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दक्षिण कोरिया स्थानीय चुनाव: मतपत्र संकट पर संसदीय जांच की मांग, DP और PPP ने अलग-अलग प्रस्ताव दाखिल किए

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दक्षिण कोरिया स्थानीय चुनाव: मतपत्र संकट पर संसदीय जांच की मांग, DP और PPP ने अलग-अलग प्रस्ताव दाखिल किए

सारांश

दक्षिण कोरिया के स्थानीय चुनावों में सियोल के दर्जनभर मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी और सोंगपा वार्ड में विरोध प्रदर्शन के बाद सत्तारूढ़ DP और विपक्षी PPP दोनों ने संसदीय जांच के प्रस्ताव दाखिल किए — लेकिन जांच के दायरे पर दोनों में मतभेद हैं।

मुख्य बातें

सियोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर स्थानीय चुनाव के दौरान मतपत्रों की कमी दर्ज की गई।
डेमोक्रेटिक पार्टी (DP) और पीपुल पावर पार्टी (PPP) दोनों ने 8 जून 2026 को नेशनल असेंबली में अलग-अलग संसदीय जांच प्रस्ताव दाखिल किए।
PPP ने 18 सदस्यीय विशेष समिति का प्रस्ताव दिया, जो 60 दिनों तक जांच करेगी; दोनों दलों से नौ-नौ सदस्य होंगे।
DP सांसद चेओन जून-हो ने राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (NEC) पर समय पर प्रतिक्रिया न देने का आरोप लगाया।
सियोल के सोंगपा वार्ड में चुनावी धांधली के आरोपों पर विरोध प्रदर्शन हुए; पुलिस ने भीड़ तितर-बितर की।
जांच के दायरे पर सहमति के बाद प्रस्ताव नेशनल असेंबली के पूर्ण सदन में मतदान के लिए रखा जाएगा।

दक्षिण कोरिया के हालिया स्थानीय चुनावों में सियोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की गंभीर कमी सामने आई, जिसने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस विवाद के बाद सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी (DP) और मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी (PPP) दोनों ने 8 जून 2026 को नेशनल असेंबली के बिल्स विभाग में संसदीय जांच के लिए अलग-अलग प्रस्ताव दाखिल किए। दोनों दलों ने जांच की आवश्यकता पर सहमति जताई है, हालांकि जांच के दायरे को लेकर उनके बीच मतभेद बने हुए हैं।

मतपत्र संकट: क्या हुआ मतदान केंद्रों पर

चुनाव के दौरान सियोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी की सूचना मिली, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब सियोल के सोंगपा वार्ड के एक मतदान केंद्र पर चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया और मतपेटियों को मतदान के दो दिन बाद शुक्रवार को मतगणना के लिए स्थानांतरित किया गया। मतपत्र हटाने की इस प्रक्रिया के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई भी जांच के दायरे में आ गई है।

PPP का प्रस्ताव: 18 सदस्यीय विशेष समिति

पीपुल पावर पार्टी (PPP) ने 18 सदस्यीय विशेष समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है, जो 60 दिनों तक जांच की निगरानी करेगी। इस समिति में दोनों दलों से नौ-नौ सदस्य होंगे और अध्यक्षता PPP के एक सदस्य के पास रहेगी।

PPP के प्रस्ताव के अनुसार, यह समिति मतपत्रों की कमी के कारणों, मतदाताओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन और मतदान केंद्र से बैलेट बॉक्स हटाने के दौरान पुलिस की भूमिका की जांच करेगी। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने इस मामले में स्वतंत्र अभियोजन जांच के लिए एक अलग विधेयक लाने की भी योजना बनाई है।

सत्तारूढ़ DP का रुख: संरचनात्मक सुधार पर ज़ोर

डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपना अलग प्रस्ताव बाद में प्रस्तुत किया। पार्टी के सांसद चेओन जून-हो ने कहा, राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (NEC) ने पहले से मतपत्रों की कमी की संभावना जताई थी, इसके बावजूद समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे गंभीर अव्यवस्था पैदा हुई।

उन्होंने इस 'गंभीर कुप्रबंधन' को चुनाव की निष्पक्षता पर अनावश्यक संदेह का कारण बताया। सांसद जून-हो के अनुसार, संसदीय जांच का उद्देश्य निर्वाचन आयोग की संरचनात्मक समस्याओं और सभी स्तरों पर चुनाव आयोगों की कमियों की पड़ताल करना तथा सुधार उपाय सुझाना होगा, ताकि मतदान अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हों और जनता का भरोसा बहाल किया जा सके।

आगे की राह: बातचीत और पूर्ण सदन में मतदान

दोनों दलों ने स्वीकार किया है कि जांच के विवरण पर सहमति बनाने के लिए आपसी बातचीत जारी रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया में चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पहले से ही बहस के केंद्र में है।

बातचीत के बाद प्रस्ताव को नेशनल असेंबली के पूर्ण सदन में मतदान के लिए रखा जाएगा। गौरतलब है कि जांच के दायरे पर दोनों दलों के बीच मतभेद बने रहने से प्रक्रिया में देरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी एक दल की राजनीति से परे है। असली सवाल यह है कि क्या संसदीय जांच NEC में संरचनात्मक सुधार की ओर ले जाएगी, या यह महज़ एक राजनीतिक मंच बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया के स्थानीय चुनावों में मतपत्र संकट क्या था?
स्थानीय चुनावों के दौरान सियोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी हो गई, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। सोंगपा वार्ड के एक केंद्र पर चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए।
PPP की प्रस्तावित संसदीय जांच समिति कैसी होगी?
PPP ने 18 सदस्यीय विशेष समिति का प्रस्ताव दिया है, जिसमें दोनों दलों से नौ-नौ सदस्य होंगे और अध्यक्षता PPP के पास रहेगी। यह समिति 60 दिनों तक मतपत्र कमी के कारणों, मतदाता अधिकारों के उल्लंघन और पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग पर क्या आरोप लगाए?
DP सांसद चेओन जून-हो ने कहा कि NEC ने पहले से मतपत्रों की कमी की संभावना जताई थी, लेकिन समय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने इसे 'गंभीर कुप्रबंधन' बताया जिसने चुनाव की निष्पक्षता पर अनावश्यक संदेह पैदा किया।
दोनों दलों के बीच जांच के दायरे पर मतभेद क्यों हैं?
DP संरचनात्मक सुधारों और NEC की प्रशासनिक कमियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है, जबकि PPP मतपत्र हटाने के दौरान पुलिस कार्रवाई और स्वतंत्र अभियोजन जांच को भी दायरे में शामिल करना चाहती है। इस अंतर के कारण दोनों ने अलग-अलग प्रस्ताव दाखिल किए।
इस मामले में आगे क्या होगा?
दोनों दलों के बीच जांच के विवरण पर बातचीत जारी रहने की संभावना है। सहमति बनने के बाद प्रस्ताव को नेशनल असेंबली के पूर्ण सदन में मतदान के लिए रखा जाएगा। PPP एक अलग स्वतंत्र अभियोजन जांच विधेयक भी लाने की योजना बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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