रिलायंस होम फाइनेंस मामले में सीबीआई की दूसरी चार्जशीट, अनिल अंबानी समूह के 3 वरिष्ठ अधिकारी नामजद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1 अक्टूबर 2026 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) मामले में मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दूसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कुल 11 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस एडीए समूह के तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इस आरोपपत्र के दाखिल होने के साथ ही इस पूरे मामले में अब तक कुल 15 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
नामजद अधिकारी और आरोपी कंपनियाँ
सीबीआई के अनुसार, दूसरी चार्जशीट में नामजद तीन प्रमुख अधिकारियों में आरएचएफएल के निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना, रिलायंस कैपिटल समूह के प्रबंध निदेशक एवं उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला तथा रिलायंस पावर के सीएफओ सुरेश नागराजन शामिल हैं। इसके अलावा आरएचएफएल के चार्टर्ड अकाउंटेंट और वैधानिक ऑडिटर विजय नपावालिया को भी आरोपी बनाया गया है।
चार्जशीट में सात कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है — रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड, रिलायंस बिजनेस ब्रॉडकास्ट न्यूज होल्डिंग्स लिमिटेड, रिलायंस मीडियावर्क्स फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और कुंजबिहारी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड।
आरोपों का सार: ₹7,429 करोड़ का कथित हस्तांतरण
सीबीआई की जांच में कथित तौर पर यह सामने आया है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड द्वारा उधार लिए गए लगभग ₹7,429.16 करोड़ विभिन्न मध्यवर्ती और फ्रंट कंपनियों के ज़रिए रिलायंस एडीए समूह की अन्य कंपनियों तक पहुँचाए गए। एजेंसी का आरोप है कि यह हस्तांतरण ऋणदाताओं द्वारा निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया गया, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को नुकसान हुआ और संबंधित संस्थाओं तथा आरोपियों को अनुचित लाभ मिला।
सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्व आंध्रा बैंक) और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था।
मुकदमे की पृष्ठभूमि और व्यापक जांच
गौरतलब है कि इससे पहले एजेंसी ने इस मामले में 9 जुलाई को पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 4 आरोपियों को नामजद किया गया था। अब दूसरी चार्जशीट के साथ यह संख्या बढ़कर 15 हो गई है।
सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज फ्रॉड शाखा ने रिलायंस समूह की कई कंपनियों — रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (आरसीएफएल), रिलायंस टेलीकॉम (आरटीएल) और रिलायंस कैपिटल (आरसीएल) — के खिलाफ कुल 9 एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की शिकायतों पर आधारित हैं। रिलायंस एडीए समूह से जुड़े समग्र मामलों में यह सातवीं चार्जशीट है, और अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी
महत्वपूर्ण यह है कि इस पूरी जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा रही है, जो मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब बड़े कॉर्पोरेट समूहों के विरुद्ध जांच एजेंसियों की सक्रियता पर व्यापक सार्वजनिक ध्यान केंद्रित है।
आगे की जांच और संभावित कार्रवाई
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका और अतिरिक्त आरोपों की जांच अभी भी जारी है। नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में अगली सुनवाई और जांच की दिशा तय करने में आने वाले सप्ताह निर्णायक साबित हो सकते हैं।