना 'मनमाना और अनुचित' करार दिया, क्योंकि राज्यों के पास पर्याप्त समय नहीं था।

राज्यों पर असर और ज़मीनी स्थिति

चुनाव अधिकारियों ने तर्क दिया था कि मतदान शुरू होने के इतने करीब इस तरह के बदलाव व्यावहारिक रूप से असंभव हैं। नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन पहले ही मतपत्र भेजना शुरू कर चुके थे — केवल नॉर्थ कैरोलिना में लगभग 3 लाख अनुपस्थित मतदाता बैलेट पहले ही डाक में जा चुके थे। एक दर्जन से अधिक अन्य राज्य भी सप्ताहांत तक मतपत्र भेजने की तैयारी में थे।

नॉर्थ कैरोलिना के अटॉर्नी जनरल जेफ जैक्सन ने कहा, 'मतदान शुरू हो चुका है। चुनाव के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते।' गौरतलब है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनाव अधिकारियों ने कोर्ट से इन नियमों को रोकने की माँग की थी। यूटा और मिशिगन के रिपब्लिकन अधिकारियों ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

दोनों पक्षों के तर्क

ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ये नियम संविधान के अनुरूप हैं और इनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा तथा विश्वसनीयता को मजबूत करना है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों और मतदान अधिकार संगठनों का तर्क था कि डाक सेवा चुनावों पर नियंत्रण की कोशिश कर रही है, जबकि अमेरिकी संविधान के अनुसार चुनावों का संचालन और नियमन मूलतः राज्यों की जिम्मेदारी है।

रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में लगभग एक-तिहाई अमेरिकी मतदाताओं ने डाक के जरिए मतदान किया था, जो इन नियमों की व्यापकता को रेखांकित करता है।

आगे क्या होगा

इस फैसले से यह अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है कि डाक सेवा भविष्य के चुनावों में ऐसे नियम लागू कर सकती है या नहीं। फिलहाल 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों में ये नियम लागू नहीं होंगे — इन्हीं चुनावों में यह तय होगा कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किसका नियंत्रण रहेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा भविष्य में फिर अदालतों में आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासन को कानूनी रास्ता खुला रखता है। असली सवाल यह है कि क्या 'चुनाव सुरक्षा' के नाम पर बनाए गए ये नियम वाकई धोखाधड़ी रोकते हैं, या मतदाता भागीदारी को जटिल बनाकर परोक्ष रूप से मतदान को हतोत्साहित करते हैं — एक बहस जो 2026 के बाद भी जारी रहेगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की किस अपील को खारिज किया?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की उस आपातकालीन अपील को खारिज किया जिसमें निचली अदालत के उस प्रतिबंध को हटाने की माँग थी जो अमेरिकी डाक सेवा के नए मेल-बैलेट नियमों पर लगाया गया था। इससे 3 नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनावों में ये नियम लागू नहीं हो पाएँगे।
USPS के नए मेल-बैलेट नियमों में क्या था?
इन नियमों के तहत राज्यों को मतपत्र लिफाफों का नया डिज़ाइन बनाना, मशीन-रीडेबल फीचर और प्रत्येक मतदाता के लिए अलग बारकोड लगाना, तथा मतदाताओं की जानकारी एक नए संघीय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होता। नियमों का पालन न करने वाले मतपत्र अस्वीकार कर दिए जाते।
इस फैसले का मिडटर्म चुनावों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल 3 नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनावों में ये नए संघीय नियम लागू नहीं होंगे। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण तय होगा। हालाँकि भविष्य के चुनावों के लिए नियमों की वैधता का सवाल अभी अनसुलझा है।
ट्रंप प्रशासन और विरोधी पक्ष के क्या तर्क थे?
ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ये नियम चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए संवैधानिक हैं। वहीं, डेमोक्रेटिक राज्यों और मतदान अधिकार संगठनों का तर्क था कि अमेरिकी संविधान के अनुसार चुनावों का संचालन राज्यों की जिम्मेदारी है और डाक सेवा उस पर अतिक्रमण कर रही थी।
इस फैसले से किन न्यायाधीशों ने असहमति जताई?
जस्टिस सैमुअल एलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई। एलिटो का मानना था कि डाक सेवा के पास डाक वितरण को नियंत्रित करने की व्यापक शक्ति है और नियमों को चुनौती देने वाले पक्ष एजेंसी की अधिकार-सीमा उल्लंघन को स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर पाए।
राष्ट्र प्रेस
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