दक्षिण कोरिया में बैलेट पेपर संकट: PM किम बोले 'मताधिकार लोकतंत्र की नींव', सोल में युवाओं का प्रदर्शन जारी
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया में 3 जून 2026 को हुए स्थानीय चुनावों के दौरान सोल सहित देशभर के करीब 26 मतदान केंद्रों पर बैलेट पेपर की गंभीर कमी के कारण मतदान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा — एक ऐसी घटना जिसे दक्षिण कोरिया के चुनावी इतिहास में बेहद असामान्य माना जा रहा है। इस विवाद ने अब राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है, जिस पर प्रधानमंत्री किम मिन-सोक और राष्ट्रपति ली जे-म्युंग दोनों को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, 3 जून के स्थानीय चुनावों में 26 मतदान केंद्रों पर बैलेट पेपर की भारी कमी सामने आई, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। यह घटना दक्षिण कोरिया की चुनाव प्रणाली की तैयारी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। चुनावी इतिहास में इस तरह की चूक को अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
मंगलवार को युवा नीति से जुड़ी एक बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री किम मिन-सोक ने इस मामले पर खेद जताया। उन्होंने कहा, 'सरकार को इस तरह की समस्या के प्रति अधिक सतर्क रहना चाहिए था और तेजी से समाधान करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।' किम ने इस घटना को 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए सरकार की जवाबदेही स्वीकार की और कहा कि इससे प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
राष्ट्रपति का कड़ा रुख और जांच के आदेश
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने इस मामले को केवल प्रशासनिक चूक मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकार, यानी मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।' राष्ट्रपति ने व्यापक जांच के आदेश दिए और संसद से इस मामले की संसदीय जांच शुरू करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर एक अलग जांच टीम भी गठित की जाएगी, जिसमें पुलिस और अभियोजन अधिकारी शामिल होंगे।
युवाओं का आक्रोश और सड़क पर प्रदर्शन
घटना के बाद जनता में, विशेषकर 20 और 30 वर्ष की आयु के युवाओं में गहरी नाराजगी फैल गई है। ये युवा सोल के जामसिल इलाके में मतगणना स्थल के पास कई दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध दक्षिण कोरिया में युवा मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता का संकेत है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सरकार और चुनाव आयोग दोनों बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक आलोचना का सामना कर रहे हैं। राष्ट्रपति ली ने चुनाव आयोग को लेकर जनता के भरोसे में आई कमी पर भी चिंता व्यक्त की है। संसदीय और सरकारी — दोनों स्तरों पर जांच की तैयारी चल रही है, जिसके निष्कर्ष यह तय करेंगे कि भविष्य में ऐसी चूक को कैसे रोका जाए।