दक्षिण कोरिया मतपत्र संकट: संसदीय जांच समिति की पहली सुनवाई, 43 गवाह तलब
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में 3 जून 2026 के स्थानीय चुनावों के दौरान एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी के मामले में गठित 18 सदस्यीय विशेष संसदीय जांच समिति ने मंगलवार, 23 जून को अपनी पहली औपचारिक सुनवाई आयोजित की। इस सुनवाई में नेशनल इलेक्शन कमीशन (एनईसी) के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
मुख्य घटनाक्रम
नेशनल इलेक्शन कमीशन के पूर्व अध्यक्ष रोह ताए-आक ने सुनवाई के दौरान स्वीकार किया कि निर्वाचन आयोग की निगरानी में सामने आई कमियों के लिए वे स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। कार्यवाहक अध्यक्ष वी चुल-ह्वान ने मतदाताओं से औपचारिक माफी मांगते हुए कहा कि मतदान के दौरान लोगों को हुई भारी असुविधा दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने यह भी कहा कि वे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पूरा सहयोग देने को तैयार हैं।
हालांकि, कार्यवाहक अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे की मांग को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया, जिससे सांसदों की नाराजगी और बढ़ गई।
सांसदों की नाराजगी और 'सामूहिक अवज्ञा'
सुनवाई के दौरान केवल एक मौजूदा आयुक्त के उपस्थित होने पर सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया और विपक्षी पीपल पावर पार्टी — दोनों दलों के सांसदों ने एकमत होकर अनुपस्थित अधिकारियों के रवैये को 'सामूहिक अवज्ञा' करार दिया। यह उल्लेखनीय है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का एक मुद्दे पर इस तरह एकजुट होना दक्षिण कोरिया की ध्रुवीकृत राजनीति में असामान्य माना जाता है।
जांच का दायरा और आगे की प्रक्रिया
जांच समिति ने 43 गवाहों को तलब करने का निर्णय लिया है, जिनमें एनईसी के 27 वर्तमान और पूर्व अधिकारी शामिल हैं। आगे की सुनवाई की समयसारिणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:
1 जुलाई को दूसरी रिपोर्टिंग, 8 जुलाई को प्रभावित मतदान केंद्रों का स्थल निरीक्षण, तथा 14 और 22 जुलाई को दो अलग-अलग दिनों की सुनवाई होगी।
पुलिस और अभियोजन पक्ष की समानांतर जांच
संसदीय जांच के साथ-साथ एक संयुक्त पुलिस-अभियोजन जांच टीम भी सक्रिय है, जो देशभर के 26 मतदान केंद्रों पर हुई मतपत्रों की कमी की जांच कर रही है। इस कमी के कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी। 8 अधिकारियों को इस संयुक्त जांच टीम के सामने पेश होने के लिए कहा गया है — ये वे अधिकारी हैं जो सोल के उन दो मतदान केंद्रों के प्रबंधन में तैनात थे जहाँ मतपत्र खत्म हुए थे।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई 11 जून को जांच टीम द्वारा एनईसी कार्यालय पर की गई छापेमारी के बाद हो रही है। जांचकर्ता अधिकारियों से उस समय एनईसी द्वारा उठाए गए कदमों और स्थिति से निपटने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेंगे।
आगे क्या होगा
यह मामला दक्षिण कोरिया की चुनावी व्यवस्था में जनता के विश्वास को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। आने वाले हफ्तों में संसदीय और आपराधिक — दोनों मोर्चों पर जांच की गति तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के अंत तक समिति की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद एनईसी में संस्थागत सुधारों की मांग और तेज हो सकती है।