दक्षिण कोरिया: सोल में चुनावी धांधली के खिलाफ तीसरे दिन भी हजारों सड़कों पर, दोबारा चुनाव की माँग तेज
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल के सोंगपा जिले में एसके ओलंपिक हैंडबॉल जिम्नेजियम के बाहर रविवार, 7 जून को लगातार तीसरे दिन हजारों प्रदर्शनकारी जमा रहे। उनका आरोप है कि पिछले सप्ताह संपन्न हुए स्थानीय चुनावों में व्यापक धांधली हुई है और वे दोबारा चुनाव कराने की माँग कर रहे हैं। पुलिस के अनौपचारिक अनुमान के अनुसार रविवार दोपहर तक वहाँ करीब 3,000 प्रदर्शनकारी मौजूद थे, जबकि एक दिन पहले शनिवार को यह संख्या लगभग 30,000 तक पहुँच गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी परिसर के सभी आठ प्रवेश द्वारों पर डटे हुए हैं और अंदर रखी मतपेटियों पर नजर बनाए हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अंदर फंसे 20 से 30 चुनाव अधिकारी शनिवार तड़के वहाँ से निकलने में सफल रहे, हालाँकि राष्ट्रीय चुनाव आयोग (NEC) ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि करने से इनकार किया है।
विवाद की जड़ बुधवार को सामने आई, जब सोल के 12 से अधिक मतदान केंद्रों — जिनमें सोंगपा और गंगनम के केंद्र भी शामिल थे — पर बैलेट पेपर की कमी की खबरें आईं। इसके चलते कुछ समय के लिए मतदान रोकना पड़ा और कथित तौर पर कुछ मतदाता वोट डाले बिना ही लौट गए।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
इस विवाद के बाद राष्ट्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष रोह ताए-अक और महासचिव हेओ चेओल-हून ने शुक्रवार को अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। गौरतलब है कि यह कदम तब उठाया गया जब जनता का दबाव और विपक्ष की माँगें दोनों एक साथ तेज हो रही थीं।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने पिछले सप्ताह चुनाव आयोग की दुर्लभ आलोचना करते हुए इस घटना पर गहरा खेद जताया था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे समस्या की असली वजह पता लगाएँ और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करें।
विपक्ष की माँग और राजनीतिक दबाव
मुख्य विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी (PPP) ने भी दोबारा चुनाव की माँग को और तेज कर दिया है। PPP नेता जांग डोंग-ह्योक ने नेशनल असेंबली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, 'जब जनता दोबारा चुनाव की माँग कर रही है, तब सिर्फ संसदीय जाँच, सत्ताधारी दल की सिफारिश पर विशेष जाँच, या चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों को बदल देने से लोगों का बढ़ता गुस्सा शांत नहीं होगा।'
जांग ने इन प्रदर्शनों को 'शांतिपूर्ण नागरिक प्रतिरोध आंदोलन' करार दिया और राष्ट्रपति ली से तत्काल मुलाकात की माँग की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि राष्ट्रपति इस मुद्दे का समाधान किए बिना अपनी निर्धारित यूरोप यात्रा पर निकल गए, तो जन-विरोध और तीव्र हो सकता है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया की राजनीति पहले से ही उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। PPP ने राष्ट्रपति ली के साथ सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि यदि जल्द कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकला, तो प्रदर्शनों का दायरा और बढ़ सकता है।