फेडरल जज का ट्रंप सरकार को झटका: अमेरिकी नागरिकों की निजी जानकारी वाला डेटाबेस ब्लॉक
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका की कोलंबिया जिला अदालत की जज स्पार्कल सूकनानन ने 23 जून 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के उस संघीय डेटाबेस को अवैध घोषित कर अवरुद्ध करने का आदेश दिया, जिसमें लाखों अमेरिकी नागरिकों की गोपनीय व्यक्तिगत जानकारी संकलित की गई थी। अदालत ने पाया कि इस डेटाबेस का उपयोग कई राज्यों ने पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने के लिए किया, जो संविधान-प्रदत्त गोपनीयता और मताधिकार दोनों का उल्लंघन है।
अदालत का फैसला और मुख्य टिप्पणियाँ
जज सूकनानन ने अपने फैसले में लिखा, "फेडरल सरकार ने जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों के गोपनीयता के अधिकारों का इस प्रकार उल्लंघन किया है जिससे वोट देने जैसे मौलिक अधिकार को खतरा उत्पन्न हुआ है। जब ऐसा हो रहा हो, तो यह अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।"
जज ने यह भी कहा कि संघीय एजेंसियाँ एक कार्यकारी आदेश को लागू करने की जल्दबाजी में लाखों अमेरिकियों की निजी जानकारी — जिसमें नागरिकता से जुड़ा वह डेटा भी शामिल था जिसकी अविश्वसनीयता उन्हें पहले से ज्ञात थी — को अव्यवस्थित ढंग से एकत्रित और पुनः उपयोग में लाईं।
SAVE प्रणाली और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की पृष्ठभूमि
यह मुकदमा सितंबर 2024 में दायर किया गया था। मतदान अधिकार और गोपनीयता के पैरोकार संगठनों के एक गठबंधन — जिसका नेतृत्व 'लीग ऑफ वूमेन वोटर्स' कर रही थी — ने 'सिस्टेमैटिक एलियन वेरिफिकेशन फॉर एंटाइटलमेंट्स' (SAVE) प्रणाली में किए गए बदलावों को चुनौती दी थी। यह प्रणाली अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा संचालित है और नागरिकता तथा आव्रजन स्थिति की पुष्टि के लिए उपयोग में लाई जाती है।
गौरतलब है कि मार्च 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14248 पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता का दस्तावेज़ी प्रमाण अनिवार्य किया गया। इसी आदेश के अंतर्गत DHS और सामाजिक सुरक्षा प्रशासन समेत कई संघीय एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे राज्य और स्थानीय अधिकारियों के लिए पंजीकृत मतदाताओं की नागरिकता व आव्रजन स्थिति सत्यापित करने की प्रणाली विकसित करें।
राज्यों की भूमिका और मतदाताओं पर असर
जज सूकनानन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस डेटाबेस तक पहुँच पाने के लिए कई राज्यों ने संघीय सरकार के साथ साझेदारी की और गलत नागरिकता डेटा के आधार पर वैध अमेरिकी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाया। अदालत ने इसे दो मूलभूत संवैधानिक अधिकारों — गोपनीयता का अधिकार और मताधिकार — का प्रत्यक्ष उल्लंघन माना।
लीग ऑफ वूमेन वोटर्स की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद लीग ऑफ वूमेन वोटर्स ने एक बयान में कहा, "ट्रंप-वैंस सरकार की चुनावों में गैर-कानूनी दखल देने की कोशिश आज नाकाम हो गई, क्योंकि एक फेडरल जज ने सरकार को इस बड़े सरकारी डेटाबेस को समाप्त करने और सुलझाने का आदेश दिया।" संगठन के अनुसार, यह डेटाबेस लाखों अमेरिकियों की संवेदनशील और कानूनी रूप से संरक्षित व्यक्तिगत जानकारी को एकत्रित करता था, जिससे उन्हें बेबुनियाद जाँच और मतदाता सूची से अवैध निष्कासन का सामना करना पड़ सकता था।
आगे क्या होगा
यह फैसला ट्रंप प्रशासन की चुनाव-सुधार नीति को एक बड़ा कानूनी झटका है। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप सरकार के कई कार्यकारी आदेशों को विभिन्न संघीय अदालतों में चुनौती मिल रही है। अब सरकार के पास फैसले को उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प है, लेकिन तब तक डेटाबेस का उपयोग निलंबित रहेगा। मतदान अधिकार संगठनों ने इस फैसले को 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण जीत बताया है।