ई-चालान को बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश में नहीं, मौखिक टिप्पणी थी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि लंबित ई-चालान की राशि को बिजली बिल से जोड़कर वसूली करने का सुझाव केवल सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणी था — यह निर्देश शीर्ष अदालत के किसी लिखित आदेश में शामिल नहीं है। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को अपलोड किए गए आदेश में अदालत ने लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए कई अन्य ठोस उपायों का उल्लेख किया है।
मौखिक टिप्पणी और लिखित आदेश में अंतर
जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ सड़क सुरक्षा से जुड़े एक लंबित मामले की सुनवाई कर रही थी। सोमवार की सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से सुझाव दिया था कि लंबित ट्रैफिक जुर्माने की वसूली के लिए इसे बिजली बिलों में जोड़ने की संभावना पर संबंधित अधिकारी विचार कर सकते हैं। हालाँकि, उसी दिन पारित और गुरुवार को अपलोड किए गए लिखित आदेश में ई-चालान को बिजली बिल से जोड़ने का कोई निर्देश नहीं है।
गौरतलब है कि मौखिक टिप्पणियाँ और लिखित आदेश कानूनी रूप से भिन्न होते हैं — केवल लिखित आदेश ही बाध्यकारी होता है। इस स्पष्टीकरण से उस भ्रम पर विराम लग गया है जो सोमवार की रिपोर्टों के बाद उत्पन्न हुआ था।
लिखित आदेश में क्या है: वसूली के लिए ठोस उपाय
लिखित आदेश में अदालत ने लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इनमें ऑनलाइन वाहन सेवाओं को फ्रीज करना, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के नवीनीकरण या नए सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक, और बकाया भुगतान होने तक वाहन मालिक का पता अपडेट न करना शामिल है।
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सभी लंबित जुर्माने का भुगतान होने तक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाए। जिन वाहनों पर ई-चालान लंबित हों, उन्हें परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाए, जिससे उनकी बिक्री और स्वामित्व हस्तांतरण भी बाधित होगा।
ड्राइविंग लाइसेंस और PUC पर भी सख्ती
अदालत ने कहा कि बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने के भी कदम उठाए जाएं। इसके अतिरिक्त, लंबित चालान का भुगतान होने तक किसी भी केंद्र को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
पीठ ने वाहनों की रैंडम जाँच का भी निर्देश दिया और कहा कि यदि किसी वाहन का ई-चालान भुगतान न हो, तो आवश्यकता पड़ने पर वाहन को जब्त करने के लिए कदम उठाए जाएं।
₹49,194 करोड़ की वसूली का सवाल
सर्वोच्च न्यायालय ने बताया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विभिन्न समयों पर जारी ई-चालानों के संबंध में कुल ₹49,194.05 करोड़ की वसूली करनी है। इसमें से अब तक केवल ₹26,175.05 करोड़ की ही वसूली हो पाई है। अदालत ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है जब तक जुर्माने की प्रभावी वसूली सुनिश्चित न हो।
यह ऐसे समय में आया है जब अदालत इस मामले की निगरानी लगभग 14 वर्षों से कर रही है और मौजूदा पीठ एक वर्ष से अधिक समय से सुनवाई कर रही है।
SOP अनुपालन और अगली सुनवाई
पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 28 अक्टूबर 2025 को तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को लागू करने का निर्देश दिया। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136ए और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167ए के अनुपालन को भी सुनिश्चित करने को कहा गया।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड को इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन की निगरानी का निर्देश दिया गया। अदालत के न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी), वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, को मामले में अब तक जारी सभी निर्देशों, उनकी तारीखों, अनुपालन स्थिति और अपनी टिप्पणियों का चार्ट तैयार करने को कहा गया है।
अदालत ने दिल्ली के मुख्य सचिव को दिल्ली उच्च न्यायालय और मथुरा रोड स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास पैदल यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित पूर्व निर्देशों के अनुपालन पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित है।