10 अगस्त 2026
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दक्षिण कोरिया मतपत्र संकट: संसदीय जांच समिति की पहली सुनवाई, 43 गवाह तलब

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दक्षिण कोरिया मतपत्र संकट: संसदीय जांच समिति की पहली सुनवाई, 43 गवाह तलब

सारांश

दक्षिण कोरिया में 3 जून के स्थानीय चुनावों के दौरान सोल के दर्जनभर से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्र खत्म होने का मामला अब संसद तक पहुँच गया है। 18 सदस्यीय विशेष समिति ने पहली सुनवाई में 43 गवाह तलब किए हैं और जुलाई तक चार और सुनवाइयाँ निर्धारित हैं — चुनावी विश्वसनीयता पर यह दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी संस्थागत परीक्षा है।

मुख्य बातें

18 सदस्यीय विशेष संसदीय जांच समिति ने 23 जून 2026 को अपनी पहली सुनवाई आयोजित की।
जांच 3 जून के स्थानीय चुनावों के दौरान सोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी से जुड़ी है।
पूर्व एनईसी अध्यक्ष रोह ताए-आक ने जिम्मेदारी स्वीकार की; कार्यवाहक अध्यक्ष वी चुल-ह्वान ने माफी माँगी लेकिन इस्तीफे से इनकार किया।
समिति ने 43 गवाह तलब किए, जिनमें एनईसी के 27 वर्तमान और पूर्व अधिकारी शामिल हैं।
संयुक्त पुलिस-अभियोजन टीम देशभर के 26 मतदान केंद्रों की जांच कर रही है; 8 अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया।
अगली सुनवाइयाँ 1 जुलाई, 8 जुलाई, 14 जुलाई और 22 जुलाई को निर्धारित हैं।

दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में 3 जून 2026 के स्थानीय चुनावों के दौरान एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी के मामले में गठित 18 सदस्यीय विशेष संसदीय जांच समिति ने मंगलवार, 23 जून को अपनी पहली औपचारिक सुनवाई आयोजित की। इस सुनवाई में नेशनल इलेक्शन कमीशन (एनईसी) के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की प्रक्रिया शुरू हुई।

मुख्य घटनाक्रम

नेशनल इलेक्शन कमीशन के पूर्व अध्यक्ष रोह ताए-आक ने सुनवाई के दौरान स्वीकार किया कि निर्वाचन आयोग की निगरानी में सामने आई कमियों के लिए वे स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। कार्यवाहक अध्यक्ष वी चुल-ह्वान ने मतदाताओं से औपचारिक माफी मांगते हुए कहा कि मतदान के दौरान लोगों को हुई भारी असुविधा दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने यह भी कहा कि वे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पूरा सहयोग देने को तैयार हैं।

हालांकि, कार्यवाहक अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे की मांग को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया, जिससे सांसदों की नाराजगी और बढ़ गई।

सांसदों की नाराजगी और 'सामूहिक अवज्ञा'

सुनवाई के दौरान केवल एक मौजूदा आयुक्त के उपस्थित होने पर सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया और विपक्षी पीपल पावर पार्टी — दोनों दलों के सांसदों ने एकमत होकर अनुपस्थित अधिकारियों के रवैये को 'सामूहिक अवज्ञा' करार दिया। यह उल्लेखनीय है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का एक मुद्दे पर इस तरह एकजुट होना दक्षिण कोरिया की ध्रुवीकृत राजनीति में असामान्य माना जाता है।

जांच का दायरा और आगे की प्रक्रिया

जांच समिति ने 43 गवाहों को तलब करने का निर्णय लिया है, जिनमें एनईसी के 27 वर्तमान और पूर्व अधिकारी शामिल हैं। आगे की सुनवाई की समयसारिणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:

1 जुलाई को दूसरी रिपोर्टिंग, 8 जुलाई को प्रभावित मतदान केंद्रों का स्थल निरीक्षण, तथा 14 और 22 जुलाई को दो अलग-अलग दिनों की सुनवाई होगी।

पुलिस और अभियोजन पक्ष की समानांतर जांच

संसदीय जांच के साथ-साथ एक संयुक्त पुलिस-अभियोजन जांच टीम भी सक्रिय है, जो देशभर के 26 मतदान केंद्रों पर हुई मतपत्रों की कमी की जांच कर रही है। इस कमी के कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी। 8 अधिकारियों को इस संयुक्त जांच टीम के सामने पेश होने के लिए कहा गया है — ये वे अधिकारी हैं जो सोल के उन दो मतदान केंद्रों के प्रबंधन में तैनात थे जहाँ मतपत्र खत्म हुए थे।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई 11 जून को जांच टीम द्वारा एनईसी कार्यालय पर की गई छापेमारी के बाद हो रही है। जांचकर्ता अधिकारियों से उस समय एनईसी द्वारा उठाए गए कदमों और स्थिति से निपटने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेंगे।

आगे क्या होगा

यह मामला दक्षिण कोरिया की चुनावी व्यवस्था में जनता के विश्वास को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। आने वाले हफ्तों में संसदीय और आपराधिक — दोनों मोर्चों पर जांच की गति तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के अंत तक समिति की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद एनईसी में संस्थागत सुधारों की मांग और तेज हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों का एकजुट होकर 'सामूहिक अवज्ञा' कहना संकेत देता है कि मामला राजनीतिक सीमाओं से परे जा चुका है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह जांच केवल जवाबदेही का नाटक बनकर रह जाएगी, या एनईसी में ऐसे संरचनात्मक सुधार लाएगी जो भविष्य में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाएँ।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया में मतपत्र संकट क्या है?
3 जून 2026 के स्थानीय चुनावों के दौरान सोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्र खत्म हो गए, जिससे कुछ समय के लिए मतदान रोकना पड़ा। देशभर के 26 मतदान केंद्र इस समस्या से प्रभावित हुए, जिसने नेशनल इलेक्शन कमीशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
संसदीय जांच समिति में कितने सदस्य हैं और इसका काम क्या है?
नेशनल असेंबली ने 18 सदस्यीय विशेष जांच समिति गठित की है, जिसने 23 जून को पहली सुनवाई की। समिति ने 43 गवाह तलब किए हैं — जिनमें एनईसी के 27 वर्तमान और पूर्व अधिकारी शामिल हैं — और जुलाई के अंत तक चार और सुनवाइयाँ निर्धारित हैं।
एनईसी के अधिकारियों ने सुनवाई में क्या कहा?
पूर्व एनईसी अध्यक्ष रोह ताए-आक ने निगरानी में हुई कमियों की जिम्मेदारी स्वीकार की। कार्यवाहक अध्यक्ष वी चुल-ह्वान ने मतदाताओं से औपचारिक माफी माँगी, लेकिन इस्तीफे की माँग को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
पुलिस और अभियोजन पक्ष की जांच का दायरा क्या है?
एक संयुक्त पुलिस-अभियोजन जांच टीम देशभर के 26 मतदान केंद्रों पर हुई मतपत्रों की कमी की जांच कर रही है। 8 अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है, और यह कार्रवाई 11 जून को एनईसी कार्यालय पर हुई छापेमारी के बाद की जा रही है।
आगे की जांच प्रक्रिया कब-कब होगी?
संसदीय समिति की अगली सुनवाइयाँ 1 जुलाई (दूसरी रिपोर्टिंग), 8 जुलाई (स्थल निरीक्षण), 14 जुलाई और 22 जुलाई को निर्धारित हैं। इन सुनवाइयों के आधार पर समिति की अंतरिम रिपोर्ट तैयार होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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