दक्षिण कोरिया स्थानीय चुनाव 2026: 1,971 मतदान केंद्रों पर वोटर आंकड़ों में विसंगति, जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के 3 जून 2026 को हुए स्थानीय चुनावों में मतदाता संख्या को लेकर एक नई और गंभीर विसंगति सामने आई है। राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (NEC) के आंकड़ों के अनुसार, 3,558 मतदान क्षेत्रों में से 1,971 क्षेत्रों में मतदान समाप्ति के समय दर्ज मतदाता संख्या और बाद में जारी अंतिम आंकड़ों के बीच उल्लेखनीय फर्क पाया गया है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब देश की चुनावी प्रक्रिया पहले से ही कई कथित अनियमितताओं की जांच के घेरे में है।
मुख्य विसंगतियां
रिपोर्टों के अनुसार, 29 मतदान क्षेत्रों में यह अंतर 100 या उससे अधिक मतदाताओं का रहा। कुछ मामले विशेष रूप से चौंकाने वाले हैं। सोल के दक्षिण में स्थित आनसॉन्ग के एक मतदान केंद्र पर शाम 6 बजे मतदान समाप्ति के वक्त 2,105 मतदाता दर्ज थे, लेकिन अंतिम आंकड़ा घटकर 1,494 रह गया — यानी 611 मतदाताओं की कमी। इसके विपरीत, बुसान के एक केंद्र पर शाम 6 बजे 7,137 मतदाता दर्ज थे, जो अंतिम गणना में बढ़कर 7,922 हो गए — यानी 785 मतदाताओं की वृद्धि।
जांच एजेंसियों की पड़ताल
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। एक संयुक्त अभियोजन-पुलिस जांच दल पहले से चुनाव के दिन मतपत्रों की कमी से जुड़े मामले की पड़ताल कर रहा था। अब इस दल के दायरे में वोटर संख्या की विसंगतियां भी आ गई हैं। जांच के दौरान यह आरोप भी उभरे हैं कि NEC के कुछ अधिकारियों ने मतदान प्रतिशत के प्रति घंटे जारी होने वाले आंकड़ों में कथित तौर पर बदलाव किया था।
निर्वाचन आयोग का पक्ष
राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण दिया है। आयोग के अनुसार, मतदान के दौरान हर घंटे जारी किए जाने वाले आंकड़े प्रारंभिक प्रकृति के होते हैं। मतदान समाप्त होने के बाद सत्यापन, दोबारा गिनती और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते अंतिम आंकड़ों में अंतर आना स्वाभाविक हो सकता है। आयोग ने यह भी कहा कि केवल संख्यात्मक अंतर को चुनावी धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया में यह पहली बार नहीं है जब चुनावी आंकड़ों को लेकर विवाद उठा हो। जून 2026 के स्थानीय चुनावों के तुरंत बाद मतपत्रों की संख्या में कमी को लेकर भी विवाद सामने आया था, जिसकी जांच अभी भी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया की राजनीतिक परिदृश्य पहले से ही संस्थागत विश्वसनीयता की परीक्षा से गुजर रही है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि असली सवाल यह है कि आंकड़ों में यह बदलाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या किसी स्तर पर जानबूझकर हस्तक्षेप हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट का इंतजार अब पूरे देश को है, क्योंकि इसके निष्कर्ष NEC की विश्वसनीयता और दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के भरोसे को सीधे प्रभावित करेंगे।